महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 : जानिए कौन सा गठबंधन किस पर पड़ेगा भारी

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नई दिल्ली : निर्वाचन आयोग ने शनिवार को महाराष्ट्र और हरियाणा राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी। दोनों ही राज्यों में 21 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 24 तारीख को मतगणना होगी।

चुनाव की घोषणा के साथ ही महाराष्ट्र में गठबंधन की सियासत अब चरम पर होगी। क्योंकि सभी प्रमुख दल यहां गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हैं। आइए जानते हैं भाजपा-शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में कौन किससे आगे है।

महाराष्ट्र में इस वक्त भाजपा-शिवसेना की सरकार है। दोनों ही दल केंद्र में भी सहयोगी हैं। दूसरी तरफ मुख्य विपक्ष के तौर पर भले ही कांग्रेस है, लेकिन नेताओं को यह भी मालूम है कि अकेले भाजपा-शिवसेना का मुकाबला आसान नहीं होगा। इसलिए कांग्रेस ने एनसीपी के साथ गठबंधन का ऐलान किया है।

देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)

भाजपा-शिवसेना गठबंधन

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन ही फेवरेट है। वैसे दोनों ही सहयोगी पार्टियों के बीच अभी सीटों बंटवारे पर कोई आम सहमति नहीं बनी है, लेकिन भाजपा और शिवसेना ने स्पष्ट कर दिया है कि दोनों मिलकर ही चुनाव लड़ेंगे।

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट रूप से साफ कर दिया कि आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन जारी रहेगा और दोनों पार्टियां 135-135 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी।

ठाकरे ने कहा, "इस फार्मूले पर निर्णय पहले ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ले लिया था। हम उस फार्मूले पर अडिग हैं। गठबंधन की घोषणा जल्द ही की जाएगी।" गठबंधन के दोनों मुख्य घटक दल यदि इस फार्मूले को अंतिम रूप दे देते हैं तो, 288 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन के पास छोटी पार्टियों को देने के लिए केवल 18 सीटें ही रह जाएंगी।

सोनिया गांधी एवं शरद पवार (फाइल फोटो)

कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन

कांग्रेस और एनसीपी महाराष्ट्र के चुनावी संग्राम में एक साथ उतरने का फैसला किया है। हालांकि दोनों के बीच अभी सीटों की संख्या पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई गई है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा था कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस 125-125 सीटों पर चुनाव लड़ेगी तथा 38 विधानसभा क्षेत्र छोटे सहयोगियों के लिए छोड़े जाएंगे।

कौन किस पर भारी

साल 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। उस वक्त भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने। भाजपा को इस बार पहले से ही शिवसेना का साथ मिला हुआ है। साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ईमानदार छवि और विकास की राजनीति भाजपा गठबंधन के लिए फायदेमंद साबित होगा।

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दूसरी तरफ कांग्रेस और एनसीपी के लिए साख बचाने का चुनाव साबित होगा। कांग्रेस की तरफ से कोई बड़ा चेहरा अभी चुनाव में सक्रिय नजर नहीं आ रहा है, जबकि 80 साल के एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार चुनाव प्रचार में जुटे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार की राजनीतिक का दौर अब जा चुका है। इसलिए कांग्रेस और एनसीपी के लिए यह चुनाव 'करो या मरो' जैसी स्थिति वाला साबित होगा।

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समीकरण की नजर से कौन है हिट

महाराष्ट्र में कुल 288 विधानसभा सीट हैं। साल 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 122 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। दूसरे नंबर पर शिवसेना रही थी जिसके खाते में 63 सीट आई थी। कांग्रेस को 45 सीट जबकि एनसीपी को 41 सीट मिली थी।

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बात वोट प्रतिशत की करें तो भाजपा को सबसे ज्यादा 27.8 फीसदी, शिवसेना को 19.3 फीसदी, कांग्रेस को 18 फीसदी और एनसीपी को 17.96 फीसदी मत मिले थे।

बात इन आंकड़ों की करें तो साल 2014 में भाजपा-शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़े थे। जबकि इस बार दोनों ही पार्टी पहले से गठबंधन के लिए तैयार है। ऐसे में लाजिमी है कि इनका मत प्रतिशत जरूर बढ़ेगा। साथ ही सीटों की संख्या भी बढ़ सकती है।

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