राजस्थान विधानसभा चुनाव की जंग अब अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंच गई है। सात दिसंबर को होने वाले मतदान के लिए सभी पार्टियों ने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। सबसे अहम मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच झालरापाटन विधानसभा सीट पर देखने को मिलेगा, जहां दो पार्टी नहीं बल्कि दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा। इस सीट पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को मानवेंद्र सिंह टक्कर देंगे, जो कभी उन्हीं के सिपहसालार रहे थे।

दरअसल, भाजपा का दामन छोड़ कुछ दिन पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए मानवेंद्र सिंह झालावाड़ जिले की झालरापाटन सीट से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को चुनौती देंगे। वह 2014 लोकसभा चुनाव में अपने पिता को पार्टी से दरकिनार किए जाने को लेकर नाराज थे।

झालरापाटन विधानसभा सीट पर उम्मीदवार

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे

भाजपा की तरफ से एक बार फिर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपनी पारंपरिक सीट झालरापाटन से चुनावी मैदान में हैं। वसुंधरा राजे 2003 से यहां से तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं और चौथी बार दावेदारी कर रही हैं। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में वह यहां से 60,869 वोटों से जीती थीं।

रोड शो के दौरान सीएम वसुंधरा राजे
रोड शो के दौरान सीएम वसुंधरा राजे

वसुंधरा राजे के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो 1984 में उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया था। इसके बाद 1985-87 के बीच राजे भाजपा युवा मोर्चा राजस्थान की उपाध्यक्ष रहीं। 1987 में वसुंधरा राजे राजस्थान प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष बनीं। 1998-1999 में अटल बिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में वसुंधरा राजे को विदेश राज्यमंत्री बनाया गया।

वसुंधरा राजे को अक्टूबर 1999 में फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री के तौर पर स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। भैरोंसिंह शेखावत के उपराष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें राजस्थान में भाजपा राज्य इकाई का अध्यक्ष बनी।

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कांग्रेस उम्मीदवार मानवेंद्र सिंह (फाइल फोटो)
कांग्रेस उम्मीदवार मानवेंद्र सिंह (फाइल फोटो)

मानवेंद्र सिंह

मानवेंद्र सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता रहे जसवंत सिंह के पुत्र हैं। बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले मानवेंद्र सिंह ने सितंबर में सत्तारूढ़ भाजपा का दामन छोड़ दिया था।

वह 2014 लोकसभा चुनाव में अपने पिता को पार्टी से दरकिनार किए जाने को लेकर नाराज थे। इससे पहले मानवेंद्र 1999 में बाड़मेर-जैसलमेर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़े थे लेकिन हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि बाद में बाड़मेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से (2004-2009) से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

झालरापाटन विधानसभा सीट का समीकरण

झालरापाटन विधानसभा सीट पर इस वक्त देशभर के राजनीतिक पंडितों की नजर टिकी हुई है। एक तरह जहां भाजपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस खुद को साबित करने की तैयारी में है। बात समीकरण की करें तो इस सीट पर लगभग ढाई लाख मतदाता हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार, यहां की जनसंख्या 39,1746 है, जिसका 70.07 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 29.93 प्रतिशत हिस्सा शहरी है। आंकड़ों के अनुसार, कुल आबादी का 17.67 फीसदी अनुसूचित जाति और 8.5 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 79.12 फीसदी मतदान हुआ था।