भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की सफल अभिनेत्री में से एक शर्मिला टैगोर ने हिंदी फिल्मों में जो मुकाम हासिल किया है, वह कम ही लोगों को नसीब होता है। शर्मिला का वर्ष 1959 से 1984 तक रुपहले पर्दे पर रूप और अदाओं का राज रहा है। आज वह 74 वर्ष की हो गई।

शर्मिला टैगोर का जन्म 8 दिसंबर 1944 को हैदराबाद में में एक हिंदू बंगाली परिवार में हुआ था। शर्मिला एक नामी खानदान से ताल्लुक रखती है। उनके पिताजी गितिन्द्रनाथ टैगोर एल्गिन मिल्स के ब्रिटिश इंडिया कंपनी के मालिक के महाप्रबंधक थे। शर्मिला टैगोर की गणना अभिजात्य-वर्ग की नायिकाओं में की जाती है।

शर्मिला टैगोर ने महज 13 साल की उम्र में सत्यजीत राय की बंगाली फिल्म अपुर संसार (दी वर्ल्ड ऑफ अपू) में एक अभिनेत्री के रूप में अपना करीयर शुरू किया। सत्यजित राय के अलावा बांग्ला-फिल्मकार तपन सिन्हा, अजॉय कार और पार्थ चौधुरी ने भी शर्मिला की प्रतिभा का उपयोग अपनी फ़िल्मों में किया।

बॉलीवुड में भी बांग्ला फिल्मकार शक्ति सामंत ने अपनी रोमांटिक फिल्म 'कश्मीर की कली' (1964) में शर्मिला को शम्मी कपूर के साथ पेश किया।

'अराधना', 'अमर प्रेम', 'सफर', 'कश्मीर की कली', 'मौसम', 'तलाश','वक्त','फरार', 'आमने-सामने' जैसी फिल्में शर्मिला के बेहतरीन अभिनय की कहानी बयां करती हैं।

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आपको बता दें कि शर्मिला की नानी नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के भाई द्विजेंद्रनाथ टैगोर की नातिन थीं। शर्मिला का विवाह भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान पटौदी के नवाब मंसूर अली खान पटौदी से 27 दिसंबर, 1969 को हुआ था।

पटौदी की बारात शर्मिला के कोलकाता के आवास पर आई थी। शादी के लिए छत पर शामियाना तान कर विशेष व्यवस्था की गई थी। शादी से पहले नवाब की मां की इच्छा के अनुसार शर्मिला को कलमा पढ़ाकर मुस्लिम बनाया गया। उनका नाम 'आयशा सुल्ताना' रखा गया। यह नाम सिर्फ निकाहनामे पर ही इस्तेमाल हुआ। वे अब तक पूरी दुनिया के लिए शर्मिला टैगोर ही बनी रहीं। 70 साल की आयु में पटौदी का निधन हो गया। शर्मिला आज अकेली हैं। उनके तीन बच्चे हैं -सैफ अली खान, सबा अली खान और सोहा अली खान।

शर्मिला की ताजगी और गालों में गहरे पड़ने वाले डिम्पलों का दर्शकों ने खुले मन से स्वागत किया। इसके बाद की 'सावन की घटा' फ़िल्म में शर्मिला ने छोटे कपड़े पहन कर सेंसेशन मचा दिया था। उस दौर के दर्शक निम्मी, मीना कुमारी, माला सिन्हा, वहीदा रहमान के परिचित चेहरों से बाहर आकर कुछ नया महसूस करना चाहते थे।

शर्मिला ने सिर पर पल्लू धारण करने वाली और ललाट पर बड़ा-सा लाल टीका लगाने वाली नायिकाओं की परम्परा से हटकर कुछ नया किया था। इसके साथ ही फिल्मों में ग्लैमर का प्रवेश हो गया।

उन्हें वर्ष 2013 में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से नवाजा जा चुका है। शर्मिला भारतीय फिल्मों की सशक्त अभिनेत्री रही हैं। उन्हें बेहतरीन अभिनय के लिए दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और दो बार फिल्मफेयर पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।