विश्व कप 2019 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे लोगों का रोमांच बढ़ता जा रहा है। विश्वकप से जुड़ी कुछ रोचक बातें हम आपको बताने जा रहे हैं। आज हम आपको वर्ल्ड कप के सभी टूर्नामेंटों में घटी विवादस्पद घटनाओं को बारे में बताएंगे। ये घटनाएं अभी तक विवादास्पद बनी हुई है।

एक नजर इन विवादास्पद घटनाओं पर-

* 1975 वर्ल्ड कप में गावस्कर की विवादस्पद पारी

1975 के वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के 335 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की सुस्त शुरुआत को दर्शकों ने समझा कि सुनील गावस्कर गेंद की चमक खत्म करना चाहते हैं, लेकिन जब उनकी वही रफ़्तार बनी रही तो दर्शकों में बेचैनी बढ़ने लगी।

भारत के समर्थकों की चीख-पुकार जारी रही और भारतीय खिलाड़ियों के चेहरे पर खीज देखी जा सकती थी। हर कोई फील्ड में जाकर ठीक से मैच खेलने का आग्रह कर रहा था और पुलिस उन्हें रोक रही थी।

गावस्कर ने उस मैच में 60 ओवर में नाबाद 36 रन बनाए और भारत तीन विकेट के नुकसान पर 132 रन बनाकर 202 रनों से हार गया। गावस्कर की पारी विवाद में रही। कई बातें सामने आई। कहा गया कि गावस्कर को टीम को लेकर परेशानी थी।

गावस्कर ने तब कुछ नहीं कहा। बहुत बाद में माना कि वह उनकी सबसे खराब पारी थी और यह भी कि उनका फॉर्म खराब चल रहा था और फॉर्म में वापसी के लिए वह ऐसा ही करते थे।

* कैच छूटा-मैच छूटा

1999 के वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका के आक्रामक और सलामी बल्लेबाज हर्शल गिब्स ने स्टीव वॉ का एक आसान कैच हाथ में लेकर तेजी से उछालने के क्रम में छोड़ दिया और वह भी ऐसे समय में जबकि ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड कप के सुपर सिक्स से बाहर होने वाली थी।

उसी समय ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ ने गिब्स से कहा था, 'दोस्त तुमने तो कैच नहीं वर्ल्ड कप गिरा दिया।' विवाद यह नहीं था कि वह कैच कैसे गिरा बल्कि बात यह सामने आई कि शेन वार्न ने पहले ही कह रखा था कि गिब्स कैच गिराएगा और वैसा ही हुआ।बाद में शेन वार्न ने कहा कि वह उनकी बहुत जल्दी खुशी मनाने की प्रवृति से वाकिफ थे और उसी की बुनियाद पर उन्होंने यह बात कही थी। मगर आज तक यह विवाद खत्म नहीं हो सका कि गिब्स ने जान-बूझकर कैच छोड़ा था या नहीं।

* क्लाइव लॉयड ने कैच छोड़ा

माना जाता है कि मैच जीतना है तो कैच पकड़ो और छोड़ दिया तो समझ लो कि मैच हाथ से निकल गया, लेकिन दूसरे वर्ल्ड कप में फ़ाइनल में कुछ अलग ही बात हुई। वेस्टइंडीज के क्लाइव लॉयड ने मैच जीतने के लिए कैच छोड़ा।

वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड के सामने 293 रनों का लक्ष्य रखा था। इंग्लैंड ने जवाब में धीमी शुरुआत की और इंग्लिश खिलाड़ी बॉयकॉट ने दोहरे अंक तक पहुंचने के लिए 17 ओवर ले लिए। एक बार वह रिचर्ड्स की गेंद को मारने के लिए बाहर निकले तो ग़लत शॉट खेल गए और कप्तान लॉयड ने उस आसान से कैच को छोड़ दिया।

उससे पहले, दूसरी तरफ खेल रहे ब्रियरली का कैच भी वह छोड़ चुके थे। रिचर्ड्स को लॉयड ने जब बताया कि उन्होंने जान-बूझकर कैच छोड़ा था तब जाकर उन्हें चैन मिला।

* अंपायरिंग की गलती

यह पहले वर्ल्ड कप की बात है। मैच था पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के बीच, पाकिस्तान ने सात विकेट के नुक़सान पर 266 रन बनाए थे। जब वेस्टइंडीज की पारी शुरू हुई तो पाक गेंदबाज सरफराज नवाज की तूफ़ानी गेंदबाजी के सामने वेस्टइंडीज का कोई खिलाड़ी जमकर नहीं खेल पा रहा था।

