तेलंगाना में हर साल की तरह इस साल भी बोनालु त्यौहार बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा है। गोलकोंडा किले में एल्लम्मा जगदंबिका माता के मंदिर में गुरुवार को बोनालु उत्सव आरंभ हुआ। 11 और 18 जुलाई (गुरुवार) को विशेष पूजा होगी।

हैदराबाद शहर के लाल दरवाजा मंदिर में पिछले 111 सालों से बोनालु त्यौहार मनाया जा रहा है। जब से तेलंगाना राज्य का गठन हुआ है तब से बोनालु को राज्य के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसके लिए पर्याप्त धन भी सरकार जारी करते आ रही है। इस साल भी आवश्यक धन राशि जारी की है।

बोनालु या देवी महाकाली बोनालू एक हिंदू त्योहार है। बोनालु त्यौहार के अवसर पर देवी महाकाली की पूजा की जाती है।

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हैदराबाद लाल दरवाजा बोनालु उत्सव में बहुत कुछ खास

बोनालु शोभायात्रा में भक्त (फाइल फोटो)
बोनालु शोभायात्रा में भक्त (फाइल फोटो)

बोनालु तेलंगाना का वार्षिक त्यौहार है। बोनालु त्यौहार हैदराबाद, सिकंदराबाद और तेलंगाना के अलावा भारत के कई अन्य क्षेत्रों में भव्य रूप से मनाया जाता है। यह त्यौहार आषाढ़ महीने में यानी जुलाई और अगस्त माह में मनाया जाता है। त्यौहार के पहले और अंतिम दिन येलम्मा देवी की विशेष पूजा की जाती है।

बोनालु ले जाती महिलाएं (फाइल फोटो)
बोनालु ले जाती महिलाएं (फाइल फोटो)

बोनालु उत्सव तेलंगाना के अनेक प्रसिद्ध त्योहारों में एक है। बोनालु हर साल आषाढ़ माह में मनाया जाता है। अब सवाल उठता है कि बोनालु उत्सव को आषाढ़ माह में क्यों मनाया जाता है? क्योंकि आषाढ़ माह में संक्रमण बीमारियां फैलती है। बीमारी का मुख्य कारण मांसाहार है।

बीमारी रोकथाम

मांसाहार के कारण कालरा, प्लेग, चेचक, टीबी जैसी अनेक बीमारियां फैलती है। वैसे तो अधिकतर तेलंगाना के लोगों का प्रिय आहार मांसाहार होता है। संक्रमण बीमारियों की प्रकोप से बचने के लिए तेलंगाना के ग्रामीण लोग माता से गुहार लगाते है। सभी को सुख शांति बहाल करने के लिए माता को बोनालु अर्पित करते है।

महांकाली मंदिर (फाइल फोटो)
महांकाली मंदिर (फाइल फोटो)

बोनालु की यह है प्रथा

बोनालु में हल्दी का पानी, नीम के पत्ते और एक नये मटके में बोनम ले जाकर माता की मंदिर की प्रदक्षणा करते हैं। बोनम का अर्थ है ग्रामीण रूप ही बोनम है। बोनालु के समय बकरी और मुर्गी की भी बलि देते है। तेलंगाना यह बात भी प्रचलित है कि बोनालु बाद गांवों में एक माह तक मांसाहार खाना बंद कर देते है।

गोलकोंडा में भक्तों की भीड़ (फाइल फोटो)
गोलकोंडा में भक्तों की भीड़ (फाइल फोटो)

माता के नाम अनेक

तेलंगाना में मुख्य रूप से हैदराबाद में माता को पेद्दम्मा, पोचम्मा, मैसम्मा, गंडिमैसम्मा, नल्लापोचम्मा, एल्लम्मा, पोलेरम्मा, महांकालम्मा आदि नामों से जाना जाता है। लोग माता से प्रार्थना करते है कि संक्रमण बीमारियों से उनके परिवार और गांव को बचाये। साथ ही अच्छी फसल, हर घर में खुशहाली के लिए भी प्रार्थना करते है।

