भोजपुर: बिहार के चर्चित आरा बम धमाका मामले में मुख्य आरोपी लंबू शर्मा को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही बाकी सात दोषियों को उम्र कैद की सजा दी गई है।

इससे पहले जदयू के पूर्व विधायक सुनीव पांडेय को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। इस मामले में कुल तीन लोगों को बरी किया गया है जिन पर पुलिस ने शक जाहिर किया था।

कब हुआ था बम धमाका

23 जनवरी 2015 को आरा कोर्ट परिसर में बम ब्‍लास्‍ट से पूरे बिहार में सनसनी फैल गई थी। इस धमाके में एक महिला की मौत हो गई थी जबकि तीन अन्य लोग घायल हुए थे। पूर्व विधायक सुनील पांडेय को इस मामले में अभियुक्त बनाते हुए पुलिस ने उन्हें 11 जुलाई 2015 को गिरफ्तार किया था। हालांकि बाद में पांडेय को जमानत मिल गई थी।

मामले में कुख्‍यात अपराधी लंबू शर्मा, नईम‌ मिस्त्री तथा अखिलेश उपाध्याय समेत आठ आरोपियों को सजा दी गई है। इनपर साजिश रचने, बम विस्फोट‌ करने, हत्या करने तथा कस्टडी से फरार होने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं। अभी भी एक अभियुक्त चांद मियां फरार बताया जाता है।

कोर्ट ने भोजपुर के जिलाधिकारी को जल्द से जल्द अभियुक्त चांद मियां को गिरफ्तार कर कोर्ट में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। साथ ही चांद मियां की कुर्की जब्ती का भी आदेश दिया गया है।

कौन है लंबू शर्मा

बिहार का नामी बदमाश और अब फांसी की सजा पाए लंबू शर्मा का जरायम का इतिहास पुराना है। आप हैरान रह जाएंगे कि महज 12 साल की उम्र में लंबू शर्मा ने पहली हत्या की थी।

कहते हैं बचपन में लंबू शर्मा एक लड़की से प्यार करता था। जबकि वो लड़की उसकी बजाय किसी और को दिल दे बैठी थी। इससे ताव खाए लंबू शर्मा ने लड़की के प्रेमी की हत्या कर दी थी। इसके बाद लंबू शर्मा को कई सालों तक जुवेनाइल जेल में रहना पड़ा था।

कहते हैं महज 12 साल की उम्र में जेल की हवा खाने के बाद लंबू शर्मा पक्का अपराधी बन गया। जेल में ही उसकी दोस्ती भारत सक्सेना जैसे अपराधी और कई नक्सलियों से हुई। जिनसे लंबू ने बम बनाना सीखा। आरा बम धमाके के दौरान ही लंबू शर्मा और अखिलेश शर्मा फरार हुए थे। जिस महिला की मौत हुई थी, बम उसी के हाथ में बताया गया।