हैदराबाद : अपनी आवाज़ की लरज के साथ दिलों में स्थाई जगह बनाने वाले थे गायक तलत महमूद। 24 फरवरी 1924 को लखनऊ में पैदा हुए तलत महमूद की आवाज़ में लखनवी ख़नक सुनाई देती है। तलत अपने गीत के बोलों को लेकर बेहद सजग रहते थे। वह चाहते थे कि उनके बोल लोगों को सीधे स्पर्श करें। तलत की गायकी के दीवाने पाकिस्तान में भी थे। उन्हें कम ही उम्र से गाने का चस्का लग गया था।

हिंदी फिल्मों में शामिल ग़ज़लों पर जब भी कभी अलग से तबसरा होगा तलत का नाम सबसे पहले लिया जाएगा। ग़ज़ल गायकी में बेहद नाम कमा चुके जगजीत सिंह और पंकज उधास जैसे गायक उन्हें अपना आदर्श मानते आए हैं। यहां तक कि पाकिस्तानी सिंगर सज्जाद अली भी उन्हें गुरु मानते हैं।

तलत महमूद के साथ एक और इंटरेस्टिंग फैक्ट भी जुड़ा है। वो पहले भारतीय सिंगर हैं जिनका विदेश में कॉन्सर्ट हुआ। 1956 में ईस्ट अफ्रीका दौरे से शुरू हुआ ये सिलसिला अमेरिका, ब्रिटेन, वेस्टइंडीज जैसे मुल्कों तक फैला। तलत 1991 तक कॉन्सर्ट में गाते रहे।

उन्होंने अपने जीवनकाल में 800 के करीब गाने गाए। जिनमें से कई सारे आज भी उतनी ही तन्मयता से सुने जाते हैं, जितना उनका क्रेज़ उनके रिलीज के वक़्त था। उनके गाए शाम-ए गम की कसम, ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहां कोई न हो जैसे गाने आज भी उनकी आवाज को ताजा कर जाते हैं।

तलत महमूद ने देव आनंद के लिए 'जाएं तो जाएं कहां', राज कपूर के लिए 'मैं दिल हूं इक अरमान भरा' या 'तुमको फुरसत हो मेरी जान इधर देख तो लो' और दिलीप कुमार के लिए 'ऐ मेरे दिल कहीं और चल' या 'ये हवा ये रात ये चांदनी' जैसे गाने गाए।

1951 में बांग्ला फिल्मों की हीरोइन लतिका मलिक से शादी करने के बाद उनका जीवन काफी खुशहाल रहा। 70 के दशक में तलत महमूद गजलों को लेकर फेमस हुए उस समय कॉन्सर्ट करना बहुत बड़ी बात होती थी। बेहतरीन आवाज के मालिक कहे जाने वाले तलत 9 मई, 1998 को इस दुनिया को अलविदा कह गए। आज उन्हीं के गाये हुए गजलों से खराजे अकिदत पेश करते है......

जलते हैं जिसके लिए, तेरी आंखों के दीए,

ढूंढ़ लाया हूं वही, गीत मैं तेरे लिए

दिल में रख लेना इसे हाथों से ये छूटे न कहीं,

गीत नाज़ुक हैं मेरा शीशे से भी टूटे न कहीं,

गुनगुनाऊँगा वही गीत मैं तेरे लिए।