मुंबईः पिछले साल भारत के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी अनिल कुंबले के अचानक भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। हालांकि, समय के साथ इस विवाद की आंच धीमी पड़ गई थी लेकिन एक बार फिर यह बाहर आ गया है।

वेबसाइट 'ईएसपीएन' की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) की सदस्य डियाना इडुल्जी ने इस मामले में नया खुलासा करते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) पर आरोप लगाया है।

इडुल्जी का कहना है कि बीसीसीआई ने कुंबले के इस्तीफे के बाद रवि शास्त्री को भारतीय पुरुष टीम का कोच नियुक्त कर नियमों का उल्लंघन किया है। इडुल्जी ने कहा कि भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली लगातार बीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जौहरी को कुंबले के बारे में संदेश भेजते रहते थे, जिसके कारण कुंबले को इस्तीफा देना पड़ा।

उल्लेखनीय है कि बीसीसीआई ने जब कुंबले को बताया कि कप्तान कोहली उनके कोचिंग के तरीके से खुश नहीं हैं, तो कुंबले ने मुख्य कोच के पद से इस्तीफा दे दिया।

इडुल्जी का यह पूरा गुस्सा भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नियुक्ति के लिए बीसीसीआई द्वारा गठित की गई एड-हॉक कमिटि की घोषणा के बाद फूटा है। उनका कहना है कि अगर कोहली की प्राथमिकता पर शास्त्री को भारतीय पुरुष टीम का कोच बनाया जा सकता है, तो हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना की गुजारिश पर रमेश पोवार को महिला टीम के कोच पद पर बरकरार क्यों नहीं रखा जा सकता।

भारतीय टीम के साथ कुंबले का अनुबंध 2017 चैंपियंस ट्रॉफी तक था, लेकिन मंई के अंत में बीसीसीआई ने पहले ही मुख्य कोच के पद के लिए विज्ञापन जारी कर दिया। इसमें छह उम्मीदवारों के नामों की सूची थी, जिसमें कुंबले का नाम भी शामिल था। इस पूरी प्रक्रिया को सीओए और क्रिकेट सलाहाकार समिति (सीएसी) द्वारा देखा जा रहा था। सीएसी में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण शामिल हैं।

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इसके बाद सीओए के आदेश पर सीएसी ने कोहली से मिलकर मतभेदों को सुलझाने का सुझाव दिया, लेकिन वे इसमें नाकाम रहे। सीएसी ने कुंबले को ही कोच पद पर बनाए रखने पर सहमति जाहिर की लेकिन तभी बीसीसीआई ने कोच पद की उम्मीदवारी जाहिर करने की तारीख आगे बढ़ा दी और तब शास्त्री ने इस पद के लिए आवेदन किया और उन्हें 2019 विश्व कप तक के लिए कोच पद पर नियुक्त कर दिया गया।

इडुल्जी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया गलत थी और इसके साथ ही उन्होंने राय द्वारा एड-हॉक कमिटि के गठन पर आपत्ति भी जाहिर की है।