गोलकोंडा मंदिर (फाइल फोटो)
गोलकोंडा मंदिर (फाइल फोटो)

शोभा यात्रा

बोनालु को अर्पित करने के दौरान बड़ी शोभायात्रा निकाली जाती है। इस शोभा यात्रा में पोतराजू की एक अलग पहचान होती है। तेलंगाना ही नहीं देश के अनेक भागों में बोनालु मनाया जाता है, मगर उनके नाम और पद्धति अलग होती है।

बलकमपेट मंदिर में बोनम अर्पित करती हुए मुख्यमंत्री केसीआर की पत्नी शोभा (फाइल फोटो)
बलकमपेट मंदिर में बोनम अर्पित करती हुए मुख्यमंत्री केसीआर की पत्नी शोभा (फाइल फोटो)

भक्तों भीड़

गोलकोंडा में आयोजित बोनालु उत्सव में 1.5 लाख भक्तों ने बोनालु अर्पित किया है। महांकाली मंदिर में आयोजित बोनालू में 3 लाख भक्त बोनालु अर्पित करने का अनुमान है। सरकार ने भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यापक व्यवस्था की है।

बोनालु का समापन

हैदराबाद में सबसे पहले गोलकोंडा के श्री जगदंबिका मंदिर में बोनालु अर्पित किया जाता है। इसके बाद सिकंदराबाद के उज्जैनी महांकाली मंदिर में और इसके पश्चात लाल दरवाजा के माता के मंदिर में बोनालु अर्पित किया जाता है। इसके बाद ही अन्य जगहों पर बोनालु अर्पित किया जाता है। अंतिम बोनालु भी गोलकोंडा के जगदंबिका मंदिर को अर्पित करने के बाद बोनालु उत्सव समाप्त हो जाता है।

माता देवी से मिलाने का रास्ता

पंडितों का कहना है कि बोनालु को जीवात्मा से भगवान को मिलाने का एक मार्ग है। वैज्ञानिक की नजर से देखा जाएं तो नीम के पत्ते और हल्दी जब जमीन और आसमान में मिलते है तो सुक्ष्मजीव मर जाते है। साथ ही मौसम में कीटनाशक को मिटाने का काम करता है। इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि बोनालु उत्सव सभी लोगों में भाईचारा और एक मंच पर ले आने का संदेश देती है।

सरकार का प्रोत्साहन

तेलंगाना गठन के बाद से तो बोनालु उत्सव में चार चांद लग गये हैं। साल 2017 तेलंगाना सरकार ने बोनालु उत्सव के लिए दस करोड़ रुपये जारी किये थे। साल 2018 इसे बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये जारी किया है। सरकार ने इस साल भी बोनालु त्यौहार को बड़े पैमाने पर मनाने के लिए मंदिर के प्रमुखों से आवेदन करने का समय दिया है। ताकि मंदिरों में बोनालु उत्सव भव्य रूप से मनाया जाएं।

रंगम

बोनालु के अगले दिन रंगम होता है। इस रंगम यानी भविष्यवाणी की ओर भक्त की ही नहीं सरकार की भी नजर होती है। क्योंकि रंगम के दौरान जो भविष्यवाणी की जाती है तो वो लोगों को आने वाले संकटों के प्रति आगाह और चेतावनी होती है। कहा जाता है कि अनेक बार रंगम की भविष्यवाणी सच साबित हुई है। इसके अच्छे और बुरे परिणाम देखने को मिले हैं।

तेलंगाना भवन में बोनालु

देश की राजधानी दिल्ली के तेलंगाना भवन में मंगलवार को बोनालु त्यौहार आरंभ हुआ। जिसका इसका उद्घाटन सांसद के केशव राव ने किया। दिल्ली में बोनालु का समापन गुरुवार होगा। तेलंगाना भवन में लाल दरवाजा बोनालु उत्सव के 111 साल बोनालु उत्‌सव की फोटो प्रदर्शनी रखी गई है। जिसे देखने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है।