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दिवाली विशेष: जानिए क्या है राजस्थान की प्राचीन एवं समृद्ध सांस्कृतिक लोककला  मांडणा?
तेलंगाना

दिवाली विशेष: जानिए क्या है राजस्थान की प्राचीन एवं समृद्ध सांस्कृतिक लोककला मांडणा?

मांडणा चित्रकारी राजस्थान की एक प्राचीन लोककला है। हमारी भारतीय संस्कृति मूल रूप से पर्व प्रधान लोक संस्कृति है। यहां प्रत्येक राज्य की अपनी-अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराएं हैं। हमारी संस्कृति मूलतः ग्राम्य जीवन से जुड़ी हुई है।

Dhanteras 2019: बदलना है भाग्य तो धनतेरस पर करें ये खास उपाय, जानें अगले साल की आर्थिक स्थिति  
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Dhanteras 2019: बदलना है भाग्य तो धनतेरस पर करें ये खास उपाय, जानें अगले साल की आर्थिक स्थिति  

धनतेरस वाले दिन खरीदारी करना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे साल भर आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। इन सबके बावजूद भी कोई साल ऐसा होता है कि आप पूरे साल खराब आर्थिक स्थिति से परेशान रहते हैं।ऐसे में अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका आने वाला साल आर्थिक रूप से कैसा रहेगा तो यह खास उपाय करके जान जाइये ...इस टोटके या उपाय की खास बात यही है कि यह धनतेरस पर ही किया जाता है और आपको यह आने वाले साल की आपकी आर्थिक स्थिति के बारे में बता देता है।

Dhanteras 2019: जानें आखिर धनतेरस पर क्यों खरीदी जाती है झाड़ू, कैसे शुरू हुई ये परंपरा  
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Dhanteras 2019: जानें आखिर धनतेरस पर क्यों खरीदी जाती है झाड़ू, कैसे शुरू हुई ये परंपरा  

कहते हैं कि धनतेरस पर खरीदी गई वस्तु जल्दी खराब नहीं होती बल्कि उसमें तेरह गुना वृद्धि हो जाती है। यही कारण है कि लोग इस दिन जमकर खरीदी करते हैं। खासकर धनतेरस पर सोना, चांदी, भूमि, वाहन और बर्तन इत्यादि चीजों की खरीदारी की जाती है।इन सबके अलावा इस दिन झाड़ू खरीदने का बड़ा महत्व है। देखा जाए तो यह एक अनोखी परंपरा ही है जो प्राचीनकाल से ही चली आ रही है।जो लोग सोना, चांदी नहीं खरीद सकते वे धनतेरस पर एक नई झाड़ू जरूर खरीदते हैं वहीं जो लोग बाकी की चीजें खरीदते हैं वे भी झाड़ू खरीदते हैं। इसीलिए धनतेरस के दिन हर घर में एक नई झाड़ू जरूर मिल जाती है।

दिवाली से पहले बन रहा है पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग, करेंगे ये उपाय तो हो जाएंगे मालामाल 
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दिवाली से पहले बन रहा है पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग, करेंगे ये उपाय तो हो जाएंगे मालामाल 

खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र को शुभ माना जाता है। पुष्य नक्षत्र में खरीदारी का भी बड़ा महत्व होता है। कहते हैं कि पुष्य नक्षत्र में कुछ भी खरीदने से उसमें बढ़ोतरी होती है।सोमवार 21 अक्टूबर को अहोई अष्टमी है और इसी दिन बन रहा है पुष्य नक्षत्र का संयोग। इसे सोम पुष्य नक्षत्र कहा जाता है। इस बार पुष्य नक्षत्र 21 अक्टूबर की शाम 5.30 से लेकर 22 अक्टूबर की शाम 4.40 तक रहेगा। तो सोम पुष्य और भौम पुष्य दोनों का संयोग इस बार बन रहा है जिसका लाभ उठाया जा सकता है।

