करवा चौथ का त्योहार बस आने ही वाला है। हम सब जानते ही हैं कि करवा चौथ पर सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। शाम में पूजा करके फिर रात में महिलाएं छलनी में दीपक रखकर चांद की पूजा करती हैं।

चांद को छलनी में देखकर, इसके बाद पति का चेहरा छलनी से देखकर, पति के हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ा जाता है। यहां सहज ही सवाल उठता है कि आखिर करवा चौथ पर चांद की पूजा क्यों होती है और चांद को और फिर पति को छलनी से क्यों देखा जाता है। क्या है इसके पीछे छिपा कारण ...

यह है इसका धार्मिक आधार ..

इस तथ्य को धार्मिक आधार से देखें तो कहा जाता है कि चंद्रमा भगवान ब्रह्मा का रूप है। एक मान्यता यह भी है कि चांद को दीर्घायु का वरदान प्राप्त है और चांद की पूजा करने से दीर्घायु प्राप्त होती है।

साथ ही चद्रंमा सुंदरता और प्रेम का प्रतीक भी होता है, यही कारण है कि करवा चौथ के व्रत में महिलाएं छलनी से चांद को देखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है।

करवा चौथ पर चांद को छलनी से देखने का महत्व 
करवा चौथ पर चांद को छलनी से देखने का महत्व 

ये है इससे जुड़ी पौराणिक कथा ...

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक साहूकार की बेटी ने अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था पर अत्यधिक भूख की वजह से उसकी हालत खराब होने लगी थी।

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यह देखकर साहूकार के बेटों ने अपनी बहन से खाना खाने को कहा लेकिन साहूकार की बेटी ने खाना खाने से मना कर दिया। भाइयों से बहन की ऐसी हालत देखी नहीं गई तो उन्होंने चांद के निकलने से पहले ही एक पेड़ पर चढ़कर छलनी के पीछे एक जलता हुआ दीपक रखकर बहन से कहा कि चांद निकल आया है।

छलनी में दीपक रखकर करते हैं पूजा 
छलनी में दीपक रखकर करते हैं पूजा 

बहन ने भाइयों की बात मान ली और दीपक को चांद समझकर अपना व्रत खोल लिया और व्रत खोलने के बाद उनके पति की मुत्यु हो गई और ऐसा कहा जाने लगा कि असली चांद को देखे बिना व्रत खोलने की वजह से ही उनके पति की मृत्यु हुई थी।

तब से अपने हाथ में छलनी लेकर बिना छल-कपट के चांद को देखने के बाद पति के दीदार की परंपरा शुरू हुई जो आज भी जारी है।