लखनऊ / बुलंदशहर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गोकशी की वारदात के बाद पुलिस अधिकारी की शहादत और युवक की मौत के बाद हालात बिगड़ने की आशंका है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक लोगों में काफी गुस्सा है और ये मामला सियासी रंग ले सकता है।

अगर बुलंदशहर में हिंसा शुरू होती है तो इसकी लपटें मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर और बागपत समेत कई जनपदों तक पहुंच सकती है। सूत्रों के मुताबिक इलाके में कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की फिराक में थे। सोची समझी साजिश के तहत गोकशी के तहत इलाके में हत्या की घटना को अंजाम दिया गया।

यह भी पढ़ें:

बुलंदशहर हिंसा: शहीद पुलिस अफसर के परिजन को 50 लाख रुपये व सरकारी नौकरी देने का ऐलान

2019 लोकसभा चुनाव से पहले वेस्ट यूपी में अगर सांप्रदायिक आग भड़कती है तो इसका सियासी असर भी लाजिमी है। फायदा उठाने वाले नेता दंगों को भड़काने में पीछे नहीं हटेंगे।

इससे पहले मेरठ में गोकशी के कारण सांप्रदायिक तनाव के हालात पैदा हो चुके हैं। लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी, सरधना, सरूरपुर, किठौर, भावनपुर,जानी, इंचौली, दौराला, खरखौदा और मुंडाली जैसे इलाके अतिसंवेदनशील माने जाते हैं।

पुलिस अधिकारी की शहादत पर पुलिसकर्मियों में हताशा

बुलंदशहर के स्याना बहादुर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की दुखद शहादत का असर पुलिस विभाग के मनोबल पर पड़ सकता है। एटा के जैतरा थाना क्षेत्र के तरगवा गांव निवासी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार बुलंदशहर के स्याना थाने में प्रभारी निरीक्षक थे। सोमवार को गढ़-बुलंदशहर स्टेट हाईवे पर चिंगरावठी चौकी पर गोकशी को लेकर भीड़ ने बवाल किया इसी दौरान इंस्पेक्टर की हत्या कर दी गई। फिलहाल पुलिस के आलाधिकारियों में हड़कंप है, जबकि निचले स्तर के पुलिसकर्मियों में इस घटना को लेकर हताशा है।

फिलहाल इंस्पेक्टर की हत्या मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही चार अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है। पुलिस ने इस मामले में दर्जनों नामजद लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

लखनऊ में भाजपा नेता की चाकू गोदकर हत्या

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता की अज्ञात हमलावरों ने चाकू गोदकर हत्या कर दी। भाजपा नेता प्रत्यूष मणि त्रिपाठी (34) पर सोमवार को बादशाहनगर में हमला किया गया।

पुलिस के मुताबिक, उन्हें किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

यह भी पढ़ें:

विवेक तिवारी हत्याकांड: मृतक की पत्नी से मिले केशव मौर्य, राज बब्बर ने मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा

आधी रात के तुरंत बाद अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थकों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया, पुलिस के विरोध में नारेबाजी की और लखनऊ पुलिस के वरिष्ठ अधीक्षक कलानिधि नैथानी की तुरंत बर्खास्तगी की मांग की।

उग्र भीड़ ने आरोप लगाया कि त्रिपाठी ने जिला पुलिस प्रमुख को बताया था कि उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने सुरक्षा की मांग की थी लेकिन उनके आग्रह पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

कुल मिलाकर चुनाव के ठीक पहले इस तरह की घटनाओं से पुलिस खासी दबाव में है।