166 रन पर वेस्टइंडीज का आठवां विकेट गिर चुका था। वेस्टइंडीज लगभग मैच हार चुकी थी। अपील पर अपील जारी थी कि 203 पर नौवां विकेट गिर गया और होल्डर का विकेट भी सरफराज ने लिया। सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए डेरेक मरे सिर्फ टिके हुए थे और उनका साथ दे रहे थे एंडी रॉबर्ट्स। दोंनों ने मिलकर आखिरी विकेट के लिए 64 रनों की नाबाद पारी खेली। इस प्रकार पाकिस्तान सेमीफाइनल में प्रवेश करने से रह गया और वेस्टइंडीज ने आगे चलकर वर्ल्ड कप में खिताबी जीत हासिल की।

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* एक गेंद और 22 रन की जरूरत

1992 के वर्ल्ड कप में पहली बार दक्षिण अफ्रीका की टीम प्रतिबंध के बाद खेलने उतरी थी। दक्षिण अफ्रीका ने धमाकेदार खेल दिखाया और सेमीफ़ाइनल में प्रवेश किया। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के मौसम और क्रिकेट के डकवर्थ लुईस नियम ने दक्षिण अफ्रीका को जो नुक़सान पहुंचाया, उसे क्रिकेट प्रेमी आज तक भूल नहीं पाए हैं।

मैच था इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका का। खेल 10 मिनट की देर से शुरू हुआ और लंच में से यह समय काट लिया गया लेकिन कोई ओवर नहीं काटा गया। इंग्लैंड ने बारिश के कारण घटा दिए गए 45 ओवरों में 252 रन बनाए।

दक्षिण अफ्रीका ने 42.5 ओवरों में छह विकेट के नुक़सान पर 231 रन बना लिए थे, लेकिन तभी बारिश आ गई। लेकिन फिर डकवर्थ लुईस नियम लागू हुआ और जब दोबारा खेल शुरू हुआ तो दक्षिण अफ्रीका को एक गेंद पर 21 रन बनाने थे। स्कोर बोर्ड पर जब यह लिखा आया तो पता चला कि दक्षिण अफ्रीका तो मैच हार चुका है, बस औपचारिकता बची है।

'जंपिंग जावेद'

पाक क्रिकेटर जावेद मियांदाद और विवाद एक दूसरे का पर्याय माने जाते थे। बात चाहे ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज़ रॉडनी हॉग के रन आउट होने की हो, लिली से बहस या फिर अब्दुल क़ादिर को मैदान के बाहर चाक़ू लेकर डराने की, मैदान के अंदर-बाहर दोनों जगह विवाद मियांदाद के साथ रहे।

ये बात है 1992 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान मैच की है। भारत ने 49 ओवर में सात विकेट पर 216 रन बनाए थे। पाकिस्तान के लिए लक्ष्य हासिल करना ज़्यादा मुश्किल नहीं था। आमिर सुहैल और जावेद मियांदाद ने पाकिस्तान का स्कोर दो विकेट के नुक़सान पर 100 के पार पहुंचा दिया था। फिर अचानक पाकिस्तान के विकेट गिरने लगे। सुहैल 62 रन बनाकर आउट हो गए। मलिक 12 रन बनाकर चलते बने, इमरान ख़ान शून्य पर रन आउट हो गए। वसीम अकरम को विकेट कीपर मोरे ने चार रन पर स्टंप कर दिया।

भारतीय खिलाड़ियों में उत्साह बढ़ता गया और पाकिस्तानी ख़ेमे में हताशा। मोरे विकेट के पीछे बार-बार उछल-उछलकर अपील कर रहे थे। मियांदाद पर दबाव बढ़ता जा रहा था जिसे खत्म करने के लिए अचानक मियांदाद ने मोरे से कुछ कहा और फिर मोरे की तरह कूदकर नक़ल उतारने लगे। ऐसा दृश्य पहले किसी ने नहीं देखा था। पश्चिमी मीडिया ने दूसरे दिन 'जंपिंग जावेद' के नाम से ख़बर छापी और मियांदाद की वह तस्वीर लोगों की याद का हिस्सा बन गई।