मेहदी हसन की बरसी : मोहब्बत करने वाले कम न होंगे, तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे

गजल गायक मेहदी हसन ( फाइल फोटो)  - Sakshi Samachar

हैदराबाद : भारत में जन्मे पाकिस्तान के मशहूर गजल गायक मेहदी हसन का आज 7वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन साल 2012 में बीमारी से लड़ते हुए मेहदी हसन का निधन हो गया था। उनका जन्म राजस्थान के झुंझुनूं जिले के लूणा गांव में 18 जुलाई 1927 को हुआ था।

ताउम्र मेहंदी हसन पाकिस्तान में रहे, मौत के बाद भी वहीं दफन हुए। ले‍किन उनके पुरखे आज भी हिन्दुस्तान की मिट्टी में दफन हैं। भले ही सियासत की वजह से हिन्दुस्तान के दो टुकड़े हो गए, लेकिन मेहंदी हसन के चाहने वालों के दिल में उनके लिए कभी बंटवारा नहीं हुआ। निधन से पहले जब उनकी तबियत खराब हुई थी तब दोनों मुल्कों में दुआ के लिए एकसाथ हाथ उठे थे।

मेहंदी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनसे पहले उनकी 15 पीढ़ियां संगीत से जुड़ी थीं। उनके घराने का नाम था कलावंत। मेहंदी हसन ने संगीत की शुरुआती शिक्षा अपने पिता अजीम खान और चाचा इस्माइल खान से ली। दोनों ही ध्रुपद के जानकार थे।

महज 20 साल की उम्र में 1947 के विभाजन के दौरान वे पाकिस्तान चले गए थे और परिवार के पालन के लिए उन्होंने मेकेनिक के रूप में भी काम किया था। मोटर मेकैनिक भी बने लेकिन संगीत हमेशा दिल में रहा।

पाकिस्तान चले अजाने के 10 साल बाद 1957 में रेडियो पाकिस्तान पर ठुमरी गाकर उन्होंने अपने संगीत के करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मशहूर गायिका लता मंगेशकर मेहंदी हसन की मुरीद थीं। लता मंगेशकर ने उनके बारे में एक बार कहा था, "ऐसा लगता है कि मेहंदी हसन साहब के गले में भगवान बोलते हैं।" उम्र भर गायकी से लाखों दिलों को जीतते रहे मेहदी को जिंदगी के आखिरी दिनों में गंभीर फेफड़ों की बीमारी के चलते गाना छोड़ना पड़ गया था।

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उनकी मशहूर गजलें :

1. दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं। हम ने सुना था इस बस्ती में दिल वाले भी रहते हैं।

2, मोहब्बत करने वाले कम न होंगे, तेरी महफिल में लेकिन हम न होंगे।

3. रंजिशें ही सहीं।

4. अबकी हम बिछड़े तो

5. दिल ए नादान तुझे हुआ क्या

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