हैदराबाद : देश के सबसे गरीब माने जाने वाले निर्वाचन क्षेत्र में 12 मई को मतदान हुआ। इस क्षेत्र के लोगों की समस्या हमारी सभी बातों पर पानी फेर देती है। झारखंड का एक गांव है। इस गांव में राशन के लिए आसपास के गांवों की आदिवासी महिलाएं पैदल चल कर आती हैं। उन्हें राशन दुकान के सामने कई घंटे राशन दुकानदार की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

राशन दुकानदार के आने तक कई महिलाएं दुकान की खिड़की से झांक कर धान्य से भरी बोरियों को देख कर पेड़ के नीचे फिर बैठ जाती हैं। लगभग एक घंटे के बाद राशन दुकानदार के आने के बाद महिलाएं राशन कार्ड लेकर कतार में खड़ी रहती हैं। इन सभी को राशन की आवश्यकता होती है। राशन के आपूर्ति आस इनमें लगी होती है। राशन दुकानदार का कहना था कि चुनावी माहौल होने से राशन कार्ड के लाभार्थियों को आवश्यकता के अनुरूप राशन नहीं मिला।

महिलाओं का कहना है कि यह तो हमेशा होता है। आवश्यकता के अनुरूप उन्हें राशन नहीं मिलता। दो-दो महीने राशन की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यह हालत है झारखंड के पश्चिम सिंघ क्षेत्र की। इस क्षेत्र में कई बच्चे ठिंगणे व कुपोषित हैं। सिंघभूमि का यह क्षेत्र सबसे गरीब है, यह साबित हो चुका है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी व टाटा ट्रस्ट ने इस क्षेत्र का सर्वेक्षण किया। उनके सर्वेक्षण के मुताबिक चौंकाने वाले आकड़े सामने आये हैं।

क्षेत्र के कुल बच्चों में 2/3 बच्चों का वजन कम होता है। 5 वर्ष की आयु से कम उम्र वाले बच्चों का वजन ऊंचाई के मायने कम होता है। हर तीन बच्चों में एक बच्चा ठिंगणा व कमजोर होता है। यह यहां की सच्चाई है। इसके बावजूद यहां के चुनाव प्रचार में बाल कल्याण व बाल स्वास्थ्य से जुड़ा मामला कभी चर्चा में नहीं आता। इस निर्वाचन क्षेत्र में जनसंख्या 12 लाख है। यहां पहुंचे एक न्यूज चैनल ने कवरेज दिया। इसके मुताबिक काफी देर तक महिलाओं के राशन दुकान के सामने कतार में ठहरने के बावजूद राशन नहीं मिल रहा था। राशन दुकानदार को इंटरनेट की कनेक्टिवीटी नहीं मिल रही थी।

राशनकार्ड धारकों को उंगलियों के निशान मशीन पर देने के बाद ही अनाज आपूर्ति हो सकती है। यह आपूर्ति का नियम है। इस बायोमेट्रिक के लिए इंटरनेट सेवा जरूरी है। कई घंटे कतार में कतार में खड़े रहने के बाद महिलाओं को राशन नहीं मिलने से मायूस हो कर घर लौटने की सोच रही थी।

एक महिला कह रही थी, बीते दो दिनों से घर में राशन का दाना नहीं है। उसने पड़ोसी से चावल उधार लेकर पकाया है। उसे कार्ड पर अंत्योदया योजना के अंतर्गत 35 किलो चावल मिलता है, लेकिन बीते दो महीने से उसे राशन नहीं मिला है।

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आपको बता दें कि राशनकार्ड धारकों को चावल के साथ दाल, तेल व चिनी आदि खाद्य सामग्री मिलनी चाहिए लेकिन उन्हें चावल के सिवाय अन्य सामग्री नहीं मिलती। इस समस्या के लिए कई बार आंदोलन किये गये लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।