हैदराबाद : टेस्ट क्रिकेट मैच की शुरूआत करने वाली दो टीमों में इंग्लैंड व ऑस्ट्रेलिया की टीम शामिल है। ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के नाम विश्व क्रिकेट के कई विश्व कीर्तिमान हैं। पर कुछ ऐसे शर्मनाक कीर्तिमान भी हैं, जिन्हें शायद ऑस्ट्रेलिया की टीम याद नहीं करना चाहती होगी।

आज हम ऑस्ट्रेलिया की टीम के हार के एक ऐसे रिकॉर्ड की कहानी आप के सामने रखने जा रहे हैं, जो अभी कुछ साल पहले टेस्ट मैच खेलने की शुरूआत करने वाली टीमों के नाम नहीं बल्कि इस ऑस्ट्रेलिया की टीम के नाम है।

यह रिकॉर्ड है फॉलोऑन कराने के बाद भी टेस्ट मैच हार जाने का। यह शर्मनाक काम सिर्फ ऑस्ट्रेलिया की टीम की टीम ने किया है। यह कारनामा एक दो बार नहीं बल्कि तीन बार कर दिखाया है। तीनों बार हारने वाली टीम ऑस्ट्रेलिया रही।

पहली बार

साल 1894 में इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया दौर पर थी। इस दौरान पहला टेस्ट मैच 14 दिसंबर से 20 दिसंबर के बीच खेला गया था। पहले खेलते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 586 रनों का स्कोर खड़ा खिया। इस मैच के पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया की ओर से एसई ग्रेगरी ने सर्वाधिक 201 रन और जी गिफेन ने 161 रनों का योगदान दिया । वहीं इंग्लैंड पहली पारी में 326 रन ही बना सकी। इसके बाद ऑस्ट्रेया की टीम ने फॉलोऑन खेलाने का फैसला किया। जिसके बाद इंग्लैंड की टीम ने 181.4 ओवर में 437 रन बनाये। इस तरह इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के उपर 177 रनों की बढ़त हासिल की।

दूसरी पारी में 177 रनों के जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 166 रनों पर ही सिमट गई। इस तरह इंग्लैंड 10 रनों से मैच जीत गया। दूसरी पारी में इंग्लैंड की ओर से आर पील ने 6 विकेट चटकाये।

इसके बाद दूसरी बार

साल 1981 को ऑस्ट्रियाई टीम इंग्लैंड दौरे पर थी। इस दौरे का तीसरा टेस्ट मैच लीड्स में 16 जुलाई से 21 जुलाई तक खेला गया। इस मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 401 रन बनाये। इस ऑस्ट्रेलिया की ओर से जे डायसन ने 102 रन बनाये थे। वहीं इंग्लैंड की ओर से शानदार गेंदबाजी करते हुए आईटी बॉथम ने 6 विकेट लिये।

वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया के 401 के रनों के जवाब में इंग्लैंड की पहली पारी 174 रनों पर ही ऑल आउट हो गई। इसके बाद फॉलोऑन खेलते हुए इंग्लैंड ने सभी विकेट खोकर 356 रन बनाये और ऑस्ट्रेलिया को 130 रनों का लक्ष्य दिया। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 111 रनों पर सिमट गई, और इंग्लैंड ने यह 18 रनों से जीत लिया।

फिर तीसरी बार ......

साल 2001 की बात है, ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत दौरे पर थी। 11 मार्च को शुरु हुए दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में कप्तान स्टीव वॉ के शतक की बदौलत 445 रन बनाए। अब बारी थी भारतीय बल्लेबाजों की। मगर कंगारु गेंदबाजों के सामने सभी बल्लेबाज बेबस नजर आए। वीवीएस लक्ष्मण के बेहद उपयोगी 59 रन की बदौलत भारत का पहली पारी में स्कोर 171 बना। यानी कि पहली पारी में भारत 274 रन पिछड़ गया और फॉलोआन खेलने की नौबत आ गई।

दूसरी पारी में भारत के 'द वॉल' नाम से मशहूर राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण ने ऐसी बल्लेबाजी की कि पूरा चौथा दिन गुजर गया, मगर कोई भी कंगारु गेंदबाज लक्ष्मण-द्रविड़ का विकेट नहीं गिरा सका। लक्ष्मण ने इस पारी में 281 रन बनाए जबकि द्रविड़ 180 रन बनाकर पवेलियन लौटे। भारत ने अपनी दूसरी पारी 657 रन पर घोषित कर दी।

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अब ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 384 रन की जरूरत थी। मगर पूरी कंगारू टीम दूसरी इनिंग्स में 212 रन पर ऑलआउट हो गई और भारत यह मैच 171 रन से जीत गया। इस मैच में वीवीएस लक्ष्मण को शानदार बल्लेबाजी के लिए मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया था।

वहीं हरभजन सिंह ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए रिकी पोंटिंग (पगबाधा), एडम गिलक्रिस्ट (पगबाधा) और शेन वॉर्न को सदागोपान रमेश के हाथों कैच आउट करवाकर अपनी हैट्रिक पूरी की। यह पहला ऐसा मौका था जब भारत के किसी गेंदबाज ने टेस्ट क्रिकेट मैच में हैट्रिक बनाई हो।

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इस तरह ऑस्ट्रेलिया के नाम यह बेहद ही शर्मनाक रिकॉर्ड है