हैदराबाद : हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार नौशाद अली का आज पुण्यतिथि है। मुगले-आजम जैसी फिल्म में अपने संगीत से लाखों फैंस बनाने वाले नौशाद ने 64 सालों तक बॉलीवुड में अपना जादू बिखेरा। उन्होंने हिंदुस्तानी संगीत को एक अलग मुकाम तक पहुंचाने का काम किया। 5 मई 2006 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था।

25 दिसंबर 1919 को लखनऊ में जन्मे नौशाद जब स्कूल में पढ़ते थे तभी वाद्ययंत्र उन्हें इतना आकर्षित करते थे कि उन्होंने म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट बेचने वाली एक दुकान पर नौकरी कर ली। रोज वाद्ययंत्रों को साफ करने के बहाने नौशाद उन्हें छूने का सुख प्राप्त कर लेते थे। कभी-कभी दुकानदार की नजर बचा कर वे हरमोनियम और सितार बजाने की कोशिश कर लेते थे।

एक दिन दुकानदार ने उन्हें यह करते देख लिया तो वह बहुत खुश हुआ और उसने नौशाद को एक हरमोनियम उपहार में दे दिया। नौशाद उसे लेकर जब घर पहुंचे तो पिता उन पर बरस पड़े। उन्होंने चेतावनी दी कि या तो संगीत चुन लो या फिर परिवार और नौशाद ने संगीत चुन लिया। नौशाद 1937 में मुंबई आ गए।

एक स्वतंत्र संगीतकार के रूप में उनकी पहली रिलीज फिल्म थी प्रेमनगर (1940)। इसके बाद बड़ी कामयाबी के लिये नौशाद को थोड़ा इंतजार करना पड़ा। करीब नौ फिल्मों में संगीत देने के बाद 1944 में जब ‘रतन’ रिलीज हुई तो नौशाद छा गए।

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1946 में रिलीज हुई फिल्म ‘अनमोल घड़ी’ के बाद तो नौशाद का नाम बिकने लगा। फिल्में बैनर, डायरेक्टर, हीरो या हिरोइन की जगह नौशाद के नाम पर बिकने लगे। नौशाद ने करीब 65 फिल्मों में संगीत दिया जिनमें तीन फिल्में 100 सप्ताह से ज्यादा, 9 फिल्में 50 सप्ताह से ज्यादा और 26 फिल्में 25 सप्ताह से ज्यादा चलीं।

1982 में उन्हें सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फालके पुरस्कार से नवाजा गया। कहा जाता है कि संजय खान के अनुराध पर नौशाद ने ‘द ग्रेट मराठा’ सीरियल में यादगार संगीत दिया। इसके बाद फिर 2005 में उन्होंने अकबर खान की फिल्म ‘ताजमहल’ में संगीत दिया। यह उनकी अंतिम फिल्म थी।

नौशाद के परिवार वाले हिंदी फिल्मों और संगीत के सख्त खिलाफ थे। कहा जाता है कि जब नौशाद की शादी तय की गई, तब उनके ससुराल वालों को बताया गया कि वह पेशे से एक टेलर हैं। दिलचस्प बात ये है कि नौशाद की खुद की बारात में उनका ही कंपोज किया गाना बजा था और वहां किसी को मालूम नहीं था कि इसे नौशाद ने ही बनाया है। बताया जाता है कि बड़े ही भोले बनकर नौशाद ने अपनी शादी में मेहमानों से पूछा था कि उन्हें ये गाना और धुन कैसी लगी और ज्यादातर ने गाने की तारीफ की थी।

ऑस्कर के लिए नॉमिनेट की गई पहली भारतीय फिल्म मदर इंडिया का म्यूजिक भी नौशाद ने ही दिया था। नौशाद ने 65 बॉलीवुड फिल्मों के लिए म्यूजिक दिया है।