हैदराबाद: एक बार धरती माता बहुत दुःखी हुई। कंस जैसे बहुत सारे असुरों ने धरती माँ को बहुत परेशान किया। धरती पर पाप बढ़ गया। पृथ्वी ने गऊ का रूप बनाया और आँखों में आंसू लिए ब्रह्मा के पास गई और कहा बेटा ब्रह्मा! मेरे ऊपर पाप बहुत बढ़ गया है और मैं पाप से दबी जा रही हूँ। पृथ्वी की बात सुनकर ब्रह्मा जी बहुत दुःखी हुए और भगवान विष्णु के पास क्षीर-सागर गए। ब्रह्मा जी के साथ सारे देवता और भगवान शिव भी थे। सभी देवों ने मिलकर भगवान विष्णु स्तुति की।

भगवान की आकाशवाणी सुनाई दी। ब्रह्मा बोले कि देवताओं, मुझे भगवान की आज्ञा हुई है कि मैं जल्दी ही धरती पर देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लूंगा और मेरे साथ श्री बलराम जी और राधा जी भी अवतार लेंगे और तुम सभी अपने-अपने अंशो से जाकर यादव कुल में अवतार धारण करो। सब देवताओ ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म

मथुरा के राजा थे उग्रसेन। उग्रसेन के छोटे भाई थे देवक। उग्रसेन के 5 बेटियां और 9 बेटे थे। देवक महाराज के चार पुत्र और सात बेटियां थी। जिनमें से अपनी 6 बेटियों की शादी सुरसेन के बेटे वसुदेव से कर चुके थे। अंत में देवकी की शादी भी वसुदेव से मंगल मुहर्त में कर दी गई। ये कंस की चचेरी बहन थी। देवता फूलों की बारिश कर रहे है।

मंगल गान गाया जा रहा है। महाराज ने बहुत सा सामान अपनी बेटी को दिया। जब विदा का समय आया तो रथ में देवकी और वसुदेव दोनों विराजमान है। सबकी आँखों में आंसू थे। कंस भी रो रहे थे। कंस को अपनी बहनों से ज्यादा देवकी से प्रेम था। क्योंकि घर में सबसे छोटी है।

कंस कहते हैं मैंने अपनी बहन को इतना प्यार दिया है तो क्या मैं इसके घर तक इसे नही छोड़ के आ सकता? कंस ने सारथि को उतार कर खुद घोड़ो की रास पकड़ ली और महलो की ओर चले। जब बीच राजपथ पर पहुंचे तो आकाशवाणी हुई। 'अरे कंस!, जिस बहन को तू इतना लाड़ प्यार से विदा कर रहा है इसी का आठवां पुत्र तेरा काल बनेगा।' जैसे ही कंस ने सुना तो म्यान से तलवार निकाल ली और देवकी को मारने लगा। जब वसुदेव ने देखा तो कहा-कंस, आकाशवाणी की आवाज मैंने भी सुनी है- देखो कंस! जिस दिन संसार में जीव पैदा होता है उसी दिन मौत भी निश्चित हो जाती है। अगर देवकी के बालको से तुम्हारी मृत्यु होने वाली होगी तो उसे कोई टाल नहीं सकता है।

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म

लेकिन एक बात मैं तुमसे कहना चाहता हूँ। तुम्हें अपनी बहन से डर नहीं है, इसके बालकों से है। तो मै आज प्रतिज्ञा करता हूँ, जितने भी देवकी के बालक होंगे सब लाकर तुम्हे दे दूंगा। वसुदेव ने अपने जीवन मे कभी झूठ नहीं बोला था इसलिए कंस को विश्वास हो गया। कंस ने देवकी और वसुदेव दोनों को बंधन से मुक्त कर दिया।

कुछ समय बाद देवकी के बेटा हुआ, नाम रखा कीर्तिमान। वचन के अनुसार वासुदेव ने बालक को लेकर कंस को दिया। कंस ने कहा कि मुझे इस बालक से डर नहीं है। आठवें बालक से है। तुम ले जाओ इसे। वसुदेव बालक को लेकर चले गए।

