सावन का महीना अब समाप्त होने को है और यह सोमवार सावन का अंतिम सोमवार है। इस बार सावन में चार सोमवार आए। पहला और दूसरा सावन सोमवार विशेष योग के साथ आया तो तीसरे सावन सोमवार पर नागपंचमी का विशेष योग बना।

वहीं सावन के चौथे सोमवार को त्रयोदशी तिथि है यानी इस दिन सोम प्रदोष व्रत भी है जिससे इसका महत्व बढ़ जाता है। भगवान शिव को प्रदोष व्रत अत्यंत प्रिय है तो आप सावन सोमवार की व्रत पूजा के साथ ही सोम प्रदोष का व्रत रखके उसकी पूजा भी कर सकते हैं।

सुबह सवेरे भगवान शिव की सावन सोमवार के उपलक्ष्य में पूजा कर लें और सोम प्रदोष की पूजा शाम में करें। कहते हैं इस दिन शिव-पार्वती साथ में पृथ्वी पर विचरण करते हैं। इस दिन रुद्राभिषेक करने से सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं।

भगवान शिव
भगवान शिव

सावन का चौथा और अंतिम सोमवार श्रद्धालुओं को आर्थिक परेशानियों से छुटकारा दिलाने वाला होता है। इस दिन भक्तिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है।

पौराणिक मान्यताओं में भगवान शंकर की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन महाशिवरात्रि, उसके बाद सावन के महीने में आने वाला प्रत्येक सोमवार का महत्व है।

कार्यक्षेत्र और जीवन के दूसरे क्षेत्रों में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है। दांपत्य जीवन में आपसी प्रेम और सहयोग बढ़ता है। साथ ही आर्थिक परेशानियों में कमी आती है और जीवन पर आने वाले संकट से भगवान शिव रक्षा करते हैं।

सावन के अंतिम सोमवार के मौके पर देशभर के शिवालयों में रुद्राभिषेक के विशेष आयोजन किए जाते हैं।

ऐसे करें पूजन-

प्रात: और सायंकाल स्नान के बाद शिव परिवार की पूजा करें। पूर्वमुखी या उत्तर दिशा की ओर मुख करके, आसन पर बैठकर एक ओर पंचामृत अर्थात दूध, दही, घी, शक्कर एवं गंगाजल रख लें। शिव परिवार को पंचामृत से स्नान करवाएं। फिर चन्दन, फूल, फल, सुगंध, रोली और वस्त्र अदि अर्पित करें।

शिवलिंग पर सफेद पुष्प, बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न चढायें। गणेशजी को दूर्वा यानि हरी घास, लड्डू या मोदक, एवं पीले वस्त्र अर्पित करें।

सावन सोमवार पूजा 
सावन सोमवार पूजा 

भगवान शिव की आरती या शिव चालीसा पढ़ें। गणेश जी की आरती धूप दीप से करें। शिव परिवार से अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए हाथ जोडकर मन से प्रार्थना करें।

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महादेव की स्तुति दिन में दो बार की जाती है। सूर्योदय पर, फिर सूर्यास्त के बाद। पूजा के दौरान 16 सोमवार की व्रत कथा और सावन व्रत कथा सुनाई जाती है।

पूजा का समापन प्रसाद वितरण से किया जाता है। शिव मन्त्र का जाप अत्यंत उपयोगी माना गया है अन्यथा आप साधारण एवं सर्वप्रिय पंचाक्षरी मन्त्र ऊॅ नम : शिवाय और गणेश मन्त्र ऊॅ गं गणपतये नम: का जाप करते हुए सामग्री चढ़ा सकते हैं।