विशाखापट्टनम : इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के इतिहास में जब भी सफल कप्तानों की बात की जाएगी महेंद्र सिंह धोनी का नाम सबसे पहले आएगा। धोनी लीग के मौजूदा 12वें सीजन में भी चेन्नई को फाइनल में ले गए।

यह कुल आठवां मौका है, जब चेन्नई आईपीएल फाइनल में पहुंची है। चेन्नई ने शुक्रवार को क्वालीफायर-2 में दिल्ली कैपिटल्स को छह विकेट से मात देकर फाइनल में जगह बनाई, जहां रविवार को वह मुंबई इंडियंस के सामने होगी। धोनी ने दिल्ली के खिलाफ जीत और टीम के फाइनल तक के पहुंचने के सफर का श्रेय अपने गेंदबाजों को दिया है।

चेन्नई ने दिल्ली को 20 ओवरों में नौ विकेट पर 147 रनों से आगे नहीं जाने दिया और इस आसान से लक्ष्य को 19 ओवरों में चार विकेट खोकर हासिल कर लिया।

मैच के बाद धोनी ने कहा, "इस जीत का अहम हिस्सा लगातार विकेट लेना था। इसका श्रेय गेंदबाजों को जाना चाहिए। एक कप्तान सिर्फ कह सकता है कि मुझे यह चाहिए, लेकिन यह गेंदबाजों पर निर्भर रहता है कि वह किस तरह गेंदबाजी करेंगे और इसके लिए उन्हें काफी मेहनत करनी होती है। हम इस सीजन में यहां तक आए हैं, उसके लिए हमारे गेंदबाजी विभाग को धन्यवाद।"

धोनी ने कहा, "हमारे लिए यह आम रास्ता बन गया है, बीते सीजन जरूर काफी उम्मीदें थीं। आज टीम के खिलाड़ियों ने जिस तरह से खेला वह शानदार था। हमने लक्ष्य हासिल करने के लिए जिस तरह से बल्लेबाजी की, वह अच्छी रही।"

उन्होंने कहा, "विकेट पर स्पिनरों को टर्न मिल रही थी। हम सही समय पर लगातार विकेट ले रहे थे। उनकी बल्लेबाजी काफी मजबूत है। उनके पास बाएं हाथ के ज्यादा बल्लेबाज हैं और ग्राउंड भी छोटा था। हमारे पास बाएं हाथ का स्पिनर था, वह उसे निशाना बना सकते थे।"

पहली बार इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2019) के फाइनल में पहुंचने की कोशिश में लगी दिल्ली कैपिटल्स शुक्रवार को 12वें सीजन के क्वालीफायर-2 में गत विजेता चेन्नई सुपर किंग्स के सामने बड़ा स्कोर नहीं खड़ा कर पाई।

डॉ. वाई. एस. राजशेखर रेड्डी एसीए-वीडीसीए स्टेडियम में खेले जा रहे इस मैच में चेन्नई ने दिल्ली को 20 ओवरों में नौ विकेट के नुकसान पर 147 रनों पर ही रोक दिया।

आठवीं बार फाइनल में जाने की कोशिश में लगी चेन्नई के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया। उनके गेंदबाजों ने अच्छा काम किया और लगातार विकेट लेते रहे जिससे दिल्ली की टीम हमेशा एक बड़ी साझेदारी की कमी से जूझती रही।

विकेट लेने की शुरुआत दीपक चाहर ने पिछले मैच में अर्धशतकीय पारी खेलने वाले पृथ्वी शॉ (5) को 21 के कुल स्कोर पर आउट कर की। स्कोर 37 तक ही पहुंचा था कि हरभजन सिंह की एक गेंद शिखर धवन (18) के बल्ले का किनारा लेकर धोनी के दस्तानों में चली गई।

दिल्ली ने इस मैच में एक प्रयोग किया जो पूरी तरह से सफल नहीं हो सका। तीसरे नंबर पर कप्तान श्रेयस अय्यर के स्थान पर कोलिन मुनरो आए। मुनरो 24 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 27 रन ही बना सके। 57 के कुल योग पर वह रवींद्र जडेजा की गेंद को बाहर भेजने के प्रयास में ड्वायन ब्रावो के हाथों लपके गए।

दिल्ली को एक अदद साझेदारी की दरकार थी। कप्तान और ऋषभ पंत दोनों इसी जरूरी साझेदारी की फिराक में थे, लेकिन अय्यर, इमरान ताहिर की गेंद पर बड़ा शॉट मारने के प्रयास में सुरेश रैना के हाथों लपके गए। अय्यर ने महज 13 रन बनाए। अक्षर पटेल (3) का बल्ला भी खामोश रहा।

दिल्ली का स्कोर 13 ओवरों में पांच विकेट के नुकसान पर 80 रन था। यहां से पंत और शेरफेन रदरफोर्ड क्रीज पर थे। रदरफोर्ड ने 16वें ओवर में गियर बदलने की कोशिश की और हरभजन द्वारा फेंकी गई दूसरी गेंद पर छक्का लगाया लेकिन दो गेंद पर वह एक और बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में शेन वाटसन के हाथों लपके गए।

पंत ने अगले ओवर में ताहिर पर एक चौका और एक छक्का मारा। 18वें ओवर में ब्रावो ने कीमो पॉल (3) को आउट कर दिल्ली को आठवां झटका दिया। दिल्ली की उम्मीदें पंत से थीं जो 19वें ओवर की चौथी गेंद पर चाहर के हाथों पंत के आउट होने से टूट गईं। पंत ने 25 गेंदों की पारी में दो चौके और एक छक्के की मदद से 38 रन बनाए।

धोनी ने आखिरी ओवर जडेजा को दिया जिसमें 16 रन आए। इसमें जडेजा ने ट्रेंट बोल्ट (6) का विकेट भी लिया। ईशांत शर्मा (नाबाद 10) ने आखिरी दो गेंदों पर एक चौका और एक छक्का मार दिल्ली को थोड़ा ऊपर पहुंचाया।

चेन्नई के लिए दीपक चाहर, हरभजन सिंह, रवींद्र जडेजा और ड्वायन ब्रावो ने दो-दो विकेट लिए। एक विकेट इमरान ताहिर को मिला।