नई दिल्ली : फरीदाबाद में डीसीपी रहे विक्रमजीत सिंह कपूर आत्महत्या मामले में अरेस्ट एसएचओ इंस्पेक्टर अब्दुल शाहिद ने धीरे-धीरे मुंह खोलना शुरू कर दिया है। इंस्पेक्टर ने यह भी कबूल लिया है कि वह एक आपराधिक मामले फंसे अपने भांजे का नाम हटवाने के चक्कर में खुद ही फंस गया। चार दिन पहले तक हरियाणा पुलिस में आतंक का दूसरा नाम रहे और फिलहाल पुलिस हिरासत में चल रहे आरोपी इंस्पेक्टर ने डीसीपी को ब्लैकमेल करने के बाबत कुछ सनसनीखेज खुलासे किए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, अपनी ही पुलिस के जाल में बुरी तरह फंस चुके इंस्पेक्टर अब्दुल शाहिद ने हिरासत में पूछताछ के दौरान माना है कि उसके भांजे के खिलाफ मुजेसर थाने में हत्या की कोशिश का मामला दर्ज था।

आरोपी ने अपने भांजे को बचाने के लिए डीसीपी विक्रमजीत सिंह कपूर से गुजारिश की थी। कपूर ने जब मदद नहीं की तो अब्दुल उनसे चिढ़ गया। उसने कपूर की घेराबंदी करके उन्हें कमजोर कर जाल में फंसाने का षड्यंत्र रचा। इस षड्यंत्र में शातिर दिमाग और अब भूपानी थाने (नहरपार फरीदाबाद) के निलंबित इंस्पेक्टर अब्दुल शाहिद ने अपनी एक पूर्व परिचित महिला और एक तथाकथित पत्रकार को साजिश में शामिल कर लिया।

साजिशन, महिला के जरिये डीसीपी के कई आपत्तिजनक ऑडियो-वीडियो तैयार करवाए गए। उसके बाद कथित ब्लैकमेलर पत्रकार के जरिये डीसीपी कपूर को धमकी दिलवाई गई कि अगर उसने अब्दुल के भांजे को आपराधिक मामले से नहीं बचाया तो इसका गंभीर परिणाम भुगतना होगा। इस मामले में जिस पत्रकार का नाम सामने आया है, वह फरीदाबाद से ही एक हिंदी साप्ताहिक अखबार निकालता है। कई साल पहले इस तथाकथित ब्लैकमेलर पत्रकार को पुलिस ने हत्या के एक मामले में गिरफ्तार भी किया था।

फरीदाबाद पुलिस मुख्यालय प्रवक्ता सूबे सिंह ने इन तथ्यों की पुष्टि करते हुए आईएएनएस से बातचीत में कहा कि आरोपी इंस्पेक्टर की महिला मित्र के पिता ने भी जमीन विवाद से जुड़े एक मामले की शिकायत पुलिस में कर रखी थी, जिसका सीमाक्षेत्र डीसीपी कपूर के अधिकार क्षेत्र में आता था। लिहाजा, शातिर दिमाग एसएचओ ने महिला मित्र की कमजोर नस का नाजायज फायदा उठाकर लगे हाथ महिला मित्र का भी इस्तेमाल कर लिया। पुलिस को इंस्पेक्टर की इस महिला मित्र के बारे में तमाम जानकारियां मिल चुकी हैं। ब्लैकमेलिंग में शामिल इंस्पेक्टर का कथित पत्रकार दोस्त फरार है।

डीसीपी कपूर ने 14 अगस्त की सुबह करीब 5 से 6 बजे के बीच फरीदाबाद पुलिस लाइन में स्थित अपने सरकारी बंगले पर खुद को गोली मारकर जान दे दी थी। दिल दहला देने वाली घटना के पीछे के किरदारों में एसएचओ, उसकी महिला मित्र और तथाकथित ब्लैकमेलर कोई पत्रकार शामिल है..इसका खुलासा डीसीपी के सुसाइड नोट और उनके परिजनों से मिली जानकारी के बाद हुआ।

पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर 14 अगस्त को ही एसएचओ अब्दुल शाहिद को निलंबित कर उसे हिरासत में ले लिया था। एक दिन की पूछताछ के बाद उसे 15 अगस्त को गिरफ्तार कर अगले दिन 16 अगस्त को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने आरोपी इंस्पेक्टर को चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है।