नई दिल्ली: हिन्दू धर्म में गजानन की पूजा का विशेष महत्व है। हर शुभ कार्य में गणपति को ही सबसे पहले अर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक श्रीगणेश प्रथम पूज्य देव कहलाते है। यहां तक कि पौराणिक कथाओं में देवता भी किसी शुभ कार्य के लिए सबसे पहले गणेश पूजन ही करते हैं। पुराणों के मुताबिक गणेश की अग्रपूजा का विधान है।

हम यहां आपको बता रहे हैं गणेश भगवान की चार चमत्कारी मूर्तियों के बारे में। जिनकी रोज पूजा करने से आपका घर धन धान्य से परिपूर्ण होगा।

1 . श्वेतार्क की गणेश मूर्ति

गणपति की मूर्तियों में सबसे अधिक महत्व श्वेतार्क की गणेश प्रतिमा का है। सफेद की आक की जड़ से आप ये मूर्ति प्राप्त कर सकते हैं। कई बार जड़ की बनावट हूबहू गणेशजी की प्रतिमा से मेल खाती है। वैसे सावधानी पूर्वक जड़ निकालने के बाद इसे आप बढ़ई के पास ले जाकर गणेश की पूर्ण आकृति बनवा सकते हैं।

श्वेतार्क की जड़ निकालने का भी विधान है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक श्वेतार्क की जड़ रवि पुष्य योग में ही निकालें। रवि पुष्य योग की पूर्व संध्या पर श्वेतार्क वृक्ष को दीप दिखाकर विधिवत पूजा करें और उनके घर आगमन के लिए आवाहन करें। इसके बाद रवि पुष्य योग में ही जड़ों की खुदाई करें। सबसे पहले चांदी के किसी नुकीली चीज से जड़ खोदें। फिर फावड़ा या सुविधानुसार लोहे के औजारों की इस्तेमाल कर सकते हैं।

श्वेतार्क गणपति 
श्वेतार्क गणपति 

जब सावधानी पूर्वक जड़ निकल आए तो तत्काल बाद इसका दूध से अभिषेक करें। फिर कुछ हफ्तों तक धूप में इसे सूखने के लिए रख देँ। बाद में काट छांटकर इसे गणपति की आकृति का रूप दें। इसके बाद श्वेतार्क मूर्ति पर घी का लेप करें। फिर इसकी प्राण प्रतिष्ठा कर घर में स्थापित कर देँ।

खास बात ये कि श्वेतार्क की नियमित और विधिवत पूजा होनी चाहिए। श्वेतार्क मूर्ति अगर आप घर में स्थापित कर रहे हैं। तो ध्यान रखें कि अगर आप कहीं बाहर जा रहे हों तो इनकी पूजा का विधिवत इंतजाम करके जाएं।

हल्दी की गणपति
हल्दी की गणपति

2. हल्दी की गांठ वाली गणपति की मूर्ति

हल्दी सर्वसुलभ चीज है। ऐसी गांठ को चुनें जिसकी आकृति गणेशजी से मिलती हो। उसे आप पूजा के स्थान पर स्थापित कर इसकी प्राण प्रतिष्ठा करें और इसकी पूजा से भी विशेष फल मिलता है।

गोबर गणेश 
गोबर गणेश 

3. गोमय यानी गोबर से बनी गणेश मूर्ति

हिंदू धर्म में गाय के गोबर का बड़ा महत्व है। आप गो माता के गोबर से भी गणपति बनाकर इसकी विधिवत पूजा कर सकते हैं। गोबर गणेश में महालक्ष्मी का वास माना जाता है।

लकड़ी से बनी गणपति 
लकड़ी से बनी गणपति 

4. अन्य लकड़ी से बनी गणपति मूर्ति

श्वेतार्क हासिल करना दुर्लभ है। लिहाजा आप सर्वसुलभ पीपल, आम, नीम आदि के पेड़ों की लकड़ी से भी गणपति की प्रतिमा बनाकर इसकी पूजा अर्चना कर सकते हैं।