हैदराबाद : वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की मानद अध्यक्ष वाईएस विजयम्मा ने कहा कि कई कठिनाइयों व रुकावटों का सामना करते हुए जनकल्याण की दिशा में अग्रसर अपने बेटे व वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी को देखकर उन्हें गर्व होता है।

साक्षात्कार का दृश्य 
साक्षात्कार का दृश्य 

6 नवंबर 2017 को कड़पा जिले के इडुपुलापाया से प्रजा संकल्प यात्रा के नाम से वाईएस जगन मोहन रेड्डी द्वारा शुरू की गई पदयात्रा अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस संदर्भ में जगन की मां वाईएस विजयम्मा ने 'साक्षी' को साक्षात्कार दिया। इस साक्षात्कार उन्होंने कहा,

'मैं समझती हूं कि एक ही परिवार में तीन लोगों का पदयात्रा करना इतिहास में पहला है। पदयात्रा में तीनों का लक्ष्य एक ही रहा और वह है लोगों से मिलना और उनकी समस्याओं को जानना।

दिवंगत नेता वाईएस राजशेखर रेड्डी आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन मैं मेरे बेटे जगन को पहली प्लीनरी में यह कहकर जनता को सौंप दिया था कि यह मेरा बेटा नहीं आपका बेटा है।

राजशेखर रेड्डी की पदयात्रा के दौरान जो हालात बने थे, आज भी वही स्थिति बनी हुई है। राज्य के लोग कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उस वक्त लोगों को भरोसा देने के लिए राजशेखर रेड्डी जनता के बीच गए थे। उस वक्त और अब वही जरूरत होने से जगन पदयात्रा के जरिए लोगों के बीच पहुंचे हैं।

जगन ने विधानसभा में जनसमस्याओं के खिलाफ संघर्ष किया। इसके बावजूद सत्तापक्ष ने विपक्ष के नेताओं की एक नहीं सुनी। 23 विधायक दल बदले, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं, उन्हें मंत्री तक बनाया गया। ऐसी स्थिति में जगन लोगों के बीच पहुंचे हैं।

जगन अनेक समस्याओं और मुश्किलें झेलते हुए लोगों के बीच हैं। जगन को लोगों में उनके साथ खड़े रहने का यह विश्वास जगाते हुए पदयात्रा में आगे बढ़ते देख मुझे गर्व होता है। जगन पर हत्या की कोशिश की घटना से डर लगा। जगन को कई तरह से परेशान किया गया। इसके बावजूद जगन जब पीछे नहीं हटा, उसकी हत्या की कोशिश की गई। उस भगवान की दया से जगन बाल-बाल बच गया।

बाबू का रवैया चिंताजनक...

चंद्रबाबू पर अलिपिरी में जब हमला हुआ था तब वाईएसआर ने खुद वहां पहुंच कर उनकी मिजाजपुर्सी की थी और हमले का खंडन करते हुए धरना भी दिया था। वैसी संस्कृति अब नहीं है और वाईएसआर की तुलना बाबू से करना बड़ी भूल होगी।

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वाईएस पर हुए हमले के एक घंटे के भीतर डीजीपी और चंद्रबाबू को स्पष्टीकरण देने की क्या जरूरत थी। हमले का खंडन करने वालों पर भी चंद्रबाबू बरस रहे। अंत में जीत सच्चाई की होती है। वर्तमान में टीडीपी व कांग्रेस के गठबंधन को लोग गंभीरता से देख रहे हैं और हमें बताने की जरूरत नहीं है। हाल तक भाजपा के साथ रहने वाले बाबू अब कांग्रेस के साथ हैं। कांग्रेस के साथ चंद्रबाबू के संबंध काफी पुराने हैं, लेकिन मैंने नहीं सोचा था कि दोनों ऐसे सरेआम मिल जाएंगे।

प्रजा संकल्प यात्रा के जरिए जगन की बढ़ती लोकप्रियता से डरकर चंद्रबाबू ने कांग्रेस के साथ दोस्ती की है। ओदार्पू यात्रा ने जगन को एक नेता बनाया है। पदयात्रा में सरकार की विफलताओं को उजागर करते हुए नवरत्नालू के जरिए क्या करेंगे, इससे लोगों को अवगत करा रहा है जगन।