नई दिल्ली : भारत में चार में से एक फ्रंटलाइन कर्मचारी को ऐसा लगता है कि वह अपनी से जुड़े नहीं हैं। जबकि उनमें से तीन कर्मचारियों को लगता है कि वह एग्जीक्यूटिव क्लास से मीलों दूर हैं। गुरुवार को 'वर्कप्लेस फ्रॉम फेसबुक' की रिपोर्ट में यह बात उजागर हुई है।

फेसबुक द्वारा विकसित एंटरप्राइज कनेक्टिविटी प्लेटफार्म 'वर्कप्लेस' की 'डेस्कलेस नॉट वॉइसलेस' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में पाया गया कि भारतीय फ्रंटलाइन कर्मचारी कंपनी के मुख्यालय में अपने सहकर्मियों के साथ संचार व सहयोग के लिए सही रूप से जुड़े नहीं हैं।

इस अध्ययन में 100 से ज्यादा कर्मचारियों वाले भारतीय व्यवसायों में 1200 से ज्यादा व्यवसायिक नेतृत्वकर्ताओं एवं फ्रंटलाईन कर्मचारियों का सर्वे किया गया। इसमें निश्कर्श निकाला गया कि मैनेजर्स एवं फ्रंटलाइन स्टाफ द्वारा संचार करने और काम करवाने के तरीके में अंतर है।

लगभग सभी (95 प्रतिशत) फ्रंटलाइन कर्मचारियों ने कहा कि कंपनी में आंतरिक संचार की बाधा है क्योंकि उनके पास रोजगारदाताओं से नए विचार साझा करने के लिए टूल्स, माध्यम एवं संदर्भ की कमी है।

फ्रंटलाइन कर्मचारियों (60 प्रतिशत) ने कहा कि कंपनी के अंदर विचारों को साझा करने के लिए सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है कि उन्हें हर चीज की रिपोर्टिग अपने तत्कालिक मैनेजर के माध्यम से करनी होती है और उनमें से कई के पास ईमेल नहीं है, तथा उनमें से आधे (53 प्रतिशत) को ही रियल टाइम डिजिटल कोलाबोरेशन टूल्स उपलब्ध हैं। वहीं 76 प्रतिशत संचार के लिए अभी भी केवल औपचारिक बातचीत पर निर्भर हैं।

वर्कप्लेस एपीएसी के डायरेक्टर ल्यूक मैक्नेल ने कहा, "अध्ययन में यह पया गया है कि भारत में फ्रंटलाइन कर्मचारियों और मैनेजरों के बीच संचार की विफलता है।"