गुम्मडि विट्ठल उर्फ गदर (गद्दर) जन नाट्य मंडली के संस्थापक है। गदर स्वयं लोक गीत लिखते है। गाते है। अभिनय करते है। वर्ष 1949 में गदर का जन्म तेलंगाना के मेदक जिले के तूप्रान गांव में एक दलित परिवार में हुआ। गदर के मां का नाम लच्चम्मा और पिता का नाम शेषय्या है।

शिक्षा

निजामाबाद जिले के बोधन शहर में गदर की प्राथमिक शिक्षा हुई। इंजीनियरिंग की पढ़ाई उस्मानिया विश्वविद्यालय से हुई। वर्ष 1969 में शुरू हुए तेलंगाना आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। लोगों को जागरूक करने के लिए अनेक गांवों में कार्यक्रम आयोजित किये। इस जागरुक कार्यक्रम के लिए गदर ने 'बुर्राकथा' (लोक कथा की एक शैली) को चुना। गदर हर रविवार को बुर्राकथा आयोजित करने लगे।

गद्दर (फाइल फोटो)
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आपुरा रिक्षा

इसी क्रम में एक दिन प्रमुख क्रांतिकारी फिल्म निर्माता और निर्देशक बी. नरसिंह राव ने गदर के कार्यक्रम को देखा। वर्ष 1971 में नरसिंह राव के आग्रह पर गदर ने पहली बार एक गीत 'आपुरा रिक्षा' (रोको रिक्षा) लिखी। उनके पहले अल्बम का नाम 'गद्दर' है। इस प्रकार गुम्मडि विट्ठल का नाम बदलकर गद्दर हो गया। गदर ने लोगों में जागरूकता ले आने के लिए बुर्राकथा का मार्ग चुना। वो अपने कार्यक्रमों के जरिए परिवार नियोजन और स्वच्छता से होने वाले लाभ और नुकसान के बारे में कहते। इसी क्रम में गद्दर ने अनेक गीत लिखे।

गदर और मल्लु भट्टी विक्रमार्क वर्तमान राजनीति पर बातचीत करते हुए
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जन ना़ट्य मंडली

गद्दर ने वर्ष 1972 में जन नाट्य मंडली की स्थापना की। जन नाट्य मंडली का उद्देश्य बुर्राकथा द्वारा गांवों में हो रहे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ दलितों और बहुजनों में जागरुक करना रहा है। इसी क्रम में गद्दर ने वर्ष 1975 में बैंक भर्ती परीक्षा लिखी। पास हुए। वह केनरा बैंक में क्लर्क के रूप में नियुक्त किये गये। इसके बाद विमला से शादी कर ली। उन्हें बेटा सूर्य किरण, चंद्रुडू (वर्ष 2003 में अस्वस्थता के कारण मौत हो गई) और बेटी वेन्नला है।

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माभूमि

बी. नरसिंह राव के निर्माता और निर्देशन में निर्मित फिल्म 'माभूमि' में सशस्त्र संघर्ष की भूमिका निभाने वाले यादगिरी द्वारा गाये गीत को गद्दर ने इस फिल्म में 'बंडेनका बंडी कट्टि' गीत को दोबारा कंपोज किया और गाया है। वर्ष 1984 में गद्दर ने बैंक की नौकरी से इस्तीफा दिया। गद्दर ने वर्ष 1985 में प्रकाशम जिले में हुए कारमचेडु दलित नरसंहार के विरोध में बहुत बड़ा आंदोलन किया।

ओग्गु कथा

इसके बाद गद्दर ने ओग्गु कथा, बुर्रा कथा और एल्लम्मा कथा के जरिए गांवों में कार्यक्रम आयोजित करने लगे। केवल तेलंगाना ही नहीं महाराष्ट्र, ओड़िशा, बिहार और अन्य राज्यों में भी गद्दर अपने कार्यक्रम करने लगे। गद्दर अपने कार्यक्रम के दौरान धोती, कंबर और पैरों में घुंघरू धारण करते है। गद्दर के गाने सुनकर लोग झूम उठते है। लोगों की मुश्किलों और सरकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते है। जन नाट्य मंडली में अनेक सदस्य है। गद्दर के गाये हुए गीतों हजारों कैसेट और सीडी बेचे गये और बाजार में उपलब्ध है।

