हम सब जानते ही हैं कि रक्षाबंधन का त्योहार आ रहा है। इस साल रक्षाबंधन का त्योहार और स्वतंत्रता दिवस साथ ही मनाए जाएंगे। जी हां, 15 अगस्त को ही रक्षाबंधन है। तो इससे जुड़ी तैयारियां भी शुरू हो गई है।

बहनें जहां अपने भाइयों के लिए राखियां खरीदने में बिजी हैं तो वहीं भाई अपनी बहनों के लिए खास गिफ्ट की खरीदारी में व्यस्त हैं।

इस सबके बीच भाई-बहन को कुछ बातें जाननी चाहिए। जैसे कि बहनों को सबसे पहले रक्षाबंधन के दिन राखी की पूजा करनी चाहिए फिर उसके बाद ही भाई को राखी बांधनी चाहिए। साथ ही रक्षाबंधन के भी कुछ नियम है जिनपर अमल करना जरूरी होता है।

तो आइये यहां जानते हैं कि रक्षाबंधन पर क्या करें ...

- इस दिन बहन को सबसे पहले ब्रह्ममुहूर्त में उठना चाहिए। इसके बाद साफ वस्त्र धारण करना चाहिए।

- अपने ईष्टदेव की पूजा करके राखी की भी पूजा करनी चाहिए। सबसे पहले ईष्टदेव को राखी बांधे।

राखी बांधती बहन 
राखी बांधती बहन 

- अपने घर के पितरों को याद करें, फोटो है तो उसे राखी चढ़ा दें। बड़ों का आशीर्वाद लें।

- राखी में केसर, चंदन, अक्षत और दूर्वा रखकर राखी की पूजा की जाती है।

-राखी की पूजा के बाद भाई का तिलक किया जाता है। तिलक कुमकुम से ही करें। तिलक पर अक्षत लगाएं।

- इसके बाद अपने भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधे।

- राखी बांधने के बाद भाई का मुंह भी मीठा अवश्य कराएं। फिर उसकी आरती उतारें।

- भाई को अपनी बहन के पैर छूकर उसका आर्शीवाद लेना चाहिए।

राखी पर गलती से भी ये न करें ...

- रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन को नाराज न करें और न ही किसी अन्य स्त्री का अपमान करें।

- रक्षाबंधन के दिन बहनों को अपने भाई को राखी बांधने से पहले कुछ भी ग्रहण नहीं करना चाहिए।

रक्षाबंधन पर भाई को तिलक लगाती बहन
रक्षाबंधन पर भाई को तिलक लगाती बहन

- रक्षाबंधन के दिन किसी भी प्रकार से मांस या मदिरा का सेवन न करें।

- रक्षाबंधन के दिन किसी भी प्रकार से अपनी बहन से झूठ न बोलें।

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- रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन को राखी के लिए इंतजार न कराएं।

- रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन को गुस्सा न करें। अगर आपकी बहन से कोई गलती भी हो जाए तो उसे क्षमा कर दें।

- रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन को उनकी पसंद का गिफ्ट देना न भूलें।

- रक्षाबंधन पर अपनी बहन के पैर छूकर उनका आर्शीवाद लेना न भूलें और बहन भी अपने से बड़ों का आर्शीवाद लेना न भूलें।

- रक्षाबंधन के दिन बहन और भाई दोनों को अपने ईष्ट का आर्शीवाद अवश्य लेना चाहिए।