देशभर में आज हनुमान जयंती का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की कतारें देखने को मिल रही है, साथ ही जयकारे गूंज रहे हैं। मान्यता है कि कलियुग में समस्त पापों का हरण करने वाले वीर हनुमान ही हैं, जो अभी भी विचरण कर रहे हैं।

बैकुंठ जाते वक्त भगवान श्रीराम ने अपने परम भक्त हनुमान को इसी उद्देश्य से धरती पर रहने का आदेश दिया था। आज हम आपको वीर हनुमान के उन विभिन्न स्वरूपों की जानकारी दे रहे हैं, जिनकी वंदना से समस्त कष्टों से छुटकारा मिलता है।

पंचमुखी स्परूप

हनुमान जी के पंचमुखी स्वरूप की वंदना सबसे सार्थक मानी गई है। हनुमान जी की पंचमुखी प्रतिमा बहुत ही दुर्लभ है। अगर आप उस प्रतिमा की पूजा करते हैं तो समस्त कष्ट चुटकियों में कट जाएंगे। हालांकि हनुमान जी के इस स्वरूप से जुड़ी एक पुरानी कथा भी है।

मान्यता है कि भक्त हनुमान ने अपने प्रभु श्रीराम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए यह रूप धरा था। उन्होंने अहिरावण की कैद से श्रीराम और लक्ष्मण को बचाने के लिए पंचमुखी रूप धारण किया और अहिरावण का वध किया।

भक्त हनुमान

हनुमान जी का यह स्वरूप अत्यंत प्रिय है। इस स्वरूप में हनुमान जी अपने प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन दिखाई देते हैं। जो लोग स्वरूप की पूजा करते हैं, उन्हें कार्यों में सफलता पाने के लिए एकाग्रता और शक्ति प्राप्त होती है। लक्ष्यों को प्राप्त करने में आ रही परेशानियां दूर हो जाती हैं।

सेवक हनुमान

सेवक स्वरूप में हनुमान जी प्रभु श्रीराम की सेवा में लीन नजर आते हैं। स्वयं हनुमान जी ने खुद यह वचन मांगा था कि प्रभु मुझे हमेशा अपना सेवक बनाकर रखिएगा। मान्यता है कि इस स्वरूप की पूजा करने पर भक्त के मन में कार्य और रिश्तों के प्रति सेवा और समर्पण की भावना जागृत होती है। साथ ही हमेशा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का आशीर्वाद बना रहता है।