Dhanteras 2019: इस दिन होती है मां लक्ष्मी के साथ कुबेर की पूजा, जानें आखिर दोनों में क्या है अंतर  
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Dhanteras 2019: इस दिन होती है मां लक्ष्मी के साथ कुबेर की पूजा, जानें आखिर दोनों में क्या है अंतर  

दिवाली के पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। धनतेरस पर धन की देवी मां लक्ष्मी के साथ धन के देवता कुबेर की पूजा भी की जाती है।वहीं कम लोग ही जानते हैं कि माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर अलग-अलग धन के देवता है और दोनों में काफी अंतर भी है। इस साल 25 अक्टूबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा।

अगर आप भी कर रही हैं अहोई अष्टमी व्रत तो ध्यान दें इन बातों पर, न करें ये गलतियां 
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अगर आप भी कर रही हैं अहोई अष्टमी व्रत तो ध्यान दें इन बातों पर, न करें ये गलतियां 

कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को संतान की खुशहाली व दीर्घायु के लिए पुत्रवती महिलाएं अहोई अष्टमी का व्रत करती है। इस दिन शाम को अहोई माता जिसे मां पार्वती का रूप भी माना जाता है, की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है।माना जाता है कि मां के इस व्रत को करने से संतान का हर कष्ट दूर हो जाता है, उसे सारे संकट से माता अहोई बचाती है, उसकी रक्षा करती है।कहते हैं कि अहोई अष्टमी के व्रत व पूजा में किसी तरह की कोई गलती नहीं होनी चाहिए वरना पूजा व व्रत का पूरा फल नहीं मिलता साथ ही अहोई माता की नाराजगी भी झेलनी पड़ सकती है।

यहां स्थित है पुष्य नक्षत्र का अद्भुत मंदिर, होती है शनिदेव व शिवजी की पूजा
यात्रा

यहां स्थित है पुष्य नक्षत्र का अद्भुत मंदिर, होती है शनिदेव व शिवजी की पूजा

पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं। इसलिए ये मंदिर भगवान शनि के पैर टूटने की घटना से जुड़ा हुआ है। पुष्य नक्षत्र के संयोग पर ही यहां भगवान शिव ने शनिदेव को दर्शन दिए थे। इसलिए पुष्य नक्षत्र में पैदा हुए लोग इस मंदिर में दर्शन और नक्षत्र शांति के लिए आते हैं।शनि की साढ़ेसाती में पैदा हुए लोग भी पुष्य नक्षत्र के संयोग में यहां पूजा और विशेष अनुष्ठान करवाते हैं।

NIFT 2019 : फैशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करना चाहते हैं जॉब तो न छोड़ें यह मौका
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NIFT 2019 : फैशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करना चाहते हैं जॉब तो न छोड़ें यह मौका

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) में अगर आप नौकरी करना चाहते हैं तो यह आपके लिए सुनहरा अवसर है। निफ्ट ने इंजीनियर, कंप्यूटर इंजीनियर और अन्य पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। इच्छुक उम्मीदवार 29 अक्टूबर से पहले ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

Dhanteras 2019: भूलकर भी धनतेरस को न करें ये गलतियां, मां लक्ष्मी हो जाएंगी नाराज 
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Dhanteras 2019: भूलकर भी धनतेरस को न करें ये गलतियां, मां लक्ष्मी हो जाएंगी नाराज 

धनतेरस की शाम परिवार की मंगलकामना के लिए यम के नाम का दीपक जलाया जाता है। प्रार्थना की जाती है कि परिवार में सुख-सौभाग्य की वृद्धि हो।कहते हैं कि धनतेरस की पूजा में कई बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई गलती न हो जाए।कुछ गलतियां तो ऐसी है जिनके होने से मां लक्ष्मी को क्रोध आता है और वे नाराज भी हो जाती है। तो सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि आखिर धनतेरस के दिन क्या कुछ नहीं करना चाहिए।

अहोई अष्टमी व्रत: संतान की दीर्घायु के लिए किया जाता है यह व्रत, जानें पूजा विधि व मुहूर्त  
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अहोई अष्टमी व्रत: संतान की दीर्घायु के लिए किया जाता है यह व्रत, जानें पूजा विधि व मुहूर्त  

