नई दिल्ली: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती आने में अब कुछ ही दिन शेष बचे है। ऐसे में हम आपको महात्मा गांधी के प्रिय भजन के बारे में बताने जा रहे है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पसंदीदा भजन ''वैष्णव जन...'' की गूंज देश ही नहीं अब दुनियाभर में सुनने की मिलेगी। महात्मा गांधी की 149वीं जयंती के मौके पर केंद्र सरकार ने उनके प्रिय भजन का खास वीडियो जारी किया था। इसमें 124 देशों के गायकों, कलाकारों और म्यूजिक ग्रुप्स ने हिस्सा लिया था। उन्होंने अपने ही अंदाज में बापू को अनोखी श्रद्धांजलि दी थी।

आपको बता दें कि वैष्णव जन तो तेने कहिये अत्यन्त लोकप्रिय भजन है जिसकी रचना १५वीं शताब्दी के सन्त नरसिंह मेहता ने की थी। यह गुजराती भाषा में है। महात्मा गांधी के नित्य की प्रार्थना में यह भजन भी सम्मिलित था। इस भजन में वैष्णव जनों के लिए उत्तम आदर्श और वृत्ति क्या हो, इसका वर्णन है।

गांघी जी का प्रिय भजन इस प्रकार है:

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ पराई जाणे रे,

पर दु:खे उपकार करे तोये मन अभिमान न आणे रे ॥

सकल लोकमां सहुने वंदे निंदा न करे केनी रे,

वाच काछ मन निश्चल राखे धन धन जननी तेनी रे ॥

समदृष्टि ने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे,

जिह्वा थकी असत्य न बोले, परधन नव झाले हाथ रे ॥

मोह माया व्यापे नहि जेने, दृढ़ वैराग्य जेना मनमां रे,

रामनाम शुं ताली रे लागी, सकल तीरथ तेना तनमां रे ॥

वणलोभी ने कपटरहित छे, काम क्रोध निवार्या रे,

भणे नरसैयॊ तेनु दरसन करतां, कुल एकोतेर तार्या रे ॥

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रघुपति राघव राजा राम

पतित पावन सीता राम

सीता राम सीता राम

भज प्यारे तू सीता राम

रघुपति राघव राजा राम

ईश्वर अल्लाह तेरे नाम

सबको सन्मति दे भगवान

रघुपति राघव राजा राम

रात को निंदिया दिन तो काम

कभी भजोगे प्रभु का नाम

करते रहिये अपने काम

लेते रहिये हरि का नाम

रघुपति राघव राजा राम

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उठ जाग मुसाफिर भोर भई,

अब रैन कहाँ जो सोवत है ।

जो जागत है सो पावत है,

जो सोवत है सो खोवत है ।

टुक नींद से अंखियाँ खोल जरा,

और अपने प्रभु से ध्यान लगा ।

यह प्रति करन की रीत नहीं,

प्रभु जागत है तू सोवत है ।

जो कल करना सो आज कर ले,

जो आज करना सो अब कर ले ।

जब चिड़ियों ने चुग खेत लिया,

फिर पछ्ताये क्या होवत है ।

नादान भुगत करनी अपनी,

अय पापी पाप में चैन कहाँ ।

जब पाप की गठरी सीस धरी

फिर सीस पकड़ क्योँ रोवत है ।___________________________________________________________

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दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल

आँधी में भी जलती रही गाँधी तेरी मशाल

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल

दे दी ...

धरती पे लड़ी तूने अजब ढंग की लड़ाई

दागी न कहीं तोप न बंदूक चलाई

दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई

वाह रे फ़कीर खूब करामात दिखाई

चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल

दे दी ...

रघुपति राघव राजा राम

शतरंज बिछा कर यहाँ बैठा था ज़माना

लगता था मुश्किल है फ़िरंगी को हराना

टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था ताना

पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना

मारा वो कस के दांव के उलटी सभी की चाल

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल

दे दी ...

रघुपति राघव राजा राम

जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े

मज़दूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े

हिंदू और मुसलमान, सिख पठान चल पड़े

कदमों में तेरी कोटि कोटि प्राण चल पड़े

फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल

दे दी ...

रघुपति राघव राजा राम