पितृपक्ष शुरू हो चुके हैं जो 28 सितंबर तक चलेंगे। इन दिनों पितरों की तृप्ति के लिए उनका श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान किया जाता है। इन सबसे पितर तृप्त होते हैं और वे हमें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

वहीं जो लोग अपने पूर्वजों अर्थात पितरों की संपत्ति का उपभोग तो करते हैं, लेकिन उनका श्राद्ध नहीं करते, ऐसे लोग अपने ही पितरों द्वारा अभिशप्त होकर नाना प्रकार के दुखों को भोगते हैं।

साथ ही यह भी जानना चाहिए कि पितृपक्ष के भी कुछ नियम होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। क्योंकि पितृपक्ष और पिंडदान के समय थोड़ी सी भी लापरवाही आपके पूरे दान-पुण्य पर पानी फेर सकती है।

तो आइये सबसे पहले जानते हैं कि पितृपक्ष में क्या करें ....

- सबसे पहले तो आप ये जान लें कि श्राद्ध में अपराह्न का समय विशेष होता है, इसी समय पूर्वजों का श्राद्ध किया जाना चाहिए। साथ ही कुशा, श्राद्धस्थली की स्वच्छता, उदारता से भोजन आदि की व्यवस्था और ब्राह्मण की उपस्थिति भी होनी चाहिए।

- श्राद्ध में साफ-सफाई पर ध्यान दें, शांत चित्त रहें, क्रोध न करें और धैर्य से पूजन-पाठ करें। किसी तरह की जल्दबाजी न करें।

पूरे विधि-विधान से करें श्राद्ध
पूरे विधि-विधान से करें श्राद्ध

- श्राद्ध के लिए उचित द्रव्य हैं- तिल, चावल, जौ, जल, मूल (जड़युक्त सब्जी) और फल।

- श्राद्ध में 3 चीजें शुद्धिकारक होती हैं- पुत्री के पुत्र को भोजन, तिल और नेपाली कम्बल।

अब जानें श्राद्ध में गलती से भी क्या न करें ...

- श्राद्ध में कदापि इन चीजों का उपयोग न करें- मसूर, राजमा, कोदो, चना, कपित्थ, अलसी, तीसी, सन, बासी भोजन और समुद्र जल से बना नमक। भैंस, हिरणी, ऊंटनी, भेड़ और एक खुर वाले पशु का दूध भी वर्जित है, पर भैंस का घी वर्जित नहीं है।

- श्राद्ध में दूध, दही और घी पितरों के लिए विशेष तुष्टिकारक माने जाते हैं। श्राद्ध किसी दूसरे के घर में, दूसरे की भूमि में कभी नहीं किया जाता है। जिस भूमि पर किसी का स्वामित्व न हो, सार्वजनिक हो, ऐसी भूमि पर श्राद्ध किया जा सकता है।

पितृपक्ष में क्या करें और क्या न करें 
पितृपक्ष में क्या करें और क्या न करें 

- आप यह भी जान लें कि पितृपक्ष में घर से किसी जरूरतमंद को खाली हाथ न भेजें। मान्यता है कि हमारे पितर यानी पूर्वज अन्न- जल के लिए किसी भी रूप में हमारे सामने आ सकते हैं।

- पितृपक्ष में किसी जानवर को मारने की गलती न करें। किसी भी पक्षी या जानवर खासतौर पर गाय, कुत्ता, बिल्ली, कौए को श्राद्ध पक्ष में नहीं मारना चाहिए। जानवरों की भी सेवा करनी चाहिए। उन्हें भोजन कराएं और पानी पिलाएं।

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- पितृपक्ष के दौरान खान-पान बिल्कुल साधारण होना चाहिए। मांस, मछली, अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए। भोजन बिल्कुल सादा होना चाहिए यानी खाने में प्याज और लहसुन का भी इस्तेमाल ना करें। शराब और किसी भी नशीली चीजों से दूर रहें।

- पितृपक्ष में पूर्णत: ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। परिवार में शांति बनाए रखें और भोग- विलास की चीजों से बचें। इन दिनों आपका पूरा ध्यान सिर्फ पूर्वजों की सेवा में होना चाहिए।

- कोई भी नया काम इन दिनों में शुरू नहीं करना चाहिए। श्राद्ध पक्ष में शोक व्यक्त कर पितरों को याद किया जाता है इसलिए इन दिनों में किसी भी जश्न और त्यौहार का आयोजन न करें। इसके अलावा कोई नया सामान भी इस समय खरीदने से बचें।