हम सब जानते हैं कि अभी पितृपक्ष चल रहा है और इन दिनों पितरों के निमित्त श्राद्ध किये जा रहे हैं। श्राद्ध मृत व्यक्ति की मृत्यु तिथि को किया जाता है।

इस साल पितृपश्र 28 सितंबर तक चलेंगे। यहां यह सवाल उठता है कि किसी मृत व्यक्ति की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो उसका श्राद्ध किस तिथि पर किया जा सकता है...

- प्रतिपदा तिथि को मृत नाना-नानी के लिए श्राद्ध करना चाहिए। अगर नाना-नानी के परिवार में श्राद्ध करने वाला कोई न हो और उनकी मृत्यु तिथि मालूम न हो तो इस तिथि पर श्राद्ध कर सकते हैं।

- अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई हो तो उसका श्राद्ध पितृ पक्ष की पंचमी तिथि पर करना चाहिए।

श्राद्ध व तर्पण का महत्व 
श्राद्ध व तर्पण का महत्व 

-इस तिथि पर उस महिला का श्राद्ध करना चाहिए, जिसकी मृत्यु उसके पति से पहले हुई हो यानी पति के जीवित रहते जिस स्त्री की मृत्यु होती है, उसका श्राद्ध नवमी तिथि पर करना चाहिए। इस तिथि पर परिवार की सभी मृत महिलाओं के लिए श्राद्ध किया जा सकता है।

-पितृ पक्ष की एकादशी तिथि पर उन लोगों के लिए श्राद्ध करना चाहिए, जो संन्यासी हो गए थे।

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-मृत बच्चों का श्राद्ध पितृ पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है।

-इस तिथि में उन लोगों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी शस्त्र से हुई हो, आत्म हत्या की हो, जहर के कारण हुई हो या दुर्घटना में हुई हो यानी जिन लोगों की अकाल मृत्यु होती है, उनके लिए इस तिथि पर श्राद्ध किया जाता है।

-ये पितृ पक्ष की अंतिम तिथि है। यदि पूरे पितृ पक्ष में किसी का श्राद्ध करना भूल गए हैं या मृत व्यक्ति की तिथि मालूम नहीं है तो इस तिथि पर उनके लिए श्राद्ध किया जा सकता है।