लंदन : सुपर ओवर तक चले मैच में इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को हराकर विश्वविजेता बनने का गौरव हासिल किया है और अपने घर में चैम्पियन बनने वाली तीसरी टीम भी बनी है। सुपर ओवर में जीत के लिए इंग्लैंड के द्वारा न्यूजीलैंड को 16 रनों का लक्ष्य दिया गया था पर न्यूजीलैंड केवल 15 रन ही बना सकी। अंतिम गेंद पर हुए रोमांचक फैसले से इंग्लैंड पहली बार विश्वकप क्रिकेट का चैंपियन बना।

इस मैच में रोमांच अपने चरम पर था और इसका फैसला सुपर ओवर के जरिए किया गया पर यहां भी दोनों टीमों के स्कोर बराबर रहे। इसके बाद आइसीसी के नियम के मुताबिक जिस टीम ने अपनी पारी और सुपर ओवर में ज्यादा बाउंड्री लगाए थे उसे विनर करार दिया गया। इस मैच में इंग्लैंड ने पारी और सुपर ओवर में न्यूजीलैंड के मुकाबले ज्यादा बाउंड्री लगाए थे और इस आधार पर उसे विजेता घोषित कर दिया गया।

इस मैच में इंग्लैंड ने अपनी पारी में कुल 22 बाउंड्री लगाए। वहीं न्यूजीलैंड की टीम ने अपनी पारी में कुल 17 बाउंड्री लगाए। इस आधार पर इंग्लैंड की टीम को विजेता घोषित कर दिया गया। इस जीत के साथ ही इंग्लैंड ने इतिहास रचा और पहली बार क्रिकेट के जनक ने खिताब अपने नाम किया।

इसके पहले क्रिस वोक्स और लियाम प्लंकेट की घातक गेंदबाजी से इंग्लैंड ने विश्व कप फाइनल में रविवार को यहां न्यूजीलैंड द्वारा दिए गए 242 रनों के लक्ष्या का पीछा करते हुए 50 ओवर में 10 विकेट के नुकसान पर 241 रन बना लिए हैं। बेन स्टोक्स 84 रन के साथ क्रीज पर नाबाद रहे।

इसके पहले बटलर 59 रनों की शानदार पारी खेल कर आउट हो गए। इसके बाद कोई बल्लेबाज स्टोक्स का साथ नहीं दे पाया।

इससे पहले इंग्लैंड की शुरूआत उतनी अच्छी नहीं रही और सलामी बल्लेबाज जॉसन रॉय केवल 17 रन बनाकर मैट हेनरी की गेंद पर कीपर लैथम को कैच थमा गए। वहीं दूसरे ओपनर बेयरस्टो ने फर्ग्यूसन ने 36 रन के निजी स्कोर पर क्लीन बोल्ड कर दिया। उसी तरह, जो रूट भी ज्यादा देर तक क्रीज पर टिक नहीं पाए और कोलिन डी ग्रांडहोम की गेंद पर विकेट कीपर को कैच दे बैठे। कप्तान इयान मोर्गन भी सिर्फ 9 रनों के निजी स्कोर पर जेम्श निशाम की गेंद पर आउट हो गए।

पिच से शुरू से लेकर आखिर तक मूवमेंट मिल रहा था और गेंदबाजों ने इसका पूरा फायदा उठाया। वोक्स ने 37 रन देकर तीन विकेट हासिल किये। प्लंकेट ने बीच के ओवरों में गेंद थामी तथा 42 रन देकर तीन विकेट लिये। जोफ्रा आर्चर और मार्क वुड ने एक एक विकेट लिया। इंग्लैंड ने डेथ ओवरों में शानदार गेंदबाजी तथा अंतिम दस ओवर में केवल 62 रन दिये।

न्यूजीलैंड के लिये हेनरी निकोल्स (77 गेंदों पर 55) और विलिमयसन (53 गेंदों पर 30) ने दूसरे विकेट के लिये 74 रन जोड़े। कप्तान विलिमयसन के आउट होते ही टीम लड़खड़ा गयी। उसके बाकी बल्लेबाजों ने भी अच्छी शुरुआत की लेकिन केवल टॉम लैथम (56 गेंदों पर 47) ही 20 रन की संख्या पार कर पाये।

परिस्थितियों को देखते हुए इंग्लैंड के लिये लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं है क्योंकि पिच से अब भी गेंदबाजों को मदद मिल रही है। बादल छाये थे लेकिन विलियमसन ने टास जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पिच पर घास भी जिससे शुरू में तेज गेंदबाजों को मदद मिलती लेकिन न्यूजीलैंड ने मार्टिन गुप्टिल की एक और नाकामी के बाद बेहद सतर्क बल्लेबाजी की।

कीवी टीम की रणनीति भारत के खिलाफ सेमीफाइनल की तरह शुरुआती ओवरों में विकेट बचाये रखकर बाद में तेजी से रन जुटाने की थी। निकोल्स ने तब खाता भी नहीं खोला था जब उन्हें कुमार धर्मसेना ने पगबाधा आउट दे दिया था लेकिन रीप्ले से पता चला कि गेंद विकेट के ऊपर से जा रही थी। गुप्टिल ने जोफ्रा आर्चर पर अपर कट से छक्का लगाया लेकिन जब वह 19 रन पर थे तब वोक्स ने उन्हें पगबाधा आउट कर दिया।