नारद ने सोचा कि अगर कंस जैसे पापी के मन में दया आ गई तो भगवान का अवतार कैसे होगा? अपनी वीणा लेके कंस के पास आये और बोले, नारायण नारायण, कंस! देवकी के बालकों का क्या हुआ? कंस ने कहा- अभी पहले पुत्र का जन्म हुआ है, मुझे आठवें बच्चे से डर है पहले से नहीं। तब नारद जी ने आठ दानों की माला लेकर कंस के हाथ में दी और कहा-दाने गिनो। कंस ने कहाँ इसमें आठ मनका(दाने) हैं। अब आप पहले मनके से नहीं, दूसरे से गिनती शुरू करो और पहले वाले को अंत मे गिनना। जब कंस ने गिना तो पहले वाला आठवें नंबर पर आया। फिर नारद बोले कि अब तीसरे मनके को पहले नंबर से गिनो और दूसरो को अंत मे गिनना। इस तरह से नारद ने प्रत्येक माला के मनके को आंठवा बना के दिखाया। कंस बोले कि आप क्या बच्चों वाला खेल खिला रहे हैं, मेरी समझ मे कुछ नहीं आ रहा है। नारद बोले कि कंस यही मैं समझा रहा हूँ जैसे इस माला का प्रत्येक दाना आठवां है वैसे ही हर बालक मे भगवान का वास है। (नारद जी कभी बच्चों को मारने कि शिक्षा नहीं देंगे) लेकिन कंस की बुद्धि जड़ है। हर बार उल्टा ही सोचती है। कंस के मन मे आया देवकी का हर बालक आठवां है और तेरा काल है। फिर नारद जी चले गए।

अब कंस ने उस बालक को मंगवाया और उसे मौत के घाट उतार दिया। इस तरह देवकी के 6 बालक हुए। कंस ने सभी को मरवा दिया और अब देवकी और वसुदेव को कारागार मे बंद करवा दिया। भगवान ने योग माया को सातवां बालक बनने की आज्ञा दी और कहा तुम देवकी के सातवे गर्भ का आकर्षण करो और रोहिणी जी के गर्भ में डाल दो और नन्द गाँव में जाओ

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म

और यशोदा के गर्भ से पुत्री बनकर जन्म लेना, तुम्हारी दुर्गा के रूप मे पूजा होगी। कोई तुम्हें दुर्गा कहेगा, कोई काली कहेगा कोई खपरवाली कहेगा, अनेक तुम्हारे नाम पड़ेंगे और कलिकाल में जो कोई तुम्हारी पूजा करेगा उसे मनोवांछित फल मिलेगा। योग माया ने सातवें बच्चे (बलराम) का आकर्षण किया और रोहिणी जी के गर्भ मे डाल दिया।

जब कंस को पता चला कि देवकी के सातवें पुत्र का गर्भ नष्ट हो गया है तो हंसने लगा और कहा कि चलो अच्छा हुआ मुझे मारना नहीं पड़ा, खुद ही गर्भ नष्ट हो गया। कंस को पता चला कि अब मेरा काल आने वाला है तो कारगर की ओर चतुरंगिणी सेना खड़ी कर दी। हाथी, घोड़े, पैदल और रथ। देवकी और वासुदेव के पैरों में बेड़ियाँ डाल दी।

यहाँ देवकी के गर्भ में भगवान आकर साक्षात् बिराजे। देवताओ ने भगवान को सत्य कहा और बड़ी सुंदर स्तुति की। अब बड़ा सुन्दर समय आया है। कृष्ण पक्ष, बुधवार है और चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश कर रहा है। आकाश में तारों का प्रकाश है। एकदम से बादल गरजने लगे और बिजली चमकने लगी। सरोवर के कमल के फूल खिल रहे है। अग्नि कुंडो में अग्नि प्रज्जवलित हो गई है। मंद मंद बारिश होने लगी है। अर्ध रात्रि का समय है। देवकी और वसुदेव के हाथ-पैरो की बेड़ियां खुल गई है और भगवान कृष्ण ने चतुर्भुज रूप से अवतार लिया है। देवकी और वसुदेव ने भगवान की स्तुति की है। देवकी ने कहा कि प्रभु आपका रूप दर्शनीय नही है, आप और बालकों की तरह छोटे से बन जाइये। भगवान छोटे से बाल कृष्ण बनके माँ की गोद में विराजमान हो गए। वहाँ पर सुन्दर टोकरी है। उसमें मखमल के गद्दे लगे हुए है।

