हर माह की शुक्ल और कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत किया जाता है। यह व्रत भगवान शिव के लिए रखा जाता है और माना जाता है कि शिव की कृपा पाने का यह सबसे बड़ा दिन और सबसे बड़ा व्रत होता है। इस व्रत को करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और शिवशंकर की कृपा प्राप्त होती है।

ऐसे करें भगवान शिव की पूजा ....

जहां अधिकतर पूजा का समय सुबह-सवेरे होता है वहीं प्रदोष जैसे कि नाम से ही पता चल जाता है, सूर्यास्त से एक घंटा पहले का समय होता है तो यह पूजा शाम में की जाती है। व्रत करने वाले शाम को स्नान करके सफेद वस्त्र धारण करके भगवान शिव की पूजा करते हैं। पूजा व आरती के बाद फल व नैवेद्य का भोग लगाते हैं। फिर स्वयं वही फल ग्रहण करते हैं।

प्रदोष व्रत करने से होते हैं ये लाभ ...

हम सब जानते ही हैं कि भगवान शंकर अपने भक्तों से जल्दी प्रसन्न होते हैं और प्रदोष करने वालों को तो उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। उनके सारे कष्ट दूर होते हैं। रोगों से छुटकारा मिलता है। अविवाहित के प्रदोष व्रत करने से उनका विवाह शीघ्र हो जाता है। आर्थिक तंगी दूर करने के लिए भी यह व्रत किया जाता है।

फाइल फोटो 
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शुक्र प्रदोष की व्रत कथा ...

कहा ही जाता है कि शुक्र अस्त हो तो न विवाह होता है और न ही गौना क्योंकि इससे शु्क्र दोष लगता है पर अगर ऐसा हो भी तो भगवान शंकर का शुक्र प्रदोष व्रत करने से सारे दोष दूर हो जाते हैं। इसीसे जुड़ी यह कथा है जो शुक्र प्रदोष का महत्व दर्शाती है। प्रदोष व्रत करके यह कथा भी इस दिन सुनी जाती है।

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कथा इस प्रकार है ....

एक गांव में तीन मित्र रहते थे। राजकुमार, ब्राह्मण और तीसरा धनिक। राजकुमार और ब्राह्मण का विवाह नहीं हुआ था पर धनिक का हो चुका था पर अभी गौना नहीं हुआ था। तीनों मित्र नारी के विषय में चर्चा कर रहे थे और तभी ब्राह्मण ने कहा कि नारी के बगैर घर, घर नहीं होता। बस फिर क्या था धनिक ने सोचा कि वह तुरंत ससुराल जाकर पत्नी को लाएगा। सबने उसको कहा कि अभी शुक्र देवता अस्त है तो ऐसा करना ठीक नहीं पर उसके किसी की नहीं सुनी। ससुराल में भी सबका विरोध करके पत्नी को ले आया और कई तरह के अपशगुन उसके साथ हुए।

फिर ब्राह्मण ने उसे शुक्र प्रदोष व्रत करने को कहा जिससे सब कुछ ठीक हो गया। तो इस तरह शुक्र प्रदोष का व्रत करने से उसके सारे कष्ट दूर हो गए।