नई दिल्ली। आईसीसी वर्ल्ड कप 2019 में अब कुछ दिन बाकी है। वर्ल्ड कप के इतिहास में अब तक केवल ऑस्ट्रेलिया की ही टीम ऐसी है जो दो से ज्यादा बार वर्ल्ड कप की ट्राफी पर कब्जा जमा चुकी है। पहला 1975 में इंग्लैंड में खेला गया था। वर्ल्ड कप हिस्ट्री में दो कप्तान ऐसे भी हैं जिन्होंने 2 बार लगातार अपनी टीम को वर्ल्ड कप जिताया। अब तक क्लाइव लॉयड और रिकी पोंटिंग ही यह कारनामा कर सके हैं। लॉयड ने 1975, 1979 में वेस्ट इंडीज को और पोंटिंग ने 2003, 2007 में ऑस्ट्रेलिया को लगातार 2 बार वर्ल्ड कप दिलाया है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं दुनिया के ऐसे ही कुछ कप्तानों की खासियत के बारे में जो वर्ल्ड कप को लेकर चर्चा में रह चुके है।

महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के इकलौते ऐसे कैप्टन है जो आईसीसी की तीनों ट्राफियों पर कब्जा जमा चुके हैं।
महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के इकलौते ऐसे कैप्टन है जो आईसीसी की तीनों ट्राफियों पर कब्जा जमा चुके हैं।

1- महेंद्र सिंह धोनी

महेंद्र सिंह धोनी को कैप्टन कूल के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे की वजह यह है कि धोनी विपरीत से विपरीत परिस्थितियो में धैर्य नहीं खोते और टीम को मोटिवेट करते रहते थे। वे कई बार टीम के लिए संकटमोचन की भूमिका निभा चुके है। वे टीम इंडिया इकलौते ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने आईसीसी की तीनों बड़ी ट्रॉफ़ी पर कब्ज़ा जमाया है। धोनी की कप्तानी में भारत आईसीसी की वर्ल्ड-टी 20 (2007 में), क्रिकेट वर्ल्ड कप (2011 में) और आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी (2013 में) का खिताब जीत चुका है।इसके अलावा धोनी ने कुल 199 वनडे मैचों कप्तानी की, जिसमें टीम इंडिया ने 110 मैच जीते हैं।

2-रिकी पोंटिंग

रिकी पोंटिंग ने 2003 से 2011 तक ऑस्ट्रेलिया टीम की कप्तानी की। रिकी पोटिंग के एक शानदार बैट्समैन के साथ- साथ एक सफल कप्तान भी रहे। उनकी कामयाबी के पीछे जो सबसे खास बात थी वो यह थी कि उनका खुद का शानदार प्रदर्शन जिसकी बदौलत वे कई बार टीम को जीत दिला चुके हैं। पोंटिग ने अपनी कप्तानी में दो बार लगातार 2003 और 2007 का वर्ल्ड कप बिना कोई मैच हारे जीता। 2011 के वर्ल्ड कप में भी पोंटिंग टीम के कैप्टन थे, लेकिन टीम क्वार्टर फाइनल में ही हार कर खिताब की रेस से बाहर हो गई थी। पोंटिंग के नाम बतौर कैप्टन वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा कुल 26 मैचों में जीत हासिल करने का रिकॉर्ड दर्ज है। इनमें से 24 मैच टीम ने लगातार जीते थे। दाएं हाथ के टॉप ऑर्डर बैट्समैन पोंटिंग ने कुल 375 वन-डे खेले और 13704 रन बनाए। इनका सर्वाधिक निजी स्कोर 164 रन था। वन-डे में इन्होंने 30शतक और 82 अर्द्धशतक लगाए।

कपिल देव
कपिल देव

3- कपिलदेव

- 1983 में देश को पहला वर्ल्ड कप दिलाने वाले कपिल देव हरियाणा के रहने वाले हैं। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया जीत दर्ज कर चमत्कार ही कर दिया था। इस चमत्कार के पीछे कपिल देव का अहम योगदान था। उस टूर्नामेंट के फाइनल में 'अजेय' कहलाने वाली वेस्ट इंडीज़ की टीम के खिलाफ जीत के पीछे सिर्फ कपिल देव की कप्तानी ही थी जिसकी बदौलत हमने पहली बार वर्ल्ड कप की ट्राफी पर कब्जा जमाया। ऐसा इसलिए क्योंकि उस टूर्नामेंट के लीग दौर में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए मैच में कपिल देव की तत्कालीन विश्वरिकॉर्ड 175 रनों की पारी की बदौलत ही हम वह विश्वकप जीत पाए थे।खुद शानदार प्रदर्शन करने के बाद टीम से बेहतरीन प्रदर्शन करवाना ही कप्तान का दायित्व होता है, सो, उस लिहाज़ से वह बेहतरीन कप्तान रहे।उस वर्ल्डकप को जीतने के बाद ही देश में क्रिकेट की लोकप्रियता ने नए आयाम स्थापित किए थे।

क्लाइव लायड
क्लाइव लायड

4- क्लाइव लॉयड

क्लाइव लॉयड ने बतौर कप्तान दो बार लगातार 1975 और 1979 में वेस्ट इंडीज को वर्ल्ड कप जिताया। इनकी कप्तानी में वर्ल्ड कप में टीम ने 15 मैच जीते। इन दोनों वर्ल्ड कप में वेस्ट इंडीज की टीम ने एक भी मैच नहीं हारे। इसकी सफलता पर इंडिया ने ही 1983 के वर्ल्ड कप में ब्रेक लगाया। 1983 के वर्ल्ड कप में भी क्लाइव ही टीम के कैप्टन थे।

क्लाइव को 1970 और 1980 के दौरान टीम को वर्ल्ड की मोस्ट पावरफुल टीम में बदलने का श्रेय जाता है। करीब 20 साल तक वेस्ट इंडीज ने टेस्ट फॉर्मेट में भी अजेय प्रदर्शन किया। बाएं हाथ के बल्लेबाज क्लाइव ने कुल 87 वन-डे मैच खेले और 1977 रन बनाए। इनका सर्वाधिक निजी स्कोर 102 रन था। क्लाइव ने एक शतक 11 अर्द्धशतक लगाए। ये दाएं हाथ के मध्यम तेज गति के गेंदबाज भी थे।

अर्जुन राणातुंगा ने साल 1996 में वर्ल्ड कप जीता था।
अर्जुन राणातुंगा ने साल 1996 में वर्ल्ड कप जीता था।

5- अर्जुन राणातुंगा

1996 में श्रीलंका की टीम को सबसे कमजोर आंका जाता था। लेकिन इसी सबसे कमजोर टीम ने ऑस्ट्रेलिया वेस्टइंडीज और भारत जैसी खतरनाक टीमों को हराकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। श्रीलंका क्रिकेट की सूरत को बदलने में अर्जुन राणातुंगा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। राणातुंगा के कप्तानी में ही श्रीलंका ने अपना पहला और एकमात्र वर्ल्ड कप जीतने का कमाल किया है।ट्रॉफी उठाने के 18 साल बाद, रणतुंगा ने स्वीकार किया कि उन्हें 1983 में कपिल देव की भारत और 1992 में इमरान खान की पाकिस्तान से प्रेरणा मिली थी। "