अमरावती : देश में अन्य किसी राज्य में नहीं ऐसी प्रणाली आंध्र प्रदेश में अपनाई गई। पोलावरम परियोजना के कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में बनी सरकार ने रिवर्स-टेंडरिंग प्रणाली अपनाई गई। इसमें सरकार को सफलता भी मिली। परियोजना की लागत के लिए 274.25 करोड़ रुपये के टेंडर मंगवाये गये थे, इन्हें रद्द कर फिर से टेंडर मंगवाये जाने से सरकार की आय में 58.53 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। इससे लोगों में हर्ष व्यक्त किया जा रहा है।

सरकार के इस कदम से पोलावरम परियोजना के निर्माण कार्य में चंद्रबाबू नायडू द्वारा की गई धांधलियों का चिठ्ठा खुल रहा है। इसे पुष्टी मिल रही है। बीती सरकार ने पोलावरम के हेड वर्कस, जल विद्युत केंद्र निर्माण के कार्य 4,987.55 करोड़ रुपयों की राशि से करने पर जनधन का निवेश बड़े पैमाने पर हुआ। रिवर्स-टेंडरिंग के चलते सरकार के खजाने में 58.53 करोड़ रुपये का लाभ हो रहा है। साथ ही मंत्री और अधिकारी सोच रहे हैं कि इन कार्यों को 18 महीने की अवधि पूरा कर किर्तीमान बनाया जाए।

पोलावरम परियोजना के कार्यों में 65वें पैकेज के अंतर्गत जिसमें 919 मीटर सुरंग की खुदवाई, बांयी नहर का हेड रेगुलेटर, नेविगेशन लॉक, एप्रोच कैनाल की खुदवाई, नेविगेशन चैनल में शेष कार्य शामिल हैं। वर्ष 2005 में इन कार्यों को 'यूनिटी इनफ्रा' नामक संस्था ने 103.91 करोड़ रुपये में टेंडर हासिल किया था। संस्था ने केवल 13.92 करोड़ रुपयों का ही काम पूरा किया। तत्पश्चात वित्तीय समस्या में उलझी संस्था ने नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में दीवालिया याचिका दायर की। उस संस्था को ब्लैक सूची में शामिल करने को लेकर पोलावरम परियोजना के मुख्य अभियंता के प्रस्ताव को स्टेट लेवल स्टैंडिंग कमेटी (एसएलएससी) ने मुहर लगा दी।

वर्ष 2018 में 8 नवंबर को उस संस्था के साथ ठेके को तत्कालीन सरकार ने रद्द कर दिया। तत्पश्चात उन कार्यों की लागत वर्ष 2018-19 के मुताबिक 358.11 करोड़ रुपये टीडीपी के नेतृत्व में बनी सरकार ने बढ़ाया था और 318.84 करोड़ रुपये के लिए तकनीकी तौर पर अनुमति दी थी। तत्कालीन जल संसाधन मंत्री देविनेनी उमामहेश्वर राव ने बेनामी संस्था 'सूर्या कंस्ट्रक्शन्स' को नॉमिनेशन प्रणाली पर सौंपने का तत्कालीन सीएम चंद्रबाबू ने आदेश दिया था। उस प्रस्ताव को अधिकारियों ने नामंजूर किया था।

आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव 2019 से कुछ महीने पहले यानी 28 जनवरी को उन कार्यों को 276,80,38,942 रुपये की लागत से एलएस-ओपेन प्रणाली के अंतर्गत चुनी गई संस्था को मिल सके, इस तरह की नियमावली बना कर बीती सरकार ने टेंडर का नोटिफिकेशन जारी किया था।

मैक्स इनफ्रा लिमिटेड और शंकरनारायण कंस्ट्रक्शन्स संस्था ने ही बीड दाखिल किया था। 4.77 प्रतिशत अधिक लागत पर (290,00,74,399.53 रुपये) कोट करते हुये बीड दाखिल कर चुकी मैक्स इनफ्रा संस्था ने बीड हासिल किया था।

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अब रिवर्स-टेंडरिंग के अंतर्गत 'मैक्स इनफ्रा' ने ही 15.6 प्रतिशत कम लागत में टेंडर हासिल किया। कुल मिलाकर 20.37 प्रतिशत कम लागत में 'मैक्स इनफ्रा' ने टेंडर प्राप्त किया।