मुंबई : गुलजार एक ऐसा नाम है जो किसी पहचान का मोतहाज नहीं। उन्होंने अपनी कलम के दम पर अपने लिए एक बड़ा मुकाम बनाया। आज न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी गुलजार के फैंस मौजूद हैं। वैसे तो गुलजार की पहचान प्रसिद्ध गीतकार के रूप में है लेकिन उन्होंने पटकथा लेखन, फिल्म निर्देशन, नाट्यकला, कविता लेखन में भी महारत हासिल है। गुलजार साहब का आज जन्मदिन है। गुलजार साहब का जन्‍म आजादी से पूर्व पाकिस्‍तान में आज (18 अगस्‍त 1934) ही के दिन हुआ था।

सिख परिवार में जन्मे गुलजार का असली नाम संपूर्ण सिंह कालरा है। गुलजार उनका पेन नेम है। आंधी, मौसम, मिर्जा गालिब (टीवी सीरीज), किरदार जैसी फिल्‍मों का निर्देशन करने वाले गुलजार ने बॉलीवुड की कई फिल्‍मों के लिए गीत लिखे हैं। उनके इस योगदान के लइए उन्‍हें 2004 में पद्मभूषण से नवाजा गया था। इसके अलावा बीस बार फिल्मफेयर और पांच बार राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुके हैं। इसके साथ ही 2010 में उन्हें स्लमडॉग मिलेनियर के गाने 'जय हो' के लिए ग्रैमी अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। वहीं गुलजार को प्रतिष्ठित दादा साहब फालके पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

गुलजार साहब की शुरुआती जिंदगी

वैसे तो गुलजार साहब का जन्म पाकिस्तान में हुआ था लेकिन विभाजन के समय उनका परिवार पंजाब के अमृतसर में आकर बस गया। वहीं से गुलजार मुंबई चले आए। मुंबई में गुलजार ने एक गैरेज में बतौर मैकेनिक काम किया। वहीं खाली समय में शौकिया तौर पर कविताएं लिखने लगे, लेकिन कुछ वक्त बाद उन्होंने गैरेज का काम छोड़ हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक बिमल राय, हृषिकेश मुख़र्जी और हेमंत कुमार के सहायक के रूप में काम करना शुरू कर दिया।

राखी से शादी

1973 में गीतकार गुलजार ने अभिनेत्री राखी से शादी की थी। शादी के कुछ समय बाद ही उनकी बेटी मेघना पैदा हुईं जोकि आज बॉलीवुड निर्देशक हैं। उन्‍होंने राजी और तलवार जैसी फिल्‍में बनाई हैं। शादी के कुछ वक्‍त बाद ही राखी और गुलजार के बीच दूरियां आ गईं और दोनों अलग हो गए। राखी और गुलजार के अलग होने की वजह एक फिल्‍म थी। गुलजार चाहते थे कि शादी के बाद राखी फिल्‍मों में काम न करें, लेकिन राखी ने फिल्‍म कभी-कभी (1976) में काम करने के लिए हामी भर ली और शूटिंग शुरू कर दी। हालांकि 40 साल से अलग अलग रहने के बाद भी उन्‍होंने तलाक नहीं लिया है।

गुलजार का सफेद कुरता पायजामा से संबंध

गुलजार हर एक कार्यक्रम में सफेद कुरता पायजामा पहने नजर आते हैं। इस पर मेघना कहती हैं- 'मुझे कभी लगा नहीं कि ये बदलना चाहिए। जब हम एक दफे न्यूयॉर्क गए थे तो वहां मैंने पापा को एक ब्लू या ग्रे विंटर कोट खरीदकर दिया था। इसके अलावा मैंने कभी भी उन्हें रंगीन कपड़ों में नहीं देखा। मेरी शादी पर भी उन्होनें ऑफ व्हाइट रंग का कुर्ता पहना था।"

फिल्मी गानें लिखना नहीं था पसंद

गुलजार साहब हर किस्म के गाने लिखने में माहिर हैं। लेकिन उन्हें फिल्मी गाने लिखना कुछ खास पसंद नहीं था। एक इंटरव्यू में गुलजार ने बताया कि शायरी उनका पहला प्यार है, और जब उन्होंने अपने करियर का पहला फिल्मी गीत 'मोरा गोरा अंग लई ले' लिखा तो वो फिल्मों के लिए गाने लिखने को लेकर बहुत ज्यादा उत्सुक नहीं थे, लेकिन फिर एक के बाद एक गाने लिखने का मौका मिलता गया और वो गाने लिखते चले गए। 'इस मोड़ से आते हैं कुछ सुस्त कदम रस्ते', 'मुसाफिर हूं यारों', 'आने वाला पल जाने वाला है', 'मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास है' से लेकर 'कजरारे-कजरारे' और 'बीड़ी जलई ले' जैसे गाने गुलजार के लेखन का ही कमाल हैं।