आप जानते ही होंगे कि रविवार को विशेष रूप से सूर्य पूजा का विधान है। इस दिन कुछ लोग सूर्य की पूजा व अर्घ्य देने के साथ ही व्रत भी रखते हैं तो कुछ बगैर नमक का भोजन करते हैं।

वहीं प्राचीन परंपराओं में पंचदेव बताए गए हैं, जिनकी पूजा रोज करनी चाहिए। ये पंचदेव हैं, श्रीगणेश, शिवजी, विष्णुजी, देवी दुर्गा और सूर्य देव। सूर्यदेव एक मात्र साक्षात् दिखाई देने वाले देवता हैं। इसीलिए हर रोज सूर्य को अर्घ्य देने का अपना ही महत्व है।

हर सुबह सूर्य की पूजा करने से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।

जानें सूर्य पूजा से जुड़ी कुछ खास बातें ....

- सबसे पहले तो ये जान लें कि जो लोग सूर्य देव को जल चढ़ाते हैं, उन्हें सूर्योदय से पहले बिस्तर छोड़ देना चाहिए।

- घर से बाहर कहीं जाते समय भगवान सूर्य को प्रणाम जरूर करें। कहीं भी सूर्यदेव का मंदिर दिखाई दे तो शिखर दर्शन और प्रणाम करना चाहिए।

- बारिश के दिनों में बादलों की वजह से अगर सूर्य के दर्शन नहीं हो रहे हैं तो पूर्व दिशा की ओर मुंह करके सूर्यदेव का ध्यान करें और जल चढ़ाएं। सूर्यदेव की तस्वीर या मूर्ति के दर्शन करें।

- सूर्य को जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे का उपयोग करना चाहिए।

- सूर्य के लिए रविवार को गुड़ का दान करना चाहिए। जल चढ़ाते समय सूर्य मंत्र ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ भास्कराय नम: आदि मंत्रों का जाप करते रहना चाहिए।

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- जिन लोगों की कुंडली में सूर्य शुभ स्थिति में नहीं है, उन्हें सूर्य को रोज जल चढ़ाना चाहिए। इससे सूर्य के दोष दूर हो सकते हैं।

- सूर्य देव की कृपा से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठने और सूर्य को जल चढ़ाने से त्वचा की चमक बढ़ती है।

तो देखा आपने सूर्य को अर्घ्य देने के कितने लाभ हैं। देर किस बात की आप भी आज से ही सूर्य को अर्घ्य देना शुरू कर दीजिये।