2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती है। गांधी जयंती को अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। आजादी के आंदोलन में महात्मा गांधी मुख्य भूमिका की वजह से जब भी आजादी की लड़ाई को याद किया जाता है तब सबसे पहले राष्ट्रपिता का नाम देखने को मिलता है। ऐसे महान नेता को अंग्रेजों ने अनेक बार जेल में डाला है।

जब महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत (1915) लौट आए तब उन्होंने अंग्रेजों की नाक में दम करना शुरू कर दिया। आजादी की लड़ाई में गांधी जी कई बार जेल गए और सालों तक जेल की काल कोठरी में बंद रहे। अंग्रेजों द्वारा दी गई यातनाओं के बावजूद गांधी अपने संकल्प से कभी भी पीछे नहीं हटे और जेल में भी दिन-रात भारत की आजादी के सपने देखते रहे। आइए हम आपको बताते हैं कि गांधी आखिर कितनी बार जेल गए और कितने साल किस जेल में रहे।

गांधी जी अफ्रीका से लौट आते ही साल 1917 में चंपारण में नील की खेती के अन्याय के खिलाफ लड़ रहे वहां के किसानों की लड़ाई लड़ने बिहार चले गए। चंपारण के किसान नेता राजकुमार शुक्ल ने गांधी से निवेदन किया था कि वो आए और अग्रेजों के अन्याय से उन्हें मुक्ति दिलाएं।

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गांधी के चंपारण जाते ही अंग्रेजी हुकूमत सख्ते में आ गई और उन्हें गिरफ्तार किया कर 2 महीने की सजा सुनाई गई। गांधी अगले दिन जब कोर्ट में पेश हुए,तो उनके समर्थन में हजारों किसानों की भीड़ ने कोर्ट को घेर लिया। गांधी के समर्थन में हजारों लोग सड़कों पर आ गये। इसके चलते अंग्रेजी हुकूमत घबरा गई और उन्हें कुछ ही दिनों में रिहा कर दी। यह गांधी की पहली जेल यात्रा थी।

इंडिया जर्नल में लेख लिखने पर हुई जेल

इसके बाद साल 1922 में गुजरात के साबरमति आश्रम के पास महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी इंडिया नामक एक जर्नल में अंग्रेज सरकार के खिलाफ एक लेख लिखने के कारण की गई थी। गांधी को इस जुर्म में 6 साल की सजा सुनाई गई, मगर 6 साल से पहले ही उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।

गांधी जी को 12 जनवरी 1924 को जेल से रिहा किया गया। चंपारण किसान आंदोलन के बाद गांधी का दूसरा बड़ा कदम था नमक सत्याग्रह। गांधी ने नमक कानून के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने नमक कानून को खत्म करने के लिए साबरमति आश्रम से डांडी यात्रा निकाली। डांडी के समुद्र तट पर पहुंचने के बाद गांधी ने अपने हाथों से नमक उठाकर उस काले कानून को भंग किया। गांधी के इस कदम से अंग्रेजी हुकूमत तिलमिला उठी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस गिरफ्तारी के बाद महात्मा गांधी को 8 महीने से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा था।

SC/ST तबकों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र का अधिकार

इसके बाद गांधी को जेल जाना-आना कोई नई बात नहीं रही। इसी क्रम में दूसरे गोलमेज कॉन्फ्रेंस से लौटने के बाद गांधी ने एक बार फिर से अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। महात्मा गांधी को 4 जनवरी 1932 को गिरफ्तार कर पुणे के येरवाड़ा जेल में डाल दिया गया। इस बीच, अंग्रेज सरकार ने एससी/एसटी तबकों के लोगों को अलग से निर्वाचन का अधिकार दे दिया।

गांधी जी अंग्रेज सरकार के इस फैसले से काफी निराश हुए और इसके खिलाफ उन्होंने जेल में ही आमरण अनशन शुरू कर दिया। गांधी जी के अनशन का ब्रिटिश शासकों पर बड़ा असर हुआ। इसके चलते अलग निवार्चन के फैसले को बदल दिया गया। इसके बाद उन्हें 8 मई 1933 को जेल से रिहा कर दिया गया। महात्मा गांधी को एक बार फिर उसी साल 1 अगस्त को दुबारा गिरफ्तार किया गया,लेकिन 23 अगस्त को उन्हें छोड़ दिया गया।

अंग्रेजों के अन्याय को बर्दाश्त करना गांधी जी के बस की बात नहीं थी। उन्होने साल 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ एक बार फिर आंदोलन छेड़ दिया। तब गांधी ने आंदोलन का नारा दिया, 'अंग्रेजों भारत छोड़ों'। गांधी ने एक प्रकार से ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़ने का अल्टीमेटम ही दे दिया।

युवाओं को दिया ‘करो या मरो’ का नारा

लोगों को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी 
लोगों को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी 

भारतीय युवाओं के जोश को गांधी ने 'करो या मरो' के परवान पर चढ़ा दिया था। देश का बच्चा-बच्चा 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' नारे को गीत की तरह गुन गुनाना लग गये। गांधी के इस आंदोलन को अंग्रेजों ने भांप लिया और एक बार फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पुणे के आगा खान पैलेस जेल में भेज दिया गया।

आजादी आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए अंग्रेजों ने गांधी को 6 मई 1944 को रिहा कर दिया। तब तक यह बात साफ हो चुकी थी अंग्रेज भारत में कुछ में दिनों के मेहमान है। इस तरह महात्मा गांधी को आजादी के आंदोलन के दौरान कई बार जेल जाना पड़ा। जेल में उन्हें अनेक प्रकार की यातनाएं दी गई। इस दौरान गांधी ने जेल में अनेक कैदियों की जिंदगियों को उजड़ते हुए करीब से देखा। इसीलिए गांधी जी कहते थे, “पाप से घृणा करो पापी से नहीं।”