हैदराबाद : हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। यह दिवस पूरी दुनिया में बीते 30 सालों से मनाया जा रहा है। दुनियाभर में बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए इस दिवस को मनाया जाता है। इस दिन लोगों को परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, मानवाधिकार और मातृत्व स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी जाती है।

विश्व जनसंख्या दिवस के दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता है जिनमें जनसंख्या वृद्धि की वजह से होने वाले खतरे के प्रति लोगों को आगाह किया जाता है।

विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 11 जुलाई 1989 को इस दिवस की शुरूआत की थी। तब पूरी दुनिया की जनसंख्या लगभग पांच अरब थी। इस बढ़ती जनसंख्या पर ध्यान दिलाने के लिए 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस की घोषणा की गई। तब विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।

बढ़ती जनसंख्या के कारण

विश्व जनसंख्या दिवस के दिन बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगाने के प्रति लोगों को जागरुक किया जाता है। पिछले साल विश्व जनसंख्या दिवस की थीम परिवार नियोजन थी। तेजी से जनसंख्या की वृद्धि कई वजहों से समाज और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। गैरकानूनी होते हुई भी देश के कई पिछड़े इलाकों में आज बाल विवाह की परंपरा है। इसकी वजह से कम उम्र में ही महिलाएं मां बन जाती हैं। जो कि बच्चे और मां दोनों के स्वास्थ्य के लिए घातक है।

रूढ़िवादी समाज में आज भी लड़के की चाह में पुरुष, परिवार नियोजन अपनाने को तैयार नहीं होते। कई बार महिलाओं पर लड़का पैदा करने का दबाव ज्यादा होता है और इसकी वजह से कई महिलाओं को मार भी दिया जाता है।

इसके अलावा, लड़कियों को शादी से पहले गर्भ निरोधक के उपाय संबंधित जानकारी नहीं दी जाती है। दरअसल, जनसंख्या बढ़ने की कई वजहों में गरीबी और अशिक्षा भी है। अशिक्षा की वजह से लोग परिवार नियोजन के महत्व को नहीं समझते और मातृत्व स्वास्थ्य एवं लैंगिक समानता के महत्व को कमतर आंकते हैं। जनसंख्या बढ़ने से बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ती है।

इससे जुड़े महत्वपूर्ण और दिलचस्प तथ्य-

- चीन और भारत दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश हैं। इन दोनों देशों में पूरी दुनिया की आबादी के तीस फीसदी से भी ज्यादा (करीब 35.6) लोग रहते हैं।

- आज के दौर में सबसे तेज गति से जनसंख्या वृद्धि करने वाला देश नाइजीरिया है। जनसंख्या के मामले में नाइजीरिया भले ही अभी 7वें नंबर पर हो, लेकिन 2050 से पहले यह अमेरिका को पीछे छोड़ कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है।

- साल 2010 से 2015 के बीच दुनिया की 46 फीसदी आबादी 83 देशों में रही, जहां प्रजनन स्तर 2.1 की सीमा से नीचे था।

- दुनियाभर में बुजुर्गों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। 1950 में बुजुर्गों से कहीं ज्यादा संख्या में युवा थे। साल 2017 में कम युवा और अधिक बुजुर्ग लोग हैं। 2050 तक संख्याएं भी ज्यादा हो जाएंगी।