राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 8 अगस्त 1942 को 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' आंदोलन की शुरुआत की थी। इस आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला कर रख दी। इस बार 'भारत छोड़ो आंदोलन' की 76वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। आइए जानते हैं आंदोलन से जुड़ी कुछ अहम और खास बातें।

महात्मा गांधी ने 1942 में ब्रिटिश शासन की समाप्ति का आह्वान करते हुए 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू किया था। मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में गांधीजी ने भाषण के दौरान ‘करो या मरो' का नारा दिया था। यह आंदोलन इतिहास में 'अगस्त क्रांति आंदोलन' के नाम से भी जाना जाता है।

तीसरा बड़ा आंदोलन

इतिहासकार बताते हैं कि क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपना तीसरा बड़ा आंदोलन छेड़ने का फैसला किया था। 8 अगस्त 1942 को बम्बई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के बम्बई सत्र में आंदोलन को 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' का नाम दिया गया था। आंदोलन के शुरुआत में ही महात्मा गांधी गिरफ्तार कर लिया गया था।

रणनीति के तहत शुरू किया आंदोलन

साल 1942 में इंग्लैंड द्वितीय विश्व युद्ध में उलझा हुआ था, तभी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 'दिल्ली चलो' का नारा देकर आजाद हिंद फौज को कूच करने का आदेश दिया। मौका भांपते ही महात्मा गांधी ने बम्बई में कांग्रेस की एक रैली के दौरान 'अंग्रेज भारत छोड़ो' आंदोलन का बिगुल फूंक दिया। यह आंदोलन 'करो या मरो' की तर्ज पर चलाया जा रहा था।

यह भी पढ़ें :

भारत छोड़ो आंदोलन : महात्मा गांधी का वो आंदोलन जिसने अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया था

आंदोलन के लिए गई थी सैकड़ों जानें

इस आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने हिंसा का सहारा लिया, जिसमें सैकड़ों जाने गईं। करीब 940 लोग मारे गए थे। वहीं 1630 घायल भी हुए थे। 60 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी भी दी। अंग्रेजी हुकूमत के दस्तावेजों के मुताबिक अगस्त 1942 से दिसंबर 1942 तक पुलिस और सेना ने प्रदर्शनकारियों पर 538 बार गोलियां चलाईं।