हैदराबाद/अमरावती : पिता के नक्शे कदम पर चलने के साथ जनकल्याण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे वाईएस जगन मोहन रेड्डी को तेलुगु भाषी 'जगनन्ना' कहकर प्यार से बुलाते हैं। असाधारण अंदाज में 14 महीने तक लोगों के बीच रहकर प्रजा संकल्प यात्रा के जरिए 3,600 किलो मीटर से अधिक दूरी पैदल तय कर जनता के दिलों में अपनी एक अलग जगह बनाना वाईएस जगन की खासियत रही है। जगन ने न केवल लोगों की समस्याएं बल्कि उनके दिलों की धड़कनों की आवाज सुनी है।

जहां पूरा राज्य जगनन्ना रावाली... जगनन्ना कावाली... मल्ली राजन्ना संक्षेम राज्यम साकारम कावाली... (भाई जगन आना चाहिए...भाई जगन चाहिए...पुन: राजशेखर रेड्डी के कल्याणकारी शासन का सपना पूरा होना चाहिए) के नारे लग रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू धृतराष्ट्र की भांति पेश आ रहे हैं। इसीलिए कह रहे हैं कि 'जगन कभी तेलुगु भाषियों के अन्ना (भाई) नहीं बन सकते।' आंध्र प्रदेश की पूरी जनता को भाई जगन के साथ खड़े होते देख चंद्रबाबू के दिल की धड़कनें तेज हो गई हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि बाबू जहां एक तरफ जगन की आलोचना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जगन द्वारा अपनाए गए रास्ते को ही अपना रहे हैं। चुनाव करीब आते देख जगन के विशेष दर्जे के आंदोलन से लेकर नवरत्नालु तक सभी कार्यक्रमों का नकल करके फिर से वोट बटोरने की कोशिश में लगे हैं चंद्रबाबू। ससुर द्वारा स्थापित टीडीपी को छीनने वाले चंद्रबाबू ने सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाकर आखिर में पार्टी सिद्धांतों के विरुद्ध कांग्रेस से गठबंधन किया है।

विशेष दर्जा...आंध्रवासियों के लिए संजीवनी है। विभाजन की वजह से सभी मायनों में नुकसान झेल चुके आंध्र प्रदेश की मदद के लिए संसद को साक्ष्य मानते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री ने विशेष दर्जे का आश्वासन दिया था। परंतु इस मामले में केंद्र का रुख स्पष्ट नहीं रहा और आखिर में वह अपने वादे से पीछे हट गया। पिछले साढ़े चार साल तक केंद्र के साथ रहकर विशेष दर्जे पर नित-नया बयान और ड्रामा करते हुए चंद्रबाबू अब फिर से यूटर्न लेकर विशेष दर्जे का मुद्धा उठा रहे हैं।

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आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग का मुद्दा सबसे पहले वाईएस जगन ने उठाया था और तब से अब तक दृढ़ संकल्प के साथ संघर्ष करते रहे हैं। विशेष दर्जे को लेकर वाईएस जगन का आंदोलन और इतिहास सदैव याद रहेगा। राजनीतिक जानकार और आम लोगों की मानें, तो विशेष दर्जे का मुद्दा अगर आज भी जिन्दा है तो सिर्फ और सिर्फ जगन की वजह से।

आंध्र प्रदेश के लोगों का कहना है कि विशेष दर्जे के लिए पिछले साढ़े चाल साल से निरंतर संघर्षरत वाईएस जनग को नहीं तो और किसे अन्ना कह सकते हैं। उनका कहना है कि वाईएस जगन उनके दिलों में बसे हुए हैं। टीडीपी सरकार के भ्रष्टाचार और अराजकता के खिलाफ आवाज बुलंद कर चंद्रबाबू नायडू की नींद उड़ा चुके वाईएस जगन ने दो साल पहले

जनकल्याण के लिए 'नवरत्नालु' का ऐलान किया था। जगन ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने पर हम क्या करेंगे, इसका ब्यौरा देते हुए अपना मैनिफेस्ट लोगों के सामने रखा था। नवरत्नालु को लोगों से मिलते व्यापक समर्थन से घबराए चंद्रबाबू नायडू ने अब चुनाव के वक्त नया ड्रामा शुरू किया है।

अगले दो महीने में चुनाव होने हैं और अब बेशर्मों की तरह चंद्रबाबू नायडू वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की नवरत्नालु का नकल कर रहे हैं। पिछले साढ़े चार साल तक भ्रष्टचार में डूबकर जनकल्याण की अनदेखी कर चुके चंद्रबाबू नयाडू का विरोध कर रहे लोग... उनके कल्याण के लिए श्रेष्ठ कल्याण योजनाओं का एलान कर चुके जगन को अन्ना (भाई) मान रहे हैं और उनका समर्थन कर रहे हैं।

पिछले 57 महीनों तक लोगों का पेट मारकर आखिरी तीन महीने भोजन देने की बात करने वाले चंद्रबाबू के अटर फ्लॉप शो पर लोग भरोसा करने की स्थिति में नहीं है। चुनाव करीब आने से चंद्रबाबू खुद को जनता के नेता पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।

केंद्र के खिलाफ संघर्ष के नाम पर काले कपड़े पहनकर बाबू गैर जरूरी हरकतों से लोगों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। आटो रिक्शा में पोझ देते हुए पसुपु-कुंकुम के नाम पर पोस्ट डेटेड चेक देकर सभी को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

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परंतु श्रेत्रीय स्तर पर लोग बाबू को दिन में तारे दिखा रहे हैं। लोग बाबू के साढ़े चार साल के शासन को लेकर उन्हें आड़े हाथों लेने के साथ-साथ दूसरी तरफ चुनाव के करीब आते देख खेले जा रहे ड्रामा को करीब से देख रहे हैं।

600 आश्वासन देकर बाद में धोखा दे चुके चंद्रबाबू की अनदेखी करते हुए लोग उनके हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े होने और उनकी समस्याओं का समाधान का भरोसा दे चुके वाईएस जगन के साथ चल रहे हैं और यह बात पिछले दिनों संपन्न प्रजा संकल्प यात्रा में साबित भी हो चुकी है।