हम पूजा तो हर दिन करते ही हैं पर पूजा करते हुए भी कुछ बातों को जानना बेहद जरूरी होता है। वैसे तो धर्मशास्त्रों में अनजाने में शिकारी द्वारा शिवलिंग पर चढ़े पत्र और जल से ही शिव की प्रसन्नता और कृपा मिलने के प्रसंग है।

इससे यही संदेश मिलता है कि श्रद्धा और आस्था भी ईश्वर की समीपता के लिए अहम है, चाहे वह किसी भी रूप या अनजाने में हो। लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि श्रद्धा के नाम पर मर्यादा भूल जाएं।

इस बात का सार यही है कि श्रद्धा के साथ मर्यादा का पालन करते हुए देव उपासना की जाए, तो वह भक्ति को सफल और सार्थक ही नहीं बनाती, बल्कि मनोरथ पूर्ति के साथ-साथ मन को भी शांति और सुकून देती है।

हिन्दू धर्मशास्त्रों में देव उपासना से जुड़ी ऐसी ही मर्यादाएं बताई गई हैं। जिसमें अलग-अलग देवताओं को फूल और अन्य पूजा सामग्री को चढ़ाना निषेध माना गया है।

देवता को प्रिय है ये चीजें 
देवता को प्रिय है ये चीजें 

इनमें से कुछ सामग्रियों को हम अनजाने में देवता को अर्पण करते हैं। ऐसा करने से हमें पूजा का फल तो नहीं मिलता साथ ही देवता हमसे क्रोधित भी हो जाते हैं।

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यहां जानें किस देवी-देवता को कौन-सी पूजा सामग्री न चढ़ाएं -

- भगवान विष्णु को धतूरा, मालती, कनेर, सेमल के फूल व अक्षत न चढ़ाएं। खासतौर पर जब धन लाभ की कामना से पूजा की जाए।

- श्री गणेश की पूजा में तुलसी न चढ़ाएं।

- भगवान शंकर को केतकी, पलास, मोलसिरी, चंपा, कुंद के फूल न चढ़ाएं।

- देवी उपासना में दूर्वा और मदार के फूल न चढ़ाएं।

इनके अलावा नीचे लिखी दो बातें भी देव उपासना में न भूलें -

- फूल, फल या पत्ते प्राकृतिक रूप से जिस स्थिति और दशा में पैदा हो, वैसे ही चढ़ाना चाहिए