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। यह व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद किया जाता है। मां अपनी संतान के लिए यह व्रत रखती है।इस साल 21 अक्टूबर सोमवार को यह व्रत रखा जाएगा। यह व्रत पुत्रवती महिलाएं रखती हैं और इस दिन पूरे विधि-विधान से अहोई माता की पूजा करती हैं और अपनी संतान की खुशहाली व दीर्घायु के लिए प्रार्थना भी करती है।कहते हैं कि मां के व्रत करने से अहोई माता प्रसन्न होकर संतान के सारे कष्ट दूर करती है साथ ही संकट से रक्षा भी करती है।

अहोई अष्टमी पर व्रत करने के साथ ही सुनें यह कथा, मिलेगा मनोवांछित फल 
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अहोई अष्टमी पर व्रत करने के साथ ही सुनें यह कथा, मिलेगा मनोवांछित फल 

अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है। यह व्रत जहां पुत्रवती महिलाएं अपनी संतान की खुशहाली के लिए रखती है वहीं संतानहीन महिलाएं संतानप्राप्ति के लिए रखती है।अहोई अष्टमी के दिन शाम को पूरे विधि-विधान से माता अहोई की पूजा की जाती है। पूजा के बाद अहोई अष्टमी व्रत कथा सुनी जाती है।

Diwali 2019 : विशेष योग में मनेगी दिवाली, सुबह निखरेगा रूप और रात में होगी लक्ष्मी पूजा
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Diwali 2019 : विशेष योग में मनेगी दिवाली, सुबह निखरेगा रूप और रात में होगी लक्ष्मी पूजा

ज्योतिषियों के अनुसार देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए रात का समय ही श्रेष्ठ रहता है। इस वजह से अधिकतर लोग देर रात लक्ष्मी पूजन करते हैं। इस संबंध में मान्यता है कि जो लोग दिवाली की रात जागकर लक्ष्मी पूजा करते हैं, उनके घर में देवी लक्ष्मी का आगमन होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।27 अक्टूबर को सुबह उदयाकाल में चतुर्दशी होने से रूप चतुर्दशी पर अभ्यंग स्‍नान से सौंदर्य निखारा जाएगा जबकि शाम को प्रदोषकाल में कार्तिक अमावस्या होने से महालक्ष्मी पूजन भी इसी दिन होगा।

खास होती है चारमीनार स्थित भाग्यलक्ष्मी मंदिर की दिवाली, भक्तों में बंटता है मां का खजाना   
यात्रा

खास होती है चारमीनार स्थित भाग्यलक्ष्मी मंदिर की दिवाली, भक्तों में बंटता है मां का खजाना   

भाग्यलक्ष्मी मंदिर ऐतिहासिक स्मारक चारमीनार से बिलकुल सटा हुआ है और जो पर्यटक चारमीनार देखने आते हैं वे तो मां लक्ष्मी के दर्शन करते ही हैं साथ ही अन्य भक्तों का तांता भी लगा रहता है।भाग्यलक्ष्मी मंदिर में नवरात्रि की धूम तो रहती ही है साथ ही हर शुक्रवार को भी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-महाआरती भी होती है। ऐसे भक्त भी है जो हर शुक्रवार को मां के दर्शन के लिए आते हैं।दिवाली तो त्योहार ही मां लक्ष्मी का है तो इसके लिए तो भाग्यलक्ष्मी मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। दिवाली महा-महोत्सव यहां बड़े जोर-शोर से मनाया जाता है।

पुष्य नक्षत्र में क्यों की जाती है खरीदारी, जानें कब बन रहा है इसका संयोग व महत्व  
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पुष्य नक्षत्र में क्यों की जाती है खरीदारी, जानें कब बन रहा है इसका संयोग व महत्व  

