कष्टों से मुक्ति दिलाता है अनंत चतुर्दशी व्रत, जानें इसका महत्व व पूजा विधि 

भगवान विष्णु और गणेश  - Sakshi Samachar

सब जानते ही हैं कि अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान अनंत की पूजा की जाती है। इसमें व्रत का संकल्प लेकर अनंत सूत्र बांधा जाता है। माना जाता है कि इसको धारण करने से संकटों का नाश होता है।

भगवान कृष्ण की सलाह से पांडवों ने इसका पालन किया और सभी संकटों से मुक्त हुए। इसका पालन करने से और अनंत सूत्र बांधने से व्यक्ति की हर तरह के संकट से रक्षा होती है। साथ ही व्यक्ति का जीवन सुख समृद्धि से भर जाता है।

इस बार अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व 12 सितंबर को है।

अनंत चतुर्दशी व्रत से होते हैं ये लाभ

- दरिद्रता का नाश होता है

- दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य की समस्याओं से रक्षा होती है

- विशेष मनोकामनाएं पूरी होती हैं

- ग्रहों की बाधा से मुक्ति मिलती है

- अनंतसूत्र बांधने से यह रक्षा कवच की तरह काम करता है

कैसे किया जाता है अनंत चतुर्दशी का व्रत

- प्रातः काल स्नान करके व्रत का संकल्प लें

- इसके बाद कलश पर भगवान विष्णु की स्थापना करें

भगवान अनंत यानी विष्णु का अनंत रूप 

- उनके सामने चौदह गांठों से युक्त अनंतसूत्र रखें

- "ॐ अनन्ताय नमः" के मंत्र जप के साथ भगवान विष्णु और अनंतसूत्र की पूजा करें

- इसके बाद पुरुष इसको दाहिनी भुजा में और स्त्रियां बाईं भुजा में धारण करें

- व्रत कथा सुनें और सुनाएं

- संध्याकाल में भगवान विष्णु की पुनः पूजा करें

- शाम को बिना नमक के मीठी चीज़ का सेवन करे

अनंत चतुर्दशी को गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन भी होता है क्या है इसका महत्व?

- भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से चतुर्दशी तिथि तक भगवान गणेश की उपासना के लिए गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है।

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- श्री गणेश प्रतिमा की स्थापना चतुर्थी को की जाती है और विसर्जन चतुर्दशी को किया जाता है

- कुल मिलाकर ये नौ दिन गणेश नवरात्रि कहे जाते हैं

- माना जाता है कि प्रतिमा का विसर्जन करने से भगवान पुनः कैलाश पर्वत पर पहुंच जाते हैं

- स्थापना से ज्यादा विसर्जन की महिमा होती है. इस दिन अनंत शुभ फल प्राप्त किए जा सकते हैं

- कुछ विशेष उपाय करके इस दिन जीवन की मुश्किल से मुश्किल समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है

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