हैदराबाद : भारतीय इतिहास में 08 अगस्‍त का दिन आजादी की अंतिम लड़ाई के शंखनाद के रूप में याद किया जाता है। इस दिन को हर साल देश में अगस्‍त क्रान्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन स्‍वाधीनता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। साथ ही बापू की दी हुई शिक्षाओं को याद किया जाता है जिसे फिलहाल के वर्षों में देश भुलाता जा रहा है।

08 अगस्‍त को राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी द्वारा चलाए गए भारत छोड़ो आंदोलन की नींव इसी दिन रखी गई थी। जिसके बाद सारा भारत अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट हो गया और ब्रिटिश हुकूमत को घुटने टेकने पड़े।

इस आंदोलन में पूरा देश शामिल हुआ था और ग्वालिया टैंक मैदान में दिए गए गांधी जी के भाषण का बिजली का सा असर हुआ था। गोवालिया टैंक मैदान में जो भाषण दिया था उसमें उन्होंने आमजन से कहा था कि मैं आपको एक मंत्र देना चाहता हूं जिसे आप अपने दिल में उतार लें, यह मंत्र है, करो या मरो'।

दूसरे विश्‍वयुद्ध में भारत से सहायता लेने के बाद भी जब अंग्रेजों ने भारत को आजाद करने का अपना वादा नहीं निभाया तो गांधी जी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत की। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस समिति ने 08 अगस्‍त को बम्‍बई सत्र में इस आंदोलन का प्रस्‍ताव पारित किया गया।

'भारत छोड़ो' प्रस्ताव एक ऐसा प्रस्ताव था जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक विशिष्‍ट मोड़ दिया, इस प्रस्ताव ने तो जैसे सारा राजनीतिक माहौल ही बदल डाला। सारे देश में एक अभूतपूर्व उत्साह की लहर दौड़ गई। लेकिन उस उत्साह को राष्‍ट्रीय विस्फोट में बदल दिया उस रात राष्‍ट्र के प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी ने। तत्कालीन गोरी सरकार के इस कदम की जो तीव्र प्रतिक्रियाएँ हुई, वह सचमुच अभूतपूर्व थी। गांधी जी को पुणे की आगा खां पैलेस में कैद कर लिया गया और लगभग सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

ऐसे में युवा नेत्री अरुणा आसिफ अली ने 09 अगस्‍त को मुम्‍बई के ग्‍वालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराकर भारत छोड़ो आंदोलन का शंखनाद किया। हालांकि, गांधीजी ने अहिंसक रूप से आंदोलन चलाने का आह्वान किया था लेकिन फिर भी देश में कई जगहों पर आंदोलन के चलते तोड़-फोड़ और हिंसा हुई।

द्वितीय विश्‍व युद्ध से अंग्रेजों की पहले ही कमर टूट चुकी थी और इस आंदोलन में अंग्रेजी हुकूमत के ताबूत में आखिरी कील का काम किया। यह एक ऐसा व्यापक आंदोलन था, जिसने अंग्रेजी शासन को हिला दिया और आखिरकार 15 अगस्त, 1947 को भारत को आजाद करना पड़ा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस आंदोलन में 940 लोग मारे गए थे, जबकि 60229 लोगों ने गिरफ्तारियां दी थीं। बताया जाता है कि महात्‍मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपने भाषणों में कहा था कि अगर हिंदू और मुसलमान मिलकर रहेंगे तो हम आजादी हासिल कर के रहेंगे।

भारत छोड़ो आंदोलन' मूल रूप से एक जनांदोलन बन गया था, जिसमें भारत के हर जाति-वर्ग के लोग ने भाग लिया था। खास बात ये है कि इस आंदोलन में युवाओं की बड़ी भागेदारी थी। यहां तक की छात्रों ने स्कूल और कॉलेज छोड़ दिए थे और आंदोलन में शामिल हो गए थे। हालांकि उनमें से कइयों को जेल भी जाना पड़ा था।