सत्ताइस नक्षत्रों में पुष्य आठवां नक्षत्र है। इस नक्षत्र के उदय होने पर ज्योतिषी शुभ कार्य करने की सलाह देते हैं। सभी नक्षत्रों में इसे सबसे अच्छा माना जाता है।पुष्य नक्षत्र के दौरान चंद्रमा कर्क राशि में स्थित होता है। बारह राशियों में एकमात्र कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसके अलावा चंद्रमा अन्य किसी राशि का स्वामी नहीं है।चंद्रमा धन का देवता है। इसलिए पुष्य नक्षत्र को धन के लिए अत्यन्त पवित्र माना जाता है। इसलिए सोना, चांदी और नए सामानों की खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र को सबसे पवित्र माना जाता है।

Dhanteras 2019 : धनतेरस पर इन सामानों का खरीदना माना जाता है अशुभ, भूलकर न करें यह गलती
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Dhanteras 2019 : धनतेरस पर इन सामानों का खरीदना माना जाता है अशुभ, भूलकर न करें यह गलती

मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदारी से घर में समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है, लेकिन कोई भी सामान खरीदने से पहले यह जरूर ध्यान दें कि यह आपके लिए शुभ है या नहीं, या फिर इन वस्तुओं को घर लाना चाहिए या नहीं। हम आपको बताते हैं कि इस धनतेरस भूलकर भी यह सामान घर न लाएं।

स्कंदषष्ठी पर यूं करें भगवान स्कंद की पूजा, सफलता के साथ संतानसुख की होगी प्राप्ति
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स्कंदषष्ठी पर यूं करें भगवान स्कंद की पूजा, सफलता के साथ संतानसुख की होगी प्राप्ति

कुछ लोग आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मानते हैं और ‘तिथितत्त्व’ में चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी को ‘स्कंद षष्ठी’ कहा है, लेकिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की षष्ठी को भी ‘स्कंद षष्ठी व्रत’ के नाम से जाना जाता है।यह व्रत ‘संतान षष्ठी’ नाम से भी जाना जाता है। स्कंदपुराण के नारद-नारायण संवाद में इस व्रत की महिमा का वर्णन मिलता है।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा पी जाती है शराब, महिलाएं भी नहीं है पीछे
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इन राज्यों में सबसे ज्यादा पी जाती है शराब, महिलाएं भी नहीं है पीछे

भारत में शराब का सेवन करने वालों की तादाद लगातार इजाफा हो रहा है। एक सर्वे के मुताबिक देश में शराब पीने वालों की तादाद लगभग 16 करोड़ है। सर्वे की रिपोर्ट साल 2019 के शुरुआती महीने में सामने आई थी जिसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने साथ मिलकर किया था।

Kartarpur Corridor : क्या है करतारपुर का इतिहास, जानिए उससे जुड़ी अहम बातें
राष्ट्रीय

Kartarpur Corridor : क्या है करतारपुर का इतिहास, जानिए उससे जुड़ी अहम बातें

करतारपुर साहिब के बारे में पहली बार साल 1998 में भारत ने पाकिस्तान से बातचीत की थी और उसके 20 साल बाद ये मुद्दा फिर गर्म है। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त यह गुरुद्वारा पाकिस्तान में चला गया था। तभी से हिंदुस्तान से जाने वाले भक्तों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

तुला संक्रांति 2019 : आज करें यह काम, सूर्यदेव की बरसेगी कृपा
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तुला संक्रांति 2019 : आज करें यह काम, सूर्यदेव की बरसेगी कृपा

हिंदू संस्कृति में संक्रांति पर्व का बड़ा महत्व है। इस दिन स्नान, दान करने से आपकी राशि पर पड़ने वाला प्रतिकूल प्रभाव खत्म हो जाता है। आज (18 अक्टूबर) तुला संक्रांति है। एक माह तक सूर्य तुला राशि में रहकर अन्य राशियों पर नजर रखेंगे।

VIDEO: वीरप्पन का ऐसे हुआ था अंत, आतंक की कहानी सुन सिहर जाएंगे आप
समाचार

VIDEO: वीरप्पन का ऐसे हुआ था अंत, आतंक की कहानी सुन सिहर जाएंगे आप

कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन के नाम से कौन अनजान हो सकता है। 18 अक्टूबर 2004 को उसे तमिलनाडू एसटीएफ ने गोलियों से भून दिया था। जानिए वीरप्पन की अनसुनी कहानी।

