पितृपक्ष चल रहा है और हर कोई अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान कर रहा है जिससे कि पितृ तृप्त हो और उन्हें शुभाशीष प्रदान करे।

देखा जाए तो हमारे पितृ या पूर्वज कई प्रकार के होते हैं। उनमें से कइयों ने तो दूसरा जन्म भी ले लिया होगा और बहुतों ने पितृलोक में स्थान भी प्राप्त कर लिया होगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जो पितर पितृलोक में स्थान प्राप्त कर लेते हैं वे हर वर्ष श्राद्ध पक्ष में अपने वंशजों को देखने आते हैं उस वक्त वे उन्हें आशीर्वाद या श्राप देकर चले जाते हैं।

अब यहां सवाल यह उठता है कि हम कैसे जान सकते हैं कि पितृ हमसे प्रसन्न है या नाराज ...

इन लक्षणों से जानें कि पितृ आपसे प्रसन्न है ....

-जिस घर में प्रतिदिन पूजा-पाठ होता है, ज्योत जलाई जाती है और भगवान को भोग लगाया जाता है निश्चित ही उनके पितृ उन पर प्रसन्न होते हैं।

कहते हैं कि जहां भगवान की पूजा नहीं होती हैं, उनको भोग आदि नहीं लगता, वहां राक्षस निवास नहीं करते।

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- जिस घर में बहन, बेटी, बहू या पत्नी का सम्मान किया जाता है और उनकी इच्छाओं की पूर्ति की जाती है, निश्चित ही वहां यानी उस घर के पितृ प्रसन्न होते हैं।

कहते हैं कि जिस घर में स्त्री के आंसू गिरते हैं, उसे सताया जाता है वहां सब कुछ नष्ट हो जाता है।

पितृपक्ष में करें पितरों को प्रसन्न 
पितृपक्ष में करें पितरों को प्रसन्न 

- यदि आपकी संतान आपका सम्मान करती है, आपकी आज्ञा मानती है और आप भी उसकी भावनाओं का ध्यान रखते हैं तो यह माना जाता है कि पितृ आप पर प्रसन्न हैं।

- यदि सपने में आपके पूर्वज आकर आपको आशीर्वाद दें या सपने में कोई सांप आपकी सुरक्षा करता हुआ नजर आए तो माना जाता है कि आपके पितृ आप पर प्रसन्न हैं।

- आपके किसी भी कार्य में बाधा उत्पन्न न हो और हर कार्य आसानी से बनते जाएं तो माना जाता है कि आपके पितृ आप पर प्रसन्न हैं।

पितरों की प्रसन्नता के अन्य लक्षण है घर की ज्योत अच्छे से ऊपर तक स्वत: ही जलना, श्राद्ध पक्ष में ही रुके हुए कार्य संपन्न होना या अचानक धन की प्राप्ति होना, घर के किसी मृत व्यक्ति को याद करते ही कार्य संपन्न हो जाना, सभी का सहयोग मिलना आदि।

आइये अब जानते हैं पितरों की नाराजगी के लक्षण क्या है ....

- माना जाता है कि यदि आप जो भी कार्य कर रहे हैं, उसमें रुकावट आ रही है और कोई भी कार्य समय पर संपन्न नहीं होता है तो इसे पितरों के नाराज होने या पितृदोष का लक्षण माना जाता है।

- वैसे तो हर घर में थोड़ी-बहुत खटपट चलती रहती है लेकिन यदि रोज ही गृहकलह हो रही है तो यह समझा जाता है कि पितृ आपसे नाराज हैं।

श्राद्ध-तर्पण का महत्व 
श्राद्ध-तर्पण का महत्व 

- ऐसी मान्यता है कि पितृ नाराज रहते हैं तो संतान पैदा होने में बाधा आती है। यदि संतान हुई है तो वह आपकी घोर विरोधी रहेगी। आप हमेशा उससे दु:खी ही रहेंगे।

- यह भी माना जाता है कि पितरों के नाराज रहने के कारण घर की किसी संतान का विवाह नहीं होता है और यदि हो भी जाए तो वैवाहिक जीवन अस्थिर रहता है।

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- कहते हैं कि यदि पितृ नाराज हैं तो आप जीवन में किसी आकस्मिक नुकसान या दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। आपका रुपया जेलखाने या दवाखाने में ही बर्बाद हो जाता है।

पितरों की नाराजगी के अन्य लक्षण है, मांगलिक कार्यों में अचानक कोई बाधा उत्पन्न होना, संतान का पढ़ाई में दिल नहीं लगना, श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों द्वारा भोजन नहीं खाया जाना, घर में बरकत नहीं रहना आदि।