भगवान की प्रेरणा हुई कि आप मुझे गोकुल में छोड़ आइये और वहाँ से कन्या को लेकर आ जाइये। वसुदेव चल दिए है। कारागार के द्वार अपने आप खुल गए और सभी सैनिक बेहोश हो गए। रास्ते मैं यमुना नदी आई है। वसुदेव जी यमुना पार कर रहे है लेकिन यमुना जी भगवान कृष्ण की पटरानी है। पैर छूना चाहती है लाला के। लेकिन ससुर जी लाला को टोकरी में लिए हुए है। यमुना ने अपना जल स्तर बढ़ाना शुरू किया। भगवान बोले अरी यमुना, ये क्या कर रही है? देख अगर मेरे बाबा को कुछ हुआ तो अच्छा नही होगा।

यमुना बोली कि आज तो आपके बाल रूप के दर्शन हुए हैं। तो क्या में आपके चरण स्पर्श न करूँ? तब भगवान ने अपने छोटे-छोटे कमल जैसे पाँव टोकरी से बाहर निकाले और यमुना जी ने उन्हें छुआ और आनंद प्राप्त किया। फिर यमुना का जल स्तर कम हो गया। लेकिन बारिश भी बहुत तेज थी। तभी शेषनाग भगवान टोकरी के ऊपर छत्र छाया की तरह आ गए। आज भगवान के दर्शन करने को सब लालायित है।

वसुदेव जी ने यमुना नदी पार की है और गोकुल में आ गए हैं। चलिए अब थोड़ा दर्शन नन्द बाबा और यशोदा मैया के नन्द गाँव का करते हैं। बात उस समय कि है जब माघ का महीना और मकर सक्रांति का दिन था। नन्द बाबा के छोटे भाई थे उपनन्द। इनके घर ब्राह्मण भोजन करने आये थे। उपनन्द ने ननद बाबा कहा कि आप सभी ब्राह्मणों को तिलक करें और दक्षिणा दें। तिलक करने के बाद सभी ब्राह्मणों ने एक साथ आशीर्वाद दिया था ब्रजराज आयुष्मान भवः, ब्रजराज धनवानभवः, ब्रजराज पुत्रवान भवः। नन्द बाबा बोले- ब्राह्मणों, आप हंसी क्यों करते हो? मैं 60 साल का हो गया हूँ और आप कहते हो पुत्रवान भवः। ब्राह्मण बोले कि हमारे मुख से आशीर्वाद निकल गया है कि आपके यहाँ बेटा ही होगा। आशीर्वाद देकर सभी ब्राह्मण वहां से चले गए। माघ मास एकम तिथि नन्द और यशोदा को सपने में कृष्ण का दर्शन हुआ और उस दिन यशोदा ने नन्द बाबा के द्वारा गर्भ धारण किया। सावन का महीना रक्षा बंधन का दिन आया। सभी ब्राह्मण नन्द बाबा के पास आये।

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म

नन्द बाबा ने सबके हाथो में मोली बाँधी और सबको दक्षिणा दी। फिर वही आशीर्वाद दिया। ब्रजराज धनवान भवः, आयुष्मान भवः, पुत्रवान भवः। नन्द बाबा को हंसी आ गई और बोले- आपका आशीर्वाद फलने तो लगा है लेकिन पुत्रवान की जगह पुत्रीवान हो गई तब क्या करोगे ब्राह्मण बोले कि हम ऐसे वैसे ब्राह्मण नही है, कर्मनिष्ठ है और धर्मनिष्ठ ब्राह्मण है। यदि आपके यहाँ लड़की भी हो गई तो उसे लड़का बना कर दिखा देंगे। तुम रक्षा मोली बाँध दो।

जब जाने लगे ब्राह्मण तो नन्द बाबा बोले कि आप ये बता दीजिये कि अभी लाला के जन्म में कितना समय बाकि है?