एक गांव ऐसा जहां महिलाएं नहीं रखतीं करवा चौथ का व्रत, वजह जान हो जाएंगे हैरान
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एक गांव ऐसा जहां महिलाएं नहीं रखतीं करवा चौथ का व्रत, वजह जान हो जाएंगे हैरान

जहां आज के दिन करवा चौथ के अवसर पर सभी विवाहित महिलाएं पूरे दिन व्रत रहकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं, वहीं एक ऐसा गांव है  जहां महिलाएं इस दिन व्रत रखने से परहेज करती हैं

स्मिता पाटिल की आखिरी ख्वाहिश, मरने के बाद.... 
बॉलीवुड

स्मिता पाटिल की आखिरी ख्वाहिश, मरने के बाद.... 

1974 में मनोरंजन की दुनिया में एट्री कर चुकी स्मिता पाटिल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी दमदार एक्टिंग के कारण उन्हें हिन्दी के अलावा मराठी फिल्मों में भी मौके मिलने लगे और बहुत कम समय में स्मिता पाटिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने कलाकारों में शामिल हो गईं।

करवा चौथ पर इन मंत्रों का करें जाप और पाएं पूजा का शुभ फल   
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करवा चौथ पर इन मंत्रों का करें जाप और पाएं पूजा का शुभ फल   

करवा चौथ का त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।दिन भर निर्जला व्रत रखकर शाम के समय महिलाएं करवा पूजा करती हैं, कथा सुनती हैं। गौरा से सुहाग लेकर तथा उगते चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने सुहाग की अटलता की कामना करती हैं।करवा पूजा के समय सुहागिन महिलाएं इन मंत्रों का जाप करेंगी तो अवश्य ही उन्हें सौभाग्य की प्राप्ति होगी क्योंकि इस दिन इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

करवा चौथ पर किये जाते हैं चौथ माता के दर्शन, इस मंदिर में लगता है सुहागिनों का मेला  
यात्रा

करवा चौथ पर किये जाते हैं चौथ माता के दर्शन, इस मंदिर में लगता है सुहागिनों का मेला  

करवा चौथ का पर्व आ गया है जिसका इंतजार सुहागिन महिलाएं बेसब्री से करती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए दिन भर निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ की शाम में चौथ माता और गणेशजी की पूजा करती हैं और फिर रात में चंद्रमा के दर्शन करके, अर्घ्य देकर पति के हाथों पानी पीकर व्रत तोड़ा जाता है।करवा चौथ के व्रत में चौथ माता की पूजा का विशेष महत्व है। चौथ माता भगवान शिव की पत्नी पार्वती का ही रूप है जिसकी इस दिन पूजा की जाती है।जब बात चौथ माता की पूजा का आता है तो जाहिर है कि इस दिन चौथ माता के मंदिर में दर्शन करने का भी विशेष महत्व होता है। यही वह दिन होता है जब चौथ माता के मंदिर में सुहागिनों का मेला सा लग जाता है और हर महिला चाहती है कि वह चौथ माता के दर्शन करके धन्य हो जाए।

करवा चौथ पर चाहती हैं मेंहदी का गहरा रंग तो अपनाएं ये खास टिप्स 
Fashion

करवा चौथ पर चाहती हैं मेंहदी का गहरा रंग तो अपनाएं ये खास टिप्स 

करवा चौथ के त्योहार पर जितना महत्व व्रत का होता है उतना ही महिलाओं के श्रृंगार का भी होता है। इस दिन महिलाएं पूरे सोलह श्रृंगार करके बिलकुल नई दुल्हन की तरह सजती-संवरती है। सोलह श्रृंगार की बात हो और मेंहदी न रचे यह तो हो ही नहीं सकता।वहीं यह भी कहते हैं कि मेंहदी का रंग जितना गहरा होता है पति उतना ही ज्यादा प्यार करने वाला होता है। तो महिलाएं मेंहदी तो हाथों व पैरों में सजाती ही हैं साथ ही यह भी चाहती है कि उसका रंग गहरा हो।अब आप सोच रही होंगी कि डिजाइन तो हर जगह मिल जाएंगे जिसे देखकर आप भी अपने हाथों में मेंहदी लगा लेंगी पर रंग गहरा कैसे आए।

