हैदराबाद : अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री और महानायक अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन आज अपना 71वां जन्मदिन मना रही हैं। उनका जन्म 9 अप्रैल 1948 को जबलपुर में हुआ था। वह प्रख्यात पत्रकार तरुण कुमार भादुड़ी की तीन पुत्रियों में सबसे बड़ी हैं। तरुण कुमार का वास्तविक नाम सुधांशु भूषण था। जया की दो छोटी बहनों के नाम नीता और रीता हैं।

जया बचपन से ही जिद्दी स्वभाव की थीं। उन्हें जो चाहिए, वह हासिल कर छोड़ती थीं। वे भोपाल के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट में पढ़ती थीं। खेलकूद में भी वे हिस्सा लेती थीं और 1966 में उन्हें प्रधानमंत्री के हाथों एन.सी.सी. की बेस्ट कैडेट होने का तमगा मिला था। उन्होंने छःसाल तक भरतनाट्यम का प्रशिक्षण भी लिया था। जया दिलीप कुमार की बहुत बड़ी फेन थीं।

जया बच्चन ने अपने एक्टिंग करियर की शुरूआत 15 साल की उम्र में ही कर दी थी। उन्होंने सत्यजीत रे की फिल्म 'महानगर' में सपोर्टिंग एक्ट्रेस का किरदार निभाया था। यह एक बंगाली फिल्म थी और 1963 में रिलीज हुई थी। डायरेक्टर सत्यजीत रे से प्रभावित होकर जया बच्चन ने एफटीआईआई ज्वाइन किया था।

जया इसी संस्थान में पढ़ाई कर रही थीं तो उसी दौरान अमिताभ बच्चन अपनी पहली फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ के लिए आए। जया की सहेलियां उन्हें लंबू लंबू कहकर चिढ़ रही थी लेकिन जया ने उन्हें संजीदगी से लिया।

आपको यह बता दें कि जया और अमिताभ बच्चन की मुलाकात ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फिल्म 'गुड्डी' के सेट पर कराई थी। इसके बाद 1973 में अमिताभ बच्चन और जया 'ज़ंजीर' में साथ-साथ नजर आए। इसी फिल्म के दौरान दोनों करीब आए और दोनों ने शादी करने का फैसला ‌ले लिया। 3 जून, 1973 को दोनों शादी के बंधन में बंध गए। बताया जाता है कि इन दोनों की शादी में सिर्फ पांच लोग शामिल हुए थे।

जया बच्चन और अमिताभ बच्चन ने एक साथ कई फिल्मों में काम किया है। 1972 से 81 तक जया ने अमिताभ बच्चन के साथ कुल आठ फिल्में की हैं। ये हैं- बंसी-बिरजू, एक नजर, जंजीर, अभिमान, चुपके-चुपके, मिली, शोले और सिलसिला। 'कभी खुशी-कभी गम' में भी वे साथ-साथ आए थे। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि फिल्म शोले के समय जया प्रेग्नेंट थी। जब उन्होंने फिल्म में राधा का किरदार निभाया था।

जया बच्चन लिखने के भी शौकीन थीं। उन्होंने अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फ़िल्म 'शहंशाह' (1988) की स्टोरी लिखी थी। शंहशाह फिल्म का डायलॉग-‘रिश्‍ते में तो हम तुम्‍हारे बाप होते हैं, नाम है शहंशाह’ लोगों के बीच आज भी काफी मशहूर है।

अपने अपेक्षाकृत छोटे-से करियर में जया ने 'जवानी दीवानी, अनामिका, कोरा कागज, कोशिश, पिया का घर, बावर्ची, गाय और गौरी, मन का आंगन, नौकर, नया दिन-नई रात, परिचय, फागुन, समाधि और शोर जैसी फिल्मों में काम किया है।

साल 1992 में ही जया बच्चन को 'पद्मश्री' सम्मान से नवाजा गया। साथ ही उन्हें उपहार, अभिमान, कोरा कागज, नौकर, हजार चौरासी की मां, फिज़ा, कभी खुशी-कभी गम और कल हो ना हो जैसी फिल्मों के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है। इसके अलावा 2004 में जया बच्चन समाजवादी पार्टी की तरफ से राज्यसभा की सदस्य बनीं।