नई दिल्ली : गूगल ने कवि, पटकथा लेखक और सामाजिक बदलाव के पैरोकार कैफी आजमी को उनके 101वें जन्मदिन पर रंग बिरंगा डूडल बनाकर मंगलवार को श्रद्धांजलि दी। आज ही के दिन उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में सैयद अतहर हुसैन रिजवी का जन्म हुआ, बाद में वह कैफी आजमी के नाम से जाने गए।

कैफी आजमी प्रेम के साथ-साथ संघर्ष की कविताओं के प्रति जुनून के जरिए देश में 20वीं सदी के प्रख्यात कवियों में शुमार हुए। उनकी प्रमुख नज्मों में से एक ‘‘औरत'' को देश में चल रहे नागरिकता संशोधन कानून विरोधी प्रदर्शनों में अक्सर गाते हुए सुना गया। यह कविता महिलाओं के अधिकारों और बराबरी की पैरवी करती है।

कैफी आजमी पर बना गूगल डूडल
कैफी आजमी पर बना गूगल डूडल

सर्च इंजन गूगल ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा, ‘‘11 साल की उम्र में उन्होंने पहली कविता गजल की शैली में लिखी। महात्मा गांधी के 1942 के भारत छोड़ो स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित होकर वह एक उर्दू अखबार के लिए लिखने के लिए बंबई चले गए थे।''

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इसमें लिखा है, ‘‘उन्होंने कविताओं का अपना पहला संग्रह ‘झंकार' (1943) प्रकाशित किया और साथ ही प्रभावशाली प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) का सदस्य भी बन गए।'' उन्होंने एम ए सथ्यू की प्रसिद्ध फिल्म ‘‘गर्म हवा'' (1973) की पटकथा, संवाद और गीतों के लिए तीन फिल्मफेयर पुरस्कार समेत कई पुरस्कार जीते।

उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा गया और सर्वोच्च साहित्य सम्मानों में से एक साहित्य अकादमी फेलोशिप भी दी गई। कैफी आजमी ने 10 मई 2002 को अंतिम सांस ली।