नई दिल्ली : देश के 91 प्रमुख जलाशयों में सात मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान 58.723 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल संग्रह हुआ। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 36 प्रतिशत है। 28 फरवरी को समाप्त सप्ताह में जल संग्रह 40 प्रतिशत के स्तर पर था।

यहां जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, सात मार्च को समाप्त सप्ताह में यह संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 107 प्रतिशत तथा पिछले 10 वर्षो के औसत जल संग्रहण का 99 प्रतिशत है।

बयान के अनुसार, इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं, जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली लाभ देते हैं।

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उत्तरी क्षेत्र के हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इनमें कुल उपलब्ध संग्रहण 9.63 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 53 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 29 प्रतिशत थी।

पूर्वी क्षेत्र के झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 9.46 बीसीएम है, जो इनकी कुल संग्रहण क्षमता का 50 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 56 प्रतिशत थी।

पश्चिमी क्षेत्र के गुजरात तथा महाराष्ट्र में 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 8.01 बीसीएम है, जो इनकी कुल संग्रहण क्षमता का 26 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इनकी संग्रहण स्थिति 37 प्रतिशत थी।

मध्य क्षेत्र के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 16.94 बीसीएम है, जो इनकी कुल संग्रहण क्षमता का 40 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 34 प्रतिशत थी।

इसी तरह दक्षिणी क्षेत्र के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 14.69 बीसीएम है, जो इनकी कुल संग्रहण क्षमता का 28 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 25 प्रतिशत थी।

बयान के अनुसार, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है, उनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, और तमिलनाडु शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण समान स्तर पर है, उनमें एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं) शामिल हैं।

पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कम है, उनमें राजस्थान झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल शामिल हैं।