हमला

लोक गायक गदर पर उनके निवास अलवाल में 6 अप्रैल, 1997 को जानलेवा हमला किया। इस हमले में घायल गदर का काफी लंबा इलाज चला। जब गदर पर हमला हुआ तब तेलुगु देशम पार्टी की सरकार थी। अब भी गदर के दिल के पास एक गोली है। जो निकालने पर जान को खतरा हो सकता है। फिर भी गदर गीत लिखते है। गाते है और अभिनय करते है। गदर कई सालों से उनके ऊपर हुए हमले की न्यायिक जांच कर रहे है। मगर सरकार न्यायिक जांत करने में कतरा रही है।

राजनीति

गदर सशस्त्र संघर्ष विश्वास रखते है। माओवादी आंदोलन के समर्थक है। अधिकतर गीत माओवादी आंदोलन से जुड़े है। कोई माने या न माने मगर माओवादी आंदोलन के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने में या शक्ति प्रदान करने में गदर की जन नाट्य मंडली का बहुत बड़ा योगदान रहा है। जहां कहीं भी कथित 'मूठभेड़' होता है और कोई माओवादी मारा जाता है तो गदर वहां जाते और उनके समर्थन में वहीं पर गीत लिखते और गाते। साथ ही मृतक शव को एक सम्मान के साथ ले आते और अंतिम संस्कार करते। इनके साथ विप्लव रचियतल संघम् (विरसं) के नेता वरवर राव और अन्य भी होते थे।

मतभेद

इसी क्रम में 'सैध्दांतिक' मदभेद के चलते माओवादियों ने अपने समर्थक गदर को पार्टी से बहिष्कार कर दिया। मगर गदर ने इसे उतना गंभीरता से नहीं लिया। वो हमेशा की तरह माओवादी और आंदोलन के समर्थन में गीत लिखते गये और लिख रहे है। यहां पर माओवादी का अर्थ केवल जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने वाले, के रूप में ले तो अच्छा होगा। क्योंकि अन्याय खिलाफ जो भी आवाज उठाते है उसे या उन्हें माओवादी कहा जाता है।

विश्वास

अब गदर का सशस्त्र संघर्ष पर से विश्वास उठ गया है। हाल ही में गदर ने सफेद कपड़े पहनकर कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले। इस दौरान गदर ने उनके सामने गीत भी गाया। इस भेंट के बाद गदर मानते है कि 'वोट की क्रांति' से सामाजिक परिवर्तन किया जा सकता है और इसकी आवश्यकता है। गदर के इस सोच-विचार ने सभी को सोचने पर मजबूर किया। मुख्य रूप से भूमिगत माओवादी आंदोलन को जीवनधारा में आने का एक प्रकार से आह्वान किया गया है।

विमला

गदर की पत्नी विमला ने एक कदम आगे बढ़ते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव द्वारा सोनिया गांधी को अनाप-शनाप कहे जाने की निंदा की है। विमला का मानना और विश्वास है कि तेलंगाना के अनेक वर्ग और संगठन के आंदोलन तथा युवकों के बलिदान दिया है। इस घटनाओं से प्रभावित और दुखी होकर ही सोनिया गांधी ने तेलंगाना गठन किया है। साथ ही वह यह भी मानती है कि तेलंगाना हासिल करने में केसीआर का कोई खास योगदान नहीं है। विमला यह भी मानती है कि सोनिया को भी मालूम था कि तेलंगाना गठन से कांग्रेस को काफी नुकसान होने वाला है।

चुनाव

राहुल और गदर (फाइल फोटो)
राहुल और गदर (फाइल फोटो)

सोचने की बात है कि गदर का बेटा सूर्य किरण कांग्रेस पार्टी के नेता है। मगर गदर कांग्रेस में शामिल होने के राहुल गांधी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। गदर कह रहे है कि वह तब ही केसीआर के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे, जब सभी पार्टियां उनका समर्थन करेंगे।

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