बॉलीवुड में मां के रूप में पहचान बनाने वाली निरूपा रॉय को कौन नहीं जानता। निरूपा ने हर बड़े कलाकार की मां का रोल पर्दे पर बखूबी निभाया है। तभी तो निरूपा पर मां के लिए लिखा गया बेहतरीन गाना 'तू कितनी भोली है प्यारी प्यारी है ओ मां ' फिल्माया गया वहीं दूसरी ओर बेहतरीन संवाद 'मेरे पास मां है' भी निरूपा पर ही फिल्माया गया।

अपने अभिनय पर आज भी हिंदी फिल्मों के दर्शकों पर राज करने वाली निरूपा रॉय की आज पुण्यतिथि है। जब भी बॉलीवुड फिल्मों की मां को याद किया जाता है तो सबसे पहले निरूपा रॉय का नाम और चेहरा ही सामने आ जाता है।

आइये निरूपा रॉय की पुण्यतिथि पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें ....

- निरूपा रॉय का जन्म 4 जनवरी 1931 को गुजरात के बलसाड में हुआ था और 13 अक्टूबर को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था।

निरूपा रॉय 
निरूपा रॉय 

-निरूपा रॉय का असली नाम कोकिला बेन था।

- मात्र 15 साल की उम्र में निरूपा रॉय की शादी हो गई थी। सन् 1946 में निरूपा के पति ने एक विज्ञापन देखा जिसमें लिखा था एक्टर्स की जरूरत है। यहीं से शुरू हुआ निरूपा रॉय का फिल्मी करियर।

- गुजराती फिल्म 'गणसुंदरी' से उन्होंने शुरूआत की।

-निरूपा रॉय को बॉलीवुड में पहचान 1953 में आई फिल्म 'दो बीघा जमीन' से मिली। इस फिल्म से उन्होंने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया।

फिल्म में निरूपा रॉय का अभिनय इतना दमदार था की उन्हें इंटरनेशनल अवॉर्ड भी दिया गया था।

बेहतरीन अभिनय के लिए जानी जाती थी निरूपा रॉय 
बेहतरीन अभिनय के लिए जानी जाती थी निरूपा रॉय 

-निरूपा रॉय ने अपने करियर में जितनी भी फिल्में की उसमें वह अधिकतर मां के किरदार को निभाती हुई दिखाई दीं।

- निरुपा ने बॉलीवुड में लगभग 16 फिल्मों में देवी का किरदार निभाया था।

-निरूपा के देवी वाले किरदार को लोगों ने इतना पसंद किया कि वह उनको हकीकत में देवी समझने लगे थे।

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कहा तो यह भी जाता है कि लोग उनके घर जाकर उनके पैर छूते थे। उनके सीता वाले किरदार को लोगों ने सबसे ज्यादा पसंद किया।

- 50 के दशक में निरूपा रॉय को धार्मिक फिल्मों की रानी माना जाता था। एक्टर त्रिलोक कपूर के साथ उन्होंने दर्जनों धार्मिक फिल्में कीं।

निरूपा रॉय 
निरूपा रॉय 

एक दशक के बाद जब फिल्मों का दौर बदला तब निरूपा रॉय एक नए किरदार में सबके सामने आई और वो थी अमिताभ बच्चन की मां के रूप में।

अमिताभ की हर फिल्म में निरूपा उनके मां के रूप में नजर आने लगीं। 'दीवार' के बाद, 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'अमर अकबर एंथनी', 'सुहाग', 'इंकलाब', 'गिरफ्तार', 'मर्द' और 'गंगा जमुना सरस्वती' जैसी फिल्मों में निरूपा, अमिताभ की मां के रूप में नजर आईं।

निरूपा रॉय का बेहतरीन अभिनय 
निरूपा रॉय का बेहतरीन अभिनय 

साल 1999 में आई फिल्म 'लाल बादशाह' में यह दोनों आखिरी बार मां-बेटे के किरदार में नजर आए।

निरूपा रॉय ने अपने पांच दशक लंबे बॉलीवुड कैरियर में लगभग 300 फिल्मों में काम किया। भारतीय सिनेमा के इतिहास में निरूपा रॉय का एक खास मकाम हमेशा रहेगा।