कहते हैं कि किसी के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए और जब किसी का धैर्य टूटता है तो वह कहर बनकर टूटता है। ठीक ऐसा भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ उस समय किया जब 26 फरवरी को भारतीय सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट सहित तमाम आंतकी ठिकानों को नष्ट करके अपनी मंशा जाहिर कर दी। हालांकि पाकिस्तान ने भारतीय सेना की आंतकियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी लाज बचाने के लिए तरह तरह के बहाने बनाता दिखा पर हमले के 24 घंटे बाद पाकिस्तान ने जिस तरह से सैनिक कार्रवाई शुरू की उससे साफ लगता है कि भारत के हमले से पाकिस्तान में बेचैनी है।

तेरहवीं के पहले लिया बदला

14 फरवरी को पुलवामा में हुए सीआरपीएफ के जवानों के उपर जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले में मारे गए अधिकांश जवानों की 27 फरवरी को तेरहवीं थी और तेरहवीं के पहले जिस तरह से भारत सरकार के फरमान पर सेना ने आंतक को खात्मा करने के लिए जिस तरह से सैन्य कार्रवाई की और पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों को खत्म किया। इससे अब कोई भी आतंकी संगठन दोबारा इस तरह के हमले को भारत में अंजाम देने के पहले 100 बार जरूर सोचगा।

भारतीय सेना के विनान
भारतीय सेना के विनान

आपको बता दें कि हिन्दू धर्म में 13वीं की बड़ी मान्यता है और यह माना जाता है कि मृतक की आत्मा को तेरह दिन की रस्मों के बाद ही शांति मिलती है। इसलिए इन जवानों को तेरहवीं के पहले कार्रवाई को श्रद्धांजलि की तरह देखा जा रहा है।

बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी

सीआरपीएफ के जवानों की शहादत पर अपनी बात रखते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके बाद से ही भारतीय सेना ने प्रधानमंत्री के निर्देश व मंशा के अनुरूप जिस तरह से पाकिस्तान पर धावा बोलकर आतंकी ठिकानों का खात्मा किया है उससे साफ जाहिर होता है कि भारत और पाकिस्तान के के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेगा और आतंकियों को पनाह देने वाले लोगों और संगठनों के खिलाफ अपनी कार्यवाही जारी रखेगा।

पाकिस्तानी सरकार और मीडिया ने भारत सरकार की कार्यवाही और दावे को हमेशा की तरह गलत ठहराया है। पर आंतकियों के ठिकानों पर सटीक व आक्रामक कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने सीमा पर अनावश्यक तनाव पैदा करने के लिए फायरिंग के साथ-साथ और भी तरह की गतिविधियां शुरू कर दी है। इससे पाकिस्तानी मीडिया या सरकार चाहे जो भी बयान दे पर इतना तो साफ है कि पाकिस्तान में बड़ी तबाही हुई है और 300 से अधिक आतंकी मारे गए हैं।

दोनों देशों में फिलहाल तनाव बरकरार है और दोनों देशों की सेनाएं आगामी किसी भी कोशिश का जवाब एक दूसरे को देने की कोशिश कर रही हैं।

भारतीय सेना के विनान
भारतीय सेना के विनान

भारत सरकार ने अपनी मंशा जाहिर करते हुए विदेश के सभी बड़े देशों से आतंकवाद खत्म करने की अपील की है आरती भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के देशों में भारतीय राजनयिक उन्होंने अपने बयान जारी करके भारत की नीति स्पष्ट कर दिया है और माना जा रहा है कि पाकिस्तान के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

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सोशल मीडिया में हलचल

जवानों की तेरहवीं के पहले भारत के द्वारा लिए गए इस बदले को सोशल मीडिया के साथ साथ जवानों के परिजनों ने खूब सराहा है और कहा है कि चिता की आग ठंडी होने के पहले जो संकल्प भारत सरकार ने लिया था, उसे तब तक दोहराया जाना चाहिए और पाकिस्तान पर तब तक हमले होने चाहिए जब तक वहां से आतंक का पूरी तरह से सफाया नहीं हो जाता या भारत को अस्थिर करने की उसकी कोशिशें बंद नहीं हो जातीं।

डर गए इमरान

पाकिस्तान सरकार व सेना को मालूम है कि वह भारत की सेना के सामने वह किसी भी तरह से टिक नहीं सकता है। इसीलिए आतंकी हमलों के हर मामले की जांच कराने के साथ साथ बातचीत जारी रखने की बातें कह रहा है। खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने वीडियो संदेश में भारत से इस तरह की अपील कर रहे हैं। क्योंकि वह जानते हैं कि वह अगर अपनी ओर से नरमी नहीं दिखाएंगे तो भारत अपनी आक्रामकता जारी रखेगा और हर दिन पाकिस्तान का बड़ा नुकसान होगा।

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने बृहस्पतिवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर हुए हमले की निंदा की। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे और इसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। सुरक्षा परिषद ने इस घटना के अपराधियों, षडयंत्रकर्ताओँ और उन्हें धन मुहैया कराने वालों को ‘इस निंदनीय कृत्य' के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने और न्याय के दायरे में लाने की जरूरत को रेखांकित किया। UNSC की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘ सुरक्षा परिषद के सदस्य 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में जघन्य और कायराना तरीके से हुए आत्मघाती हमले की कड़ी निंदा करते हैं जिसमें भारत के अर्धसैनिक बल के 40 जवान शहीद हो गए थे और इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।''

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

गौरतलब है कि 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आतंकवादी हमले में करीब 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इसके बाद से भारत में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश बढ़ गया है।