करवा चौथ 2019 : जानें क्या होता है करवा, क्यों और किसके हाथों ली जाती है सरगी   
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करवा चौथ 2019 : जानें क्या होता है करवा, क्यों और किसके हाथों ली जाती है सरगी   

सबसे पहले तो आप ये जान लें कि करवा एक मिट्टी का बर्तन होता है। काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी की वस्तु को करवा कहते हैं।कुछ लोग तांबे के बने करवे लाते हैं। इस तरह दो करवे बनाए जाते हैं। करवा में रक्षासूत्र बांधकर, हल्दी और आटे के सम्मिश्रण से एक स्वस्तिक बनाते हैं।एक करवे में जल तथा दूसरे करवे में दूध भरते हैं और इसमें ताम्बे या चांदी का सिक्का डालते हैं। जब बहू व्रत शुरू करती है तो सास उसे करवा देती है, उसी तरह बहू भी सास को करवा देती है।

करवा चौथ पर यूं राशि अनुसार पहनें कपड़े और पाएं पूजा का शुभ फल  
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करवा चौथ पर यूं राशि अनुसार पहनें कपड़े और पाएं पूजा का शुभ फल  

करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, शाम को पूजा करती है, रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देती हैं, पूजा करती है और फिर पति के दर्शन करके उनके हाथों से व्रत खोलती है।यह तो हुई पूजा की बात पर पूजा के लिए महिलाएं तैयार भी खास तरह से होती है, पूरे सोलह श्रृंगार करती हैं, खास साड़ी व लहंगा पहनती हैं, मेंहदी रचाती है, सब कुछ तरीके से करके ही पूजा करती है। इस बार करवा चौथ 17 अक्टूबर गुरुवार को है। कहते हैं कि अगर करवा चौथ पर राशिनुसार तैयार हुआ जाए, राशिनुसार कपड़ों का चुनाव किया जाए तो शुभ रहता है।

इन चीजों के बगैर अधूरा रह जाता है करवा चौथ का व्रत, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें  
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इन चीजों के बगैर अधूरा रह जाता है करवा चौथ का व्रत, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें  

करवा चौथ सुहागिनों का वह त्योहार है जिसका वे बेसब्री से इंतजार करती है और फिर इस दिन पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस साल करवा चौथ का व्रत 17 अक्टूबर गुरुवार को रखा जाएगा।इस दिन जहां सुहागिन महिलाएं पति के लिए व्रत रखती है वहीं कुंवारी लड़कियां मनचाहे वर के लिए यह व्रत रखती हैं। जहां सुहागिन इस व्रत में चंद्रमा की पूजा करती है तो वहीं, कुंवारी लड़कियां तारों को पूजती हैं।कभी-कभी महिलाएं व्रत रखकर भी ऐसी गलतियां अनजाने में कर देती हैं जिससे उनका व्रत फलित नहीं होता।

जानें कैसे शुरू हुआ था करवा चौथ, किसने रखा था पहली बार यह व्रत  
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जानें कैसे शुरू हुआ था करवा चौथ, किसने रखा था पहली बार यह व्रत  

करक चतुर्थी यानी करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती है। इस दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथों व्रत खोला जाता है।यह तो सब जानते ही हैं पर यहां सहज ही यह सवाल उठता है कि आखिर करवा चौथ के व्रत की शुरुआत कैसे हुई ....

