एक ऐसी जगह जहां अंग्रेजों के फरमान के कारण... लोग अब भी नहीं मनाते होली  

कांसेप्ट इमेज - Sakshi Samachar

भारत में होली का त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन चैत्रकृष्ण प्रतिपदा में रंग खेला जाता है। लेकिन देश में एक ऐसी जगह भी है, जहां अंग्रेजों के एक फरमान की वजह से होली नहीं मनाई जाती है, बल्कि लोग अगले दिन रंगों से यह त्यौहार मनाते हैं।

यह जगह है उत्तर प्रदेश का जिला झांसी जहां के कुछ इलाकों में आज भी होली को धूमधाम से नहीं मनाया जाता। ऐसा कहा जाता है कि होली के दिन ही अंग्रेजों ने लक्ष्मीबाई के बेटे दामोदर राव को अंग्रेजों ने उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद लक्ष्मी बाई ने होली नहीं मनाई और वहां के लोगों ने भी होली नहीं मनाई।

उसके बाद से ही यहां के लोग इसे बरकरार रख रहे हैं और होली नहीं मना रहे हैं। हालांकि अब धीरे-धीरे लोगों ने होली मनाना शुरू कर दिया है। कई साल पहले तक ऐसा नहीं होता था।

अंग्रेजों का फरमान

आपको बता दें कि 21 नवंबर, 1853 को झांसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद झांसी की कमान लक्ष्मीबाई ने संभाली थी। गंगाधर राव ने मृत्यु से पहले ही दामोदर राव नाम के बालक को गोद लिया था और उत्तराधिकारी घोषित किया था।

झांसी

लेकिन अंग्रेजों ने उसे उत्तराधिकारी नहीं माना और अंग्रेजों ने जिस दिन इस बात का ऐलान किया था वह होली का दिन था। इसलिए वहां के लोग होली नहीं मनाते थे।

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होली न मनाने की वजह

झांसी गजेटियर में दर्ज इतिहास के अनुसार यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना होली के दिन घटी थी होली के जश्न की तैयारियां जारी थीं। इसी बीच अंग्रेजों का तुगलकी फरमान सुनाया गया लोग शोक में डूब गए और होली नहीं मनाई गई। रानी लक्ष्मीबाई ने किला छोड़ा और दूसरे महल में चली गईं। इसी गम में आज भी झांसी के कई लोग होली के दिन होली नहीं मनाते।

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