नई दिल्ली। मोदी सरकार 2 का पहला बजट पेश करने वाली है और इसको लेकर जोर शोर से तैयारियां चल रही हैं। बजट पेश होने में अब केवल कुछ ही दिन बचे हैं। इस समय हर किसी की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं। आम आदमी से लेकर किसान और व्यापारी वर्ग सभी उम्मीद लगाए बैठे हैं इस बजट में क्या कुछ खास मिलने वाला है। तो आइए जान लेते हैं कि कैसा हो सकता है मोदी सरकार यह बजट।

मध्यमवर्गीय लोगों को आयकर में छूट पर संशय !

न्यूज एजेंसी के सूत्रों की मानें तो बेसिक आयकर छूट की सीमा बढ़ाए जाने से अनेक लोगों को इनकम टैक्स फाइल करने की जरूरत नहीं होगी। इससे आईटी फाइलिंग में कमी आएगी और टैक्‍स बेस बढ़ाने का मकसद विफल हो जाएगा।

विशेषज्ञों ने भी बजट-पूर्व बैठक में वित्तमंत्री को सुझाव दिया है कि बेसिक आयकर छूट की सीमा में इजाफा करना सही कदम नहीं होगा क्योंकि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार का मुख्य फोकस देश में टैक्‍सपेयर्स का आधार बढ़ाना है।

इसके अलावा टैक्‍स कलेक्‍शन अपेक्षा से कम रहा है, लिहाजा इस कारण भी छूट की सीमा बढ़ाने की कोई संभावना नहीं है। साथ ही, मंत्रालय टैक्‍स से रेवेन्‍यू बढ़ाना भी चाहता है, क्योंकि विकास दर और उपभोग में वृद्धि के लिए निवेश की जरूरत है।

अंतरिम बजट में दिए थे छूट के संकेत

लोकसभा चुनावों से पहले अंतरिम बजट पेश करते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 5 लाख तक की सालाना कमाई करने वाले नौकरी पेशा को टैक्‍स फ्री करने का ऐलान किया था, लेकिन स्‍लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ था। कहने का मतलब यह है कि अंतरिम बजट में पांच लाख तक की सालाना कमाई करने वालों को टैक्‍स देने के झंझट से मुक्‍त किया गया था।

लोकलुभावन नहीं होगा बजट

माना जा रहा है कि प्रचंड बहुमत से सरकार में दोबारा वापसी करने के बाद मोदी सरकार लोकलुभावन बजट पेश कर सकती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। क्योंकि चुनाव से पहले भी इस तरह की अटकलें लगाई जा रही थी लेकिन पीएम मोदी ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया था। दरअसल फरवरी महीने से पहले ही पीएम ने संकेत दे दिया था कि बजट को लेकर कुछ कड़े फैसले दिखाई पड़ सकते हैं। उन्होंने एक अंग्रेजी चैनल को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा था कि आगामी आम बजट कोई लोकलुभावन बजट नहीं होगा और सरकार सुधारों के अपने एजेंडे पर ही चलेगी।

जानकारों की मानें तो बजट का मूल मकसद देश की लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था को वापस लाने के ट्रैक पर लाने के लिए कठोर फैसले भी ले सकती है। इसके अलावा देश में इन दिनों बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा है। इसके अलावा जीडीपी दर की भी हालत खस्ता है। इन सभी मुद्दों को लेकर चुनाव के दौरान मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर रही थी। हालांकि चुनाव में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा था फिर भी प्रचंड बहुमत से दोबारा सत्ता में आने पर मोदी सरकार हालात को सुधारने के लिए कुछ कड़े फैसले ले सकती है।