गुप्टिल ने डीआरएस लेकर न्यूजीलैंड का ‘रिव्यू' भी गंवा दिया। विलियमसन ने बेहद सतर्कता बरती। उन्होंने 12वीं गेंद पर अपना खाता खोला। इससे वह किसी एक विश्व कप में सर्वाधिक रन (578) बनाने वाले कप्तान भी बने। लेकिन वह महत्वपूर्ण मोड़ पर आउट हो गये जिससे न्यूजीलैंड की लड़खड़ा गयी और उसकी रणनीति धरी की धरी रह गयी। प्लंकेट के बेहतरीन स्पैल से इंग्लैंड ने वापसी की। उनकी गेंद विलियमसन के बल्ले को हल्का स्पर्श करके विकेटकीपर जोस बटलर के दस्तानों में पहुंची थी।

धर्मसेना ने अपील ठुकरा दी लेकिन डीआरएस ने फैसला बदल दिया। विलियमसन को पवेलियन लौटना पड़ा। निकोल्स ने इसके बाद 71 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया लेकिन इसके तुरंत बाद प्लंकेट की गेंद विकेटों पर खेल गये। निकोल्स ने अपनी पारी में चार चौके लगाये। लगातार विकेट गिरने से रन गति धीमी पड़ गयी। बीच में 92 गेंदों तक कोई ‘बांउड्री' नहीं लगी। किस्मत भी कीवी टीम के साथ नहीं थी।

रोस टेलर (31 गेंदों पर 15) क्रीज पर पांव जमा चुके थे लेकिन मार्क वुड की पगबाधा की अपील पर अंपायर मारियास इरासमुस की उंगली उठ गयी जबकि गेंद विकेटों के ऊपर से निकल रही थी। जिम्मी नीशाम (25 गेंदों पर 19) पर्याप्त समय क्रीज पर बिताने के बाद पवेलियन लौटे। उन्होंने प्लंकेट की गेंद पर मिड आन पर खड़े रूट को कैच का अभ्यास कराया।

कोलिन डि ग्रैंडहोम ने भी 28 गेंदें खेली लेकिन 16 रन बनाकर डेथ ओवरों में आउट हो गये। वोक्स ने लैथम को भी शतक पूरा नहीं करने दिया। इन दोनों के कैच ‘सब्सिट्यूट' जेम्स विन्से ने लिये।17

वहीं, किस्मत के सहारे सेमीफाइनल में पहुंची न्यूजीलैंड की टीम ने खिताब की दावेदार मानी जाने वाली भारत को रोमांचक मुकाबले में 18 रनों से हराकर दूसरी बार फाइनल में अपना स्थान पक्का किया है। कीवी टीम को 2015 के फाइनल में आस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

मेजबान होने के नाते इंग्लैंड को उसकी घरेलू परिस्थितियों का फायदा मिल सकता है, लेकिन कीवी कोच गैरी स्टीड यह पहले ही कह चुके हैं उनकी टीम छुपा रुस्तम साबित हो सकती है।

न्यूजीलैंड ने भारत को हराकर दिखा दिया है अनिश्चितताओं के इस खेल में कुछ भी निश्चित नहीं है। हालांकि टीम की सलामी जोड़ी के लगातार असफल होने की वजह से कप्तान केन विलियमसन और रॉस टेलर के कंधों पर रन बनाने की अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है।

पिछले विश्व कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज मार्टिन गुप्टिल ने इस बार निराश किया है। गुप्टिल अब अपने खराब फॉर्म को भुलाकर फाइनल में यादगार पारी खेलना चाहेंगे ताकि उनकी टीम पहली बार विश्व चैंपियन बनने के सपने को पूरा कर सके।

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हालांकि हालिया फॉर्म, लीग चरण का प्रदर्शन और घरेलू मैदान होने की वजह से इंग्लैंड का पलड़ा थोड़ा भारी लगता है लेकिन एक टीम के तौर पर न्यूजीलैंड को बड़े मुकाबलों में हल्के में नहीं लिया जा सकता है और यही कारण है कि मेजबान इंग्लैंड को फाइनल में न्यूजीलैंड से कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है।

टीमें (संभावित)

इंग्लैंड : इयोन मोर्गन (कप्तान), मोइन अली, जोफ्रा आर्चर, जॉनी बेयरस्टो (विकेटकीपर), जोस बटलर, टॉम कुरैन, लियाम डॉसन, लियाम प्लंकट, आदिल राशिद, जोए रूट, बेन स्टोक्स, जेम्स विंस, क्रिस वोक्स, मार्क वुड।

न्यूजीलैंड : केन विलियम्सन (कप्तान), टॉम ब्लंडल, ट्रेंट बोल्ट, कोलिन डी ग्रांडहोम, लॉकी फग्र्यूसन, मार्टिन गुप्टिल, टॉम लाथम, कोलिन मनुरो, जिमी नीशम, हेनरी निकोलस, मिशेल सैंटनर, ईश सोढी, टिम साउदी, रॉस टेलर।