गुरुवार यानि ब्रहस्पतिवार को विष्णु भगवान एवं बृहस्पति देव दोनों की पूजा होती है जिससे घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। वहीं अविवाहित लड़के-लड़कियों को भी विवाह संबंधी रुकावटें दूर करने के लिए इस दिन व्रत व भगवान विष्णु की उपासना करने के लिए कहा जाता है।

गुरुवार के व्रत से जहां आपका गुरु ग्रह मजबूत होता है वहीं आपके घर सुख-संपत्ति भी आती है। यह भी कहा जाता है कि 16 गुरुवार व्रत करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है और व्रत पूरे करके 17वें गुरुवार को इस व्रत का उद्द्यापन करना चाहिए।

जानें गुरुवार व्रत की विधि ...

व्रत की विधि के लिए आपको बहुत ही कम सामग्री चाहिए होगी जैसे की चने की दाल, गुड़, हल्दी, थोड़े से केले, एक उपला हवन करने के लिए और भगवान विष्णु की फोटो और अगर केले का पेड़ हो तो बहुत ही अच्छा है।

व्रत वाले दिन सुबह उठकर स्नान आदि कार्यों से निवृत्त होकर सबसे पहले आप भगवान के आगे बैठ जाइये, और भगवान की फोटो को साफ करिए चावल एवं पीले फूल लेकर 16 गुरुवार व्रत करने का संकल्प करिए एवं उन्हें छोटा पीला वस्त्र अर्पण करिए।

भगवान विष्णु व बृहस्पति 
भगवान विष्णु व बृहस्पति 

अगर केले के पेड़ के सामने पूजा कर रहें हैं तो भी छोटा पीला कपड़ा चढ़ाइए। आप अपने घर के मंदिर में ही व्रत की विधि कर सकते हैं। एक लोटे में जल रख लीजिये उसमे थोड़ी हल्दी डालकर विष्णु भगवान या केले के पेड़ की जड़ को स्नान कराइए।

अब उसी लोटे में गुड़ एवं चने की दाल डाल के रख लीजिये और अगर आप केले के पेड़ की पूजा कर रहें हैं तो उसी पे चढ़ा दीजिये।

तिलक करिए भगवन का हल्दी या चन्दन से, पीला चावल जरुर चढ़ाएं, घी का दीपक जलाये, कथा पढ़िए। कथा के बाद उपले पे हवन करिए, गाय के उपले को गर्म करके उसपे घी डालिए और जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हो जाये उसमें हवन सामग्री के साथ गुड़ एवं चने की भी आहुति देनी होती है, 5 7 या 11 ॐ गुं गुरुवे नमः मन्त्र के साथ, हवन के बाद आरती कर लीजिये।

भगवान विष्णु की पूजा 
भगवान विष्णु की पूजा 

अंत में क्षमा प्रार्थना करिए, पूजा पूरी होने के बाद आपके लोटे में जो पानी है उसे अपने घर के आस पास के केले के पेड़ पर चढ़ा दीजिये।

इस दिन आप केले के पेड़ की पूजा करते हैं इसलिए गलती से भी केला न खाएं। आप इसे केवल पूजा में चढ़ा सकते हैं एवं प्रसाद में बांट सकते हैं, अगर कोई गाय मिले तो उसे चने की दाल और गुड़ जरुर खिलाएं।

गुरुवार को क्या न करें ...

- बालों में तेल नहीं लगाना चाहिए।

- बालों को धोना नहीं चाहिए।

- बाल कटवाने नहीं चाहिए।

- घर में पोंछा नहीं लगाना चाहिए।

- कपडे धोबी को नहीं देने चाहिए।

- पीला या मीठा खा सकते हैं।

- चने की दाल की पूड़ी या पराठा एक समय खा सकते हैं।

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गुरुवार की पूजा में रखें इन बातों का ख्याल ...

- गुरुवार व्रत किसी माह के शुक्ल पक्ष में गुरुवार व अनुराधा के योग से शुरू करना चाहिए।

- व्रत नियमों में सूर्योदय से पहले जाग स्नान कर पीले वस्त्र पहनें।

- इस दिन केले के वृक्ष या इष्ट देव के समीप बैठ पूजा करें।

- गुरु और बृहस्पति प्रतिमा को पीली पूजा सामग्री जैसे पीले फूल, पीला चंदन, चने की दाल, गुड़, सोना, वस्त्र चढ़ाएं। पीली गाय के घी से दीप पूजा करें। पीली वस्तुओं का दान करें। कथा सुनें।

- यथाशक्ति ब्राह्मणों को भोजन व दान दें।

- हर दरिद्रता व संकट टालने ही नहीं सपंन्नता को बनाए रखने के लिए भी यह व्रत करना चाहिए।