अखंड सौभाग्य प्राप्ति के लिए किया जाता है करवा चौथ का व्रत, जानें पूजा विधि, मुहूर्त व कथा   
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अखंड सौभाग्य प्राप्ति के लिए किया जाता है करवा चौथ का व्रत, जानें पूजा विधि, मुहूर्त व कथा   

सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा त्योहार है करवा चौथ। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। शाम में पूरे विधि-विधान से करवा माता की पूजा की जाती हैं, रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।इस बार करवा चौथ का व्रत 17 अक्टूबर गुरुवार को है। इस दिन कुछ जगहों पर सुबह-सवेरे जागकर सरगी खाई जाती है वहीं अन्य जगहों पर सरगी खाए बगैर ही व्रत रखा जाता है।करवा चौथ की पूजा शाम को की जाती है और इसमें मुहूर्त का खासतौर पर ध्यान रखा जाता है जिससे कि पूजा का पूरा फल मिल सके। वहीं पूजा विधि पर भी ध्यान दिया जाता है ताकि किसी तरह की कोई त्रुटी न रह जाए।

करवा चौथ 2019: इस निर्जला व्रत में ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल, अपनाएं ये खास टिप्स 
सेहत

करवा चौथ 2019: इस निर्जला व्रत में ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल, अपनाएं ये खास टिप्स 

करवा चौथ के त्योहार का इंतजार सुहागिन महिलाओं को बहुत पहले से रहता है। इसकी तैयारी वे काफी पहले से शुरू कर देती है। नए कपड़े, ज्वैलरी वे पहले ही खरीद लेती हैं और इस दिन बिलकुल नई दुल्हन की तरह तैयार होकर पूजा करने का सपना भी देखती है।वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो सुहागिन महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं अपने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए और रात में चांद देखने के बाद पति के हाथों पानी पीकर ही व्रत खोलती हैं तो अगर कहीं उनसे कोई चूक हो जाए तो सेहत खराब होने का डर रहता है और इससे वे इस त्योहार को ढंग से सेलिब्रेट भी नहीं कर पाती।

 पंडित भीमसेन को इस वजह से लगी थी शराब की लत, आधी रात करते थे लताजी को फोन  
संपादक की पसंद

पंडित भीमसेन को इस वजह से लगी थी शराब की लत, आधी रात करते थे लताजी को फोन  

पंडित भीमसेन जोशी ने कई फ़िल्मों के लिए भी गाने गाए। उन्होंने ‘तानसेन’, ‘सुर संगम’, ‘बसंत बहार’ और ‘अनकही’ जैसी कई फ़िल्मों के लिए गायिकी की।

हर कष्ट को दूर करेंगे बुधवार के ये खास उपाय, बरसेगी विघ्नहर्ता की कृपा 
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हर कष्ट को दूर करेंगे बुधवार के ये खास उपाय, बरसेगी विघ्नहर्ता की कृपा 

बुधवार भगवान गणेश को बेहद प्रिय है और इस दिन उनकी पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। भगवान गणेश हमारे जीवन के सारे कष्टों को दूर करके हमें सुख-संपत्ति का वरदान देते हैं।हम जानते ही हैं कि किसी भी काम की शुरुआत में भगवान गणेश की पूजा ही की जाती है क्योंकि ऐसा करने से उस काम में किसी तरह की कोई रुकावट नहीं आती और वो ठीक से संपन्न हो जाता है।ऐसे में अगर आप किसी भी तरह की परेशानी झेल रहे हैं या किसी घाटे से उबर नहीं पा रहे हैं तो बुधवार के दिन कुछ खास उपाय करके आप भी संकट से उबर सकते हैं।

इन 4 राशि के पुरुषों पर जान छिड़कती हैं महिलाएं 
समाचार

इन 4 राशि के पुरुषों पर जान छिड़कती हैं महिलाएं 

ज्योतिष शास्त्र में लोग अपनी लव लाइफ के बारे में दिलचस्पी के साथ सवाल पूछते हैं। हम यहां उन चार राशियों के बारे में बता रहे हैं। जिनके प्रति महिलाओं का खास आकर्षण होता है। 

नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने तिहाड़ जेल में काटे थे 10 दिन
समाचार

नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने तिहाड़ जेल में काटे थे 10 दिन

भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी को इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिलेगा। उनके जीवन के अहम पहलू के बारे में हम यहां बता रहे हैं।