सभी ब्राह्मण एक साथ बोले कि आज से ठीक आठवे दिन रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में आपके यहाँ लाला का जन्म हो जायेगा। ब्राह्मण आशीर्वाद देकर चले गए।

नन्द बाबा ने आठ दिन पहले ही तैयारी कर दी। सारे गोकुल को दुल्हन की तरह सजा दिया गया। वो समय भी आ गया।

रात्रि के आठ बज गए। घर के नौकर चाकर सब नन्द बाबा के पास आये और बोले कि बाबा! नाम तो आज का ही लिया है न? हमें नींद आ रही है, आठ दिन से सेवा में लगे हैं, आप कहो तो सो जाये? नन्द बाबा ने बोला हाँ भैया, तुमने बहुत काम किया है आप सो जाओ। घर के नौकर चाकर सोने चले गए।

2 घंटे का समय और बीता। नन्द बाबा कि 2 बहन थी नंदा और सुनंदा। नन्द बाबा ने सुनंदा से कहा बहन, रात के 10 बज रहे है मुझे भी नींद आ रही हैं, तू कहे तो थोड़ी देर के लिए में भी सो जाऊँ? सुनंदा बोली कि हाँ भैया, तुम भी सो जाओ। मैं भाभी के पास हूँ। जब लाला का जन्म होगा तो आपको बता दूंगी। नन्द बाबा भी सो गए।

रात के 11 बजे सुनंदा को भी नींद आ गई। यशोदा के पास जाकर बोली भाभी! नाम तो आज का ही लिया है न कि आज ही जन्म होगा? अगर आप कहो तो थोड़ी देर के लिए में सो जाऊँ? बहुत थकी हुई हूँ। यशोदा ने कहा कि हाँ! आप सो जाइये। तो लाला कि बुआ सुनंदा भी 11 बजे सो गई।

अब प्रश्न उठता है कि सब लोग क्यों सो रहे है भगवान के जन्म के समय? क्योकि पहले आ रही है योग माया। माया का काम है सुलाना। लेकिन जब भगवान आते है तो माया वहाँ से चली जाती है और सबको जगा देते है।

जब 12 बजे का समय हुआ तो लाला की मैया भी सो गई। उसी समय वसुदेव जी आये और लड़की(देवी) को लेकर चले गए और लाला(कृष्ण) को यशोदा के बगल में लिटा दिया।

भगवान माँ के पलंग पर सोये हुए हैं। लेकिन जहाँ से आवाज आती है वहीँ से खर्राटे की आवाज आ रही है। माँ सो रही है, पिता सो रहे है, बुआ सो रही है, घर के नौकर-चाकर सभी सो रहे है। कितने भोले है ब्रजवासी इनको ये नहीं पता कि मैं पैदा हो गया हु। उठ कर नाचे गाये। क्या में मैया से कह दूँ कि मैया, मैं पैदा हो गया हूँ तू जाग जा? भगवान बोले नहीं नहीं, यहाँ बोला तो माँ डर जाएगी।

अब क्या करूं? भगवान ने सोचा कि थोड़ा सा रोऊँ जिससे माँ जाग जाएगी। लेकिन भगवान को रोना ही नहीं आता है। फिर भी बालकृष्ण ने एक्टिंग की है रोने की। लेकिन संसार के बालक की तरह नहीं रोये। भगवान जब रोने लगे तो ओम कि ध्वनि निकल गई। कृष्णं बन्दे जगतगुरू।

अब सबसे पहले लाला कि बुआ जाग गई। अरी बहन सुनंदा बधाई हो बधाई हो, लाला का जन्म भयो। दौड़कर नन्द बाबा के पास गई है और बोली कि लाला का जन्म हो गया है।

देखते ही देखते पूरा गाँव जाग गया। सभी और बधाई बाँटने लगी और सब भगवान कृष्ण के जन्म को उत्साहपूर्वक मनाने लगे। हर तरफ से आवाज आने लगी।

नन्द के आंनद भयो जय कन्हैया लाल की।

हाथी दीने घोडा दीने और दिनी पालकी।।

सोशल मीडिया से साभार