अब्दुल कलाम के यह संदेश पढ़कर बदल सकती है आपकी जिंदगी
संपादक की पसंद

अब्दुल कलाम के यह संदेश पढ़कर बदल सकती है आपकी जिंदगी

देश के पूर्व राष्ट्रपति एवं ‘मिसाइल मैन’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जिंदगी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खुली आंखों से सपने देखते हैं। अब्दुल कलाम की आज जयंती है, इस मौके पर जानते हैं उनकी वो प्रेरणादायी बातें जिसे पढ़कर आप के अंदर एक नई ऊर्जा पैदा होगी। 

कार्तिक माह में तुलसी पूजा का है विशेष महत्व, इन उपायों से दूर होंगे सारे कष्ट  
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कार्तिक माह में तुलसी पूजा का है विशेष महत्व, इन उपायों से दूर होंगे सारे कष्ट  

कार्तिक माह आरंभ हो चुका है और इस महीने में व्रत, पूजा, स्नान, दान के साथ ही तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व है। वैसे तो हमारे घर में हर दिन तुलसी पूजा होती है पर कार्तिक माह में तुलसी पूजा से कई तरह के लाभ होते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी माह में शालीग्राम और माता तुलसी का विवाह भी संपन्न होता है। माना जाता है कि कार्तिक माह में तुलसी पूजन से जीवन में कई तरह के सकारात्मक बदलाव आते हैं।द्वापर युग में श्रीकृष्ण भगवान को पाने के लिए गोपिकाएं कार्तिक मास में यमुना स्नान करने के साथ तुलसी की पूजा करती थीं।यही वजह है कि आज भी कुंवारी कन्याएं मनवांछित फल पाने एवं वर पाने के लिए सुबह स्नान कर तुलसी पूजा कर इस परंपरा को निभाती हैं।

वक्त के साथ बदल रहा है करवा चौथ का ट्रेंड, जानने के लिए पढ़ें लेख
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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ के रूप में मनाए जाने की परम्परा एक लम्बे समय से चली आ रही है। यह व्रत सुहागन स्त्रियों के जीवन में खास महत्व रखता है। महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।

कर रहे हैं दिवाली की सफाई तो इन चीजों को करें घर से बाहर, तभी मां लक्ष्मी करेंगी गृह प्रवेश  
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कार्तिक माह के साथ ही दिवाली की साफ-सफाई व रंग-रोगन शुरू हो जाता है। दिवाली के त्योहार पर स्वच्छता का बड़ा महत्व है और माना जाता है कि मां लक्ष्मी उसी घर में प्रवेश करती है जो साफ-सुथरा होता है। इसीलिए हर कोई सुख-समृद्धि की कामना से अपने पूरे घर की साफ-सफाई दिवाली पर जरूर करता है।वहीं ऐसा भी माना जाता है कि मां लक्ष्मी का वास उन घरों में नहीं होता है जहां पर गंदगी और अशुभ चीजें होती है। इसीलिए साल में एक बार हर कोई घर की बेकार चीजों को भी घर से निकालते हैं। किसी भी तरह का कबाड़ दिवाली के पहले ही निकालकर घर से बाहर कर दिया जाता है।

शुरू हो रहा है कार्तिक मास, जानें स्नान-दान का महत्व व इस माह के आवश्यक नियम 
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कार्तिक महीने में स्नान, दान व पूजा-पाठ का भी महत्व है। इस महीने सुबह-सवेरे ब्रह्म मुहूर्त में उठकर आसमान में तारों के रहते यानी सूर्योदय से पहले ही स्नान किया जाता है और इसे कार्तिक स्नान कहा जाता है।स्नान कर पूजा-पाठ को खास अहमियत दी जाती है। विशेषकर इस महीने में तुलसी की पूजा की जाती है, परिक्रमा की जाती है, साथ ही देश की पवित्र नदियों में स्नान का खास महत्व होता है।इस महीने में दान करना भी लाभकारी होता है। दीपदान का भी खास विधान है। यह दीपदान मंदिरों, नदियों के अलावा आकाश में भी किया जाता है। यही नहीं ब्राह्मण भोज, गाय दान, तुलसी दान, आंवला दान तथा अन्न दान